आओ बनायें कैंसरमुक्त उत्तरप्रदेश: नयति हॉस्पिटल

विश्व कैंसर दिवस पर नयति हॉस्पिटल में कैंसर रोगियों के लिए निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग क्लीनिक
कैंसर सम्बन्धी जाँच पर 50 प्रतिशत की छूट

मथुरा 3 फरवरी। नयति मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कैंसर रोगियों के लिए मुफ्त कैंसर स्क्रीनिंग क्लीनिक तथा कैंसर से सम्बंधित जांच पर 50 प्रतिशत छूट की घोषणा की। नयति हॉस्पिटल में देश-विदेश के जाने माने कैंसर अस्पतालों को अपनी सेवाएं दे चुके डॉक्टरों की टीम मौजूद है जैसे कि मुम्बई का टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट आदि।
इस अवसर पर नयति हॉस्पिटल की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के सबसे अधिक कैंसर रोगी लगभग 16 प्रतिशत पाये जाते हैं और कैंसर के इलाज की सबसे अधिक आवश्यकता उत्तर प्रदेश के लोगों को ही है। हमने पिछले दो साल में कई कैम्प किये जिनमें कई लोग कैंसर रोगी पाये गये। तभी हमने निर्णय किया कि एक ऐसा कैन्सर सेन्टर खोला जाये जो पूरे उत्तर भारत के कैन्सर के मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो। आज मुझे बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि अब नयति हाॅस्पिटल में कैन्सर के मेडिकल, सर्जीकल तथा रेडियेशन से सम्बन्धित सभी विभाग एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। लोगों में कैन्सर को लेकर जागरुकता फैलाने के लिये पिछले विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर होप फाॅर कैन्सर कैम्पेन की शुरुआत की थी इसके अन्तर्गत हमने कई कैम्पों का आयोजन किया। आओ हमसब मिलकर उत्तर प्रदेश को कैंसर मुक्त बनायें।
हमने शुरू से यह प्रयास किया है कि टिअर 2 और टिअर 3 शहरों के लोगों तक भी स्वास्थ्य सम्बन्धी हर वो सुविधा अथवा तकनीक पहुंचे जो दुनिया के किसी भी शहर के लोगों तक पहुँच रही है। हमने नयति हॉस्पिटल में लोगों को बेहतरीन विश्वस्तरीय सेवाएं देने का प्रयास किया है। कैंसर का नाम सुनते ही एक अजीब सा भय दिमाग में आता है, लेकिन विज्ञान ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि कैंसर अब कोई लाइलाज बीमारी नहीं रह गयी है। समय पर अगर इसका इलाज शुरू किया जाये तो कैंसर से मुक्ति संभव है।
नयति हॉस्पिटल के कैंसर रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. डॉ. शान्तनु चैधरी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खानपान की अनियमितता तथा तंबाकू आदि के सेवन के कारण मुख कैंसर के रोगी तथा महिलाओं में भी स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ओवरी कैंसर आदि अधिक पाये जाते हैं। पहले कैंसर का इलाज लम्बा चलने वाला तथा अधिक कष्टदायक था किन्तु अब नयी तकनीक तथा मशीनें आ जाने के बाद कैंसर के इलाज में काफी सरलता हो गयी है। जागरूकता की कमी के कारण लोग कैंसर होने के शुरूआती लक्षणों को समझ नहीं पाते और उसका खुद ही इलाज करते रहते हैं, और जब तक वे डॉक्टर के पास जाते हैं तब तक कैंसर तीसरी या चौथी स्टेज तक पहुँच चुका होता है। समाज यदि जागरूक हो तो हम कैंसर के शुरूआती दिनों में ही इसका इलाज शुरू करके इसको जड़ से खत्म कर सकते हैं।

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