नयति ने मनाया वर्ल्ड सुसाइट प्रिवेंशन डे

मथुरा 9 सितम्बर। जिन्दगी को जीने के लिए हम सभी को पता नहीं कितनी दुश्वारियों से गुजरना पड़ता है, सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक के बीच का समय एक आपाधापी में ही बीतता है। हर व्यक्ति के जीवन में सुख दुःख क्रमबद्ध तरीके से आते जाते रहते हैं, कोई तो इनका सामना कर लेता है और कोई इनका सामना नहीं कर पाता और एक समय ऐसा आता है कि उसे आगे पीछे कुछ दिखाई नहीं देता और वो आत्महत्या तक कर लेता है। ये कहना था नयति मेडिसिटी के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. सागर लवानिया का जो हॉस्पिटल परिसर में वल्र्ड सुसाइट प्रिवेंशन डे पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वल्र्ड सुसाइट प्रिवेंशन डे की शुरुआत 2003 में पहली बार इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइट प्रिवेंशन द्वारा की गई थी। हर साल आज के दिन कोई न कोई थीम रखी जाती है। इस बार की थीम है कि एक मिनट लो जिन्दगी को बदलो।
उन्होंने बताया कि दुनिया में हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं और इससे 25 गुना अधिक लोग आत्महत्या करने का प्रयास करते हैं। कुछ लोग कभी आत्महत्या करने का केवल दिखावा करते हैं वे मरना नहीं चाहते फिर भी उनकी जान चली जाती है। आत्महत्या करने के कई कारण हैं जिनमें सबसे बड़ा कारण है अवसाद। भारत में 15 से 20 साल तक के बच्चों में भी आत्महत्या देखने को मिल रही है, परीक्षाओं में कम नम्बर आने का दवाब इसका प्रमुख कारण है। सूखा तथा बाढ़ के कारण किसान भी आत्महत्या कर लेते हैं। आजकल ब्लू व्हेल गेम के कारण भी बच्चे सुसाइट कर रहे हैं, तो अपने बच्चे पर नजर रखनी चाहिए और बच्चे की गतिविधियों में जरा सा भी अन्तर दिखाई दे तो उससे तुरन्त बात करनी चाहिए।
आत्महत्या से बचाव संभव है, जिस समय आत्महत्या करने का विचार मन में आये तो तुरंत किसी न किसी से कुछ भी बात करें चाहे सामने वाला शख्स अन्जान ही क्यों न हो। घर परिवार में कोई व्यक्ति यदि गुमसुम या अकेले में रहना शुरू कर दे तो उसे किए मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए।
अन्त में उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि आत्महत्या से बचने के लिए चलाए जाने वाले इस प्रकार के कार्यक्रम वर्ष में केवल एक बार नहीं चलाया जाना चाहिए बल्कि प्रत्येक दिन इस प्रकार के जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि जब भी कोई व्यक्ति असमय इस प्रकार के कदम उठाता है तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है।
इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के योग एवं वैलनेस विभाग के प्रमुख आशुतोष योगाचार्य ने कहा कि यदि प्रतिदिन कुछ समय योग आसन आदि किये जायें तो शरीर और मस्तिष्क में सकारात्मक विचार रहते हैं।
यदि कोई व्यक्ति अवसाद से ग्रस्त है तो उसे शशांक आसन, सूर्य नमस्कार, भ्रामरी प्राणायाम और ध्यान आदि करने चाहिए, इनको करने से व्यक्ति अवसाद से बाहर आ सकता है।
अमरनाथ स्कूल के डायरेक्टर डॉ. अनिल वाजपेयी ने कहा कि नयति द्वारा आयोजित किया गया यह कार्यक्रम काफी सराहनीय है और मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आज के इस कार्यक्रम द्वारा यहां आए हुए बच्चे अवश्य जागरूक हुए होंगे और यहां सीखी हुई बातों को अपने अपने स्तर से समाज में फैलाएंगे। मुझे उम्मीद है कि नयति मेडिसिटी आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रम चलाता रहेगा जिनसे बच्चों में जागरूकता फैले।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से नयति के डायरेक्टर डॉ. टी.एस. कुकरेजा, डॉ अपूर्व नारायण, विवेक दवे, रितेश शर्मा, नवनीत सिंह, शाजिया शेख, विशाका रंजन तथा अमरनाथ स्कूल के बच्चे उपस्थित थे।

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