नयति में 83 वर्षीय बृद्धा की टूटी रीढ़ की हड्डी का बैलून काइफोप्लास्टी विधि से हुआ सफल ऑपरेशन

नयति है सबके लिए, वाजिब दामों पर विश्वस्तरीय उपचार देना ही हमारा उद्देश्य : नीरा राडिया
मथुरा 8 अगस्त। नयति मेडिसिटी में 83 वर्षीय मात्र 40 किलो वजन की बृद्ध महिला की टूटी रीढ़ की हड्डी का बिना चीरे के माध्यम से अत्यंत नयी तकनीक काइफोप्लास्टी बैलून विधि के द्वारा सफल ऑपरेशन किया गया। ज्ञात हो कि नयति के डॉक्टरों द्वारा रीढ़ की हड्डी के इस ऑपरेशन के दूसरे ही दिन बृद्धा को बैठा भी दिया गया।
मथुरा की ही रहने वालीं 83 वर्षीय हेमकान्ति चलते समय फिसलकर गिर गयीं थीं। उसके बाद उनसे खड़ा नहीं हुआ गया और वे चलने में असमर्थ थीं। परिवार के लोगों को पता चलने के बाद उनको पास के ही अस्पताल में ले जाया गया। जहाँ उनके अत्यन्त कमजोर शरीर तथा अवस्था को देखते हुए डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया, जिसके बाद परिवारीजन उनको नयति मेडिसिटी लेकर आये। जहां वे नयति मेडिसिटी के हड्डी रोग विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. यूके साधू, सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विवेक फँसवाल, डॉ. जीतेन्द्र गुप्ता तथा उनकी टीम से मिले जहां उनका सीटी स्कैन एवं एमआरआई कराई गई तो पता चला कि उनकी रीढ़ की दो हड्डी टूटकर पिचक गय हैं। उनकी उम्र तथा अत्यन्त कमजोर शरीर को देखते हुए डॉक्टरों ने उनकी रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन अत्यंत नयी तकनीक बैलून काइफोप्लास्टी विधि से करने का फैसला किया। इस ऑपरेशन में ना ही कोई टांका लगता है और ना हीं खून का रिसाब होता है।ऑपरेशन के अगले ही दिन वे बैठने लगीं थीं, अब वे बिल्कुल स्वस्थ हैं और जल्द ही पहले की तरह अपनी दिनचर्या प्रारम्भ कर सकती हैं।
इस अवसर पर नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि हमारे यहाँ के बेहतरीन डॉक्टरों की टीम द्वारा ब्रजवासियों तक जिस प्रकार विश्वस्तरीय इलाज पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है उससे मुझे अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। मुझे खुशी है कि जो सपना आंखों में संजोये हम ब्रजवासियों की सेवा करने आये थे वो सपना सच होता दिखाई दे रहा है।
नयति मेडिसिटी से पहले जो इलाज केवल दिल्ली मुम्बई जैसे महानगरों में ही मिल पाता था वो अब लोगों को नयति मेडिसिटी, मथुरा तथा नयति मेडिसेंटर, आगरा में ही प्राप्त हो सकता है। दिल्ली से ही लगभग 10 से 15 मरीज प्रतिदिन नयति मेडिसिटी आकर अपना इलाज निरन्तरता में करा रहे हैं, और तो और अब तो कई विदेशी मरीज भी हमारे यहां आकर अपना इलाज करा रहे हैं।
नयति के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. यू.के. साधू ने कहा कि एक उम्र के बाद हमारी हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगतीं हैं। पहले जब भी इस प्रकार के हादसे होते थे तब मरीज को महीनों तक बिस्तर पर आराम करने के साथ किसी पर आश्रित भी रहना पड़ता था। लम्बे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण मरीज को बेडसोर (पीठ में घाव) तथा न्यूमोनिया भी हो जाया करता था, जिससे मरीज की जान का खतरा भी बढ़ जाता था। अब नई तथा आधुनिक तकनीक आने के बाद रीढ़ की हड्डियों का कम समय में उपचार सम्भव है।
हेमकान्ति जब हमारे यहां आयीं थीं तब उनकी हालत काफी नाजुक थी। उनकी रीढ़ की दो हड्डी टूट कर पिचक गयी थीं। बैलून काईफोप्लास्टी विधि के माध्यम से हमने उनके टूटे हुए तथा आपस में पिचके हुए रीढ़ की हड्डी को फुलाकर उसमें हड्डी का सीमेन्ट भर दिया, जिसके बाद हेमकान्ति तुरन्त दर्द में आराम मिल गया। अब हेमकान्ति स्वस्थ हैं तथा जल्द ही पहले की तरह अपना जीवन जी सकेंगीं।

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