नयति मेडिसिटी ने चलने फिरने से असमर्थ को लेप्रोस्कोपी सर्जरी के माध्यम से रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन कर चलाया

मथुरा 16 फरवरी। शहर के बीच में रहने वाले अनुराग (काल्पनिक नाम) पिछले काफी समय से पीठ तथा कमर दर्द की शिकायत से पीड़ित थे। काफी समय तक कई जगह इलाज कराने के बाद भी उनको कोई लाभ नहीं हुआ और एक दिन ऐसा आया कि वो सुबह जगे लेकिन बिस्तर से उठ नहीं पाये। उनके परिवार वाले उनको इस हालत में देखकर चिन्ता में पड़ गए, किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि अनुराग को आखिर क्या हो गया है। तभी उन्हें किसी ने नयति मेडिसिटी के बारे में बताया और परिवारीजन अनुराग को लेकर नयति मेडिसिटी आ गए।

 

नयति मेडिसिटी में न्यूरो सर्जरी  विभाग के प्रमुख डॉ.एस के गुप्ता ने अनुराग की गहन जांच की तो पाया कि अनुराग की रीढ़ की हड्डी की नस डिस्क के खिसकने से दब गई है जिसकी वजह से अनुराग हिल भी नहीं पा रहे थे। डॉ. गुप्ता ने अनुराग का तुरन्त ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। एक छोटे से चीरे के ऑपरेशन के माध्यम से अनुराग दो दिन में ही अपने घर चले गए और एक हफ्ते में वो अपने काम पर भी जा सकते हैं।

 

ऑपरेशन के बाद अनुराग ने बताया कि जब मेरी हालत खराब हुई थी तथा ऐसा लग रहा था जैसे शरीर को लकवा मार गया हो। पहाड़ जैसी जिन्दगी कैसे कटेगी कुछ समझ नहीं आ रहा था, लेकिन डॉ. गुप्ता एक भगवान के रूप में मुझे मिले जिनकी वजह से में बिल्कुल ठीक हो सका।

 

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के न्यूरो विभाग के प्रमुख डॉ.एस के गुप्ता ने बताया कि जब अनुराग हमारे पास आये थे तो लेटी हुई अवस्था में आये थे उनपर खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। जांच करने पर पता चला कि इनको डिस्क प्रोलेब्स की शिकायत हो गयी थी। डिस्क के खिसकने से इनकी नसों पर दवाब पड़ रहा था। दूरबीन द्वारा हमने एक छोटे से चीरे के माध्यम से इनका ऑपरेशन करके नसों पर पड़ रहे डिस्क को हटाकर खत्म कर दिया। अब ये पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा एक हफ्ते बाद अपने काम पर भी जा सकते हैं।

 

उन्होंने कहा कि अभी तक इस प्रकार की सर्जरी की सुविधा मथुरा तथा आसपास के क्षेत्रों में नहीं थी और इसके लिए लोगों को अपने इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता था। नयति मेडिसिटी का शुरु से यह प्रयास रहा है कि जो सुविधा दिल्ली अथवा मेट्रो सिटीज के लोग ले पा रहे हैं वही सारी सुविधाएं यहां के लोगों को भी मिलें।

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