नयति मेडिसिटी में डायलेसिस विभाग को हुआ एक वर्ष 200 मरीजों की हुई 7200 से अधिक डाइलेसिस

मथुरा 24 मार्च। नयति मेडिसिटी में डायलेसिस विभाग को एक वर्ष पूरा हो गया इस अवसर पर नयति मेडिसिटी में डायलेसिस कराने आने वाले मरीजों के साथ एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें नयति मेडिसिटी में पहले डायलेसिस कराने वाले मरीज ब्रजमोहन ने केक काटा। ज्ञात हो की नयति में डायलेसिस कराने वाले मरीजों की संख्या 200 से पार कर गयी जिनकी 7200 से अधिक डायलेसिस हो चुकी हैं। इनमें से कई मरीज तो ऐसे हैं जो यहाँ 100 से अधिक बार अपना डायलेसिस करा चुके हैं तथा इन मरीजों में मथुरा के अलावा राया, हाथरस, अलीगढ तथा भरतपुर आदि शहरों के मरीज प्रमुख रूप से हैं।
इस अवसर पर नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि हमने जब नयति मेडिसिटी खोलने का विचार किया था तब यह निश्चय किया था कि लोगों को हर प्रकार का इलाज हमारे यहाँ मिल सके जिससे लोगों को स्वास्थ्य से सम्बंधित अपनी किसी भी परेशानी के लिए शहर से दूर ना जाना पड़े। हमने हमेशा प्रयास किया है कि इलाज जरूरतमंद तक पहुंचना चाहिए ना कि मरीज को इलाज तक। आज नयति के डायलेसिस विभाग के एक वर्ष पूरे होने पर यहाँ से अपनी डायलेसिस कराने वाले मरीजों के साथ मिलकर बड़ा अच्छा लगा और मुझे इनके चेहरे पर जो खुशी दिखाई दे रही है उसे देखकर मैं भी बहुत खुश हूँ।
नयति मेडिसिटी के किडनी विभाग के डायरेक्टर तथा प्रमुख डॉ. कृष्णमोहन साहू ने कहा कि मरीज जब हमारे पास आता है तो उसे हमारे भरोसे और विश्वास की जरुरत होती है। हमारा हमेशा यही प्रयास रहता है कि मरीज का यह विश्वास कभी टूटने ना पाये और वह हमारे यहाँ से तन और मन दोनों से स्वस्थ होकर जा सके।
नयति मेडिसिटी में डायलेसिस के लिए आने वाले पहले मरीज 74 वर्षीय ब्रजमोहन ने कहा कि नयति मेडिसिटी में जब हम पहली बार डायलेसिस कराने आये थे तब मन में कई प्रकार की आशंकायें आ रही थीं किन्तु यहाँ के डॉ. कृष्णमोहन साहू तथा नर्सिंग स्टाफ का इस प्रकार का सहयोग मिला जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी और हम यहाँ पर अपनी डायलिसिस कराकर बेहद संतुष्ट हैं। नयति मेडिसिटी के यहाँ खुलने के बाद हमको बहुत ज्यादा सुविधा हो गयी है अब हम लोगों को दिल्ली आदि नहीं जाना पड़ता जिससे पैसे के साथ समय की भी बचत हो जाती है।

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