नयति हॉस्पिटल में हुई 150 से अधिक लोगों की फाइब्रोस्केन द्वारा जाँच – निशुल्क कैम्प में पथरी, हर्निया तथा टीबी के मरीज भी पाये गये

मथुरा 22 फरवरी। नयति मेडिसिटी में लीवर से सम्बंधित बीमरियां पता करने को 150 से अधिक लोगों की निशुल्क फाइब्रोस्कैन जाँच के अलावा हेपेटाइटस बी तथा सी की जाँच भी की गयी जिनमें कई मरीज पॉजीटिव पाये गये। फाइब्रोस्कैन की जाँच में कई मरीजों के लीवर बहुत ही गम्भीर हालत में पाये गये। अभी तक इस फाइब्रोस्कैन की जाँच के लिए लोगों को दिल्ली एनसीआर आदि जगहों पर जाना पड़ता था जहाँ 8 से 10 हजार रुपये में यह जाँच हो पाती थी। आज हॉस्पिटल में लगे निशुल्क कैम्प में कई मरीजों में हर्निया, पथरी तथा अल्सर की शिकायत भी पायी गयी।

नयति मेडिसिटी प्रशासन द्वारा ब्रज के लोगों की परेशानियों को देखते हुए यह जाँच निशुल्क कराने का फैसला किया गया। ज्ञात हो कि नयति हॉस्पिटल में माह के हर पहले और तीसरे बुधवार को निशुल्क फाइब्रोस्केन द्वारा लीवर की जांच की जाती है।

नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सेस, बेरियाट्रिक, गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल सर्जरी एन्ड गेस्ट्रोएंटोलॉजी के चैयरमेन डॉ. योगेश अग्रवाल ने कहा कि अनियमित खानपान तथा दिनचर्या के कारण मोटापे समस्या हो जाती है जिसका बेरियाट्रिक सर्जरी के माध्यम से इलाज संभव है।

पश्चिमी उ.प्र. में लोगों के चिकनाई युक्त खानपान तथा पानी के कारण यहाँ के अधिकतर लोगों में लीवर की समस्या पायी जा रही है। फैटी लीवर, लीवर का कमजोर होना यहाँ के अधिकांश लोगों में पाया जाता है। शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण ना दिखाई पड़ने से लोग इस ओर ध्यान नहीं दे पाते हैं जिसके कभी कभी काफी गम्भीर परिणाम हो सकते हैं। 40 वर्ष की उम्र के बाद लोगों को अपने लीवर के साथ अन्य शरीर की भी जांच करा लेनी चाहिए जिससे उसका समय पर इलाज हो सके।

नयति हॉस्पिटल के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ.कपिल शर्मा(डी.एम) ने कहा कि मोटापे से ग्रसित, फैटी लीवर, सोराइसिस, हेपेटाइटस बी और सी, मधुमेह तथा अधिक शराब का सेवन करने वाले लोगों को फाइब्रोस्कैन द्वारा अपनी जांच करानी चाहिए। यहाँ हुई फाइब्रोस्कैन की जाँच में कई मरीजों का लीवर ऐसी अवस्था में पाया गया कि जिन्हें इलाज की तत्काल जरुरत थी। कई मरीजों को तो हेपेटाइटस बी तथा हैपेटाइटस सी की शिकायत भी पायी गयी जिसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी।

 

 

 

 

 

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