पश्चिमी उ.प्र. में पहली बार नयति मेडिसिटी के चिकित्सकों ने छोटे चीरे से किया दिल का ऑपरेशन

मथुरा 4 जून 2017। कई साल पहले जब हाथरस निवासी कल्पना को दिल में छेद की बीमारी का उपचार कराने के लिए जब उसके पिता अभयपाल (दोनों नाम काल्पनिक) डॉक्टर के पास लेकर गए तो डॉक्टर ने इसके इलाज के लिए ऑपरेशन बताया। पिता द्वारा ऑपरेशन के बारे में अधिक जानकारी करने पर उन्हें पता चला कि इसके सीने पर सामने की ओर से ऑपरेशन किया जाएगा जिसके बाद बच्ची तो ठीक हो जाएगी किन्तु ऑपरेशन का निशान जीवन भर रहेगा। यह सुनकर कल्पना के पिता चिन्ता में पड़ गए, क्योंकि हमारे समाज मे आज भी लड़कियों की शादी में परिवारीजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। शरीर पर निशान होने के बाद तो शादी के बाद और भी अधिक तकलीफ हो सकती है। अभयपाल ने अपनी इसी चिन्ता के कारण कल्पना को आगरा तथा दिल्ली के कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सब उसका इलाज करने को राजी थे लेकिन समस्या वहीं अटकी थी।
जैसे-तैसे दवाओं के बल पर वे किसी तरह काम चला रहे थे, तभी उन्हें किसी ने नयति मेडिसिटी के बारे में बताया। एक उम्मीद की किरण के साथ वे अपनी बेटी को लेकर नयति मेडिसिटी आये और डॉ. वेणुगोपाल रामाराव से मिले। डॉ वेणुगोपाल ने कल्पना की जांच की और उनकी समस्या को समझते हुए बताया कि कि इसका इलाज तो केवल ऑपरेशन ही है, लेकिन हम इसका ऑपरेशन सामने से न करके साइड से मिनिमली इनवेसिव के माध्यम से करेंगे जिसमें केवल केवल एक छोटा सा ही चीरा लगाना पड़ेगा। जिसके बाद निशान भी दिखाई नहीं देगा और बीमारी से भी मुक्ति मिल जाएगी। यह सुनकर अभयपाल ने तुरन्त अपनी बेटी का ऑपरेशन कराने का फैसला लिया। ऑपरेशन के बाद कल्पना तथा उसके परिवारीजन बहुत खुश थे।
इसी प्रकार बचपन से दिल में छेद की बीमारी से जूझ रहे हरिद्वार(उत्तराखण्ड) निवासी आशीष पाल के बचपन से दिल मे छेद था। परिवारजनों ने इसके उपचार के लिए दिल्ली एनसीआर के कई बड़े अस्पतालों में संपर्क किया परंतु कहीं भी संतोषजनक उपचार की राह न दिखने पर निराशा ही हाथ लगी। किसी रिश्तेदार द्वारा नयति मेडिसिटी के विश्वस्तरीय उपचार एवं प्रसिद्ध चिकित्सों की बारे में सुनकर वह तत्काल आशीष पाल को लेकर नयति मेडिसिटी मथुरा के हृदयरोग विभाग में लेकर आए। जहां हृदय रोग के विभागध्यक्ष डा वेणुगोपाल रमाराव व उनकी टीम ने आशीष पाल के परिवारजनों को इस बीमारी से निजात का भरोसा दिलाया। डॉक्टरों ने आशीषपाल के परिवारजनों को इस रोग का इलाज न होने पर भविष्य में होने वाली परेशानियों के बारे में विस्तार से समझाया। डा वेणुगोपाल व उनकी टीम ने 24 साल से दिल में छेद की बीमारी से जूझ रहे रोहन का भी सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया। आशीष पाल की सर्जरी भी मिनिमली इन्वेसिव सर्जरी के माध्यम से छोटे से चीरे द्वारा ही की गई।
नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आर के मनी ने कहा कि नयति मेडिसिटी शुरू करने के पीछे हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य यही था कि टियर 2 और टियर 3 के मरीजों के पास तक विश्वस्तरीय उपचार पहुंचाया जाए। यह सर्जरी उसी प्रयास का एक उदाहरण है। हमें खुशी है कि हम मरीजों की उम्मीदों पर सफलतापूर्वक खरे उतर रहे हैं। हमारी आधुनिक और विश्वस्तरीय चिकित्सकीय सेवाएं ब्रज ही नही बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा दिल्ली एनसीआर के मरीजों के लिए भी वरदान साबित हो रही हैं। हमारे यहां दिल्ली एनसीआर के मरीज वहां की अपेक्षा नयति मेडिसिटी में होने वाला विश्वस्तरीय इलाज (जो वहां से काफी कम खर्चे में होता है) की वजह से लगातार नयति मेडिसिटी आ रहे हैं।
नयति मेडिसिटी के हृदयरोग के विभागाध्यक्ष डॉ. वेणुगोपाल रामाराव के कहा कि कल्पना और आशीष पाल जब हमारे पास आए तो इनकी केस हिस्ट्री और हमारे यहां की गई जांचों से पता चला कि इनके दिल में छेद है। हमने इनका इलाज मिनिमल इंनवेसिव सर्जरी के माध्यम से करने का फैसला किया। आमतौर पर इस बीमारी में की जाने वाली सर्जरी सीने को पूरा चीर कर की जाती है जिससे मरीज को तकलीफ भी ज्यादा होती है और मरीज को सही होने में भी अधिक समय लगता है, जबकि मिनिमल इंनवेसिव सर्जरी में बस एक छोटा सा चीरा ही लगाया गया जिससे संक्रमण होने के साथ शरीर की सुंदरता कम होने का खतरा भी कम रहता है। वहीं नयति मेडिसिटी में इस प्रकार की सर्जरी का खर्चा भी दिल्ली एनसीआर के मुकाबले काफी कम आता है।
डॉ. वेणुगोपाल रामाराव तथा उनकी टीम इससे पहले भी 4 माह का बच्चा जिसका ऑपरेशन करने से दिल्ली के कई नामी अस्पतालों तक ने मना कर दिया था, उसका ऑपरेशन भी डॉ वेणुगोपाल जी द्वारा सफलता पूर्वक किया गया। आगरा निवासी तन्वी जिसका लीवर तथा दिल दायीं ओर था और उसका ऑपरेशन करना भी एक चैलेंज था उसका ऑपरेशन भी डॉ. वेणुगोपाल रामाराव द्वारा किया जा चुका है। इसके अलावा 5 हजार से अधिक छोटे बड़े ऑपरेशन डॉ वेणुगोपाल द्वारा किये जा चुके हैं।

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