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April 25, 2018

नयति में वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन सप्ताह पर हुआ सेमिनार

  • 25 April, 2018

24 से 30 अप्रैल तक लोगों में जागरूकता फैलाने को टीकाकरण से संबंधित होंगे विभिन्न कार्यक्रम

मथुरा 25 अप्रैल। वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन (टीकाकरण) सप्ताह के अवसर पर नयति मेडिसिटी में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें मथुरा तथा आसपास के कई गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेवी श्रीमती शैलजा सिंगला थीं।

सेमिनार को संबोधित करते हुए नयति मेडिसिटी के मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति गोयल ने वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन सप्ताह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैक्सीन की वजह से कई बीमारियों की रोकथाम होती है, हर वर्ष 25 लाख से अधिक लोगों की जान वैक्सीन की वजह से ही बच पाती है। वैक्सीन होने के बावजूद लोगों में जागरूकता की कमी के चलते आज भी टीकाकरण न हो पाने के कारण कई बीमारियों के लिए घातक होता है। इसलिए हमें समाज के हर वर्ग तक वैक्सीन की जानकारी पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए। आज भी लोगों में आमधारणा है कि टीकाकरण केवल बच्चों के लिए ही होता है जो कि गलत है, वयस्कों में भी अब टीकाकरण संभव है जिसकी वजह से अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

नयति मेडिसिटी के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. नूरउल ने कहा कि आजकल के बीमारियों के वैक्सीन उपलब्ध हैं जो हमें अपने बच्चों में लगवाने ही चाहिए जिनसे कई बीमारियों की रोकथाम हो सकती है, और कई संक्रमित बीमारियां भी होती हैं जो अगर किसी बच्चे को हो जाये तो उसकी चपेट में पूरा परिवार भी आ सकता है। लोगों को आमतौर पर खसरा, डीपीटी, हैपेटाइटिस बी और हैपेटाइटिस ए आदि बीमारियों के टीके अवश्य लगवाने चाहिए।

नयति मेडिसिटी की लैब प्रमुख डॉ देवकांत प्रधान ने कहा कि दुनिया में आज 26 गम्भीर बीमारियों से बचाव के वैक्सीन मौजूद हैं। भारत में वैक्सीन की वजह से ही किसी समय पाये जाने वाले चेचक रोग से पूरी तरह मुक्ति मिल चुकी है और पोलियो पर भी लगभग काबू पा लिया गया है। यदि 80 से 85 प्रतिशत लोगों तक वैक्सीन पहुंच जाए तो हम समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।
सेमिनार की मुख्य अतिथि समाजसेवी शैलजा सिंगला ने कहा कि नयति द्वारा आयोजित इस सेमिनार से हम सभी को बहुत सारी जानकारी मिली है जिसे हम अपने स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे, और मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि नयति भविष्य में भी समाज में जागरूकता फैलाने के लिए इस प्रकार के आयोजन करता रहेगा।

सेमिनार में प्रमुख रूप से आर्मी, संदीपन स्कूल की अध्यापिकाएं, रोटरी क्लब, विभिन्न गांवों के प्रधान, वीएस सक्सेना, मीरा मित्तल, पंकज, डॉ. ममता शर्मा एवं नयति मेडिसिटी के मेडीकल सुपरिटेंडेंट डॉ. उबैद रंगरेज उपस्थित थे।

April 20, 2018

नयति में प्लाज्मा फेरेसिस तकनीक से दिमाग की नसों की खराब कवरिंग (मल्टीपल स्किलरोसिस) का हुआ सफल इलाज

  • 20 April, 2018

मथुरा 20 अप्रैल। मस्कट (ओमान) निवासी 33 वर्षीय रेणुबाला की अचानक नजर कामजोर होने लगी,यहां तक कि उनको लगभग दिखाई देना भी बंद हो गया था। हाथ पैरों में कमजोरी के कारण उनका चलना फिरना मुश्किल होता जा रहा था और उनके शरीर मे सेंसेशन की भी कमी होती जा रही थी। मस्कट में उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उनकी परेशानी में कोई सुधार नहीं आ रहा था और उनकी समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही थी।

तब उन्होंने मथुरा में रह रहे अपने रिश्तेदार से अपनी बीमारी के बारे में बात की, जिनके द्वारा नयति मेडिसिटी के बारे में बताये जाने के बाद वे नयति पहुंचे और यहां आकर न्यूरो फिजिशियन विभाग के प्रमुख डॉ नीलेश गुप्ता से मिले। डॉ नीलेश द्वारा उनकी एमआरआई, रीढ़ की हड्डी की जांच और आंखों की नसों की जांच कराई तो पता चला कि उनके दिमाग के न्यूरॉन्स की कवरिंग लगातार खत्म होती जा रही थी जिसकी वजह से उन्हें इन सब तकलीफों से गुजरना पड़ रहा था। मेडीकल भाषा मे इस बीमारी को मल्टीपल स्किलरोसिस कहते हैं।

जरूरी जांच करने के बाद डॉ नीलेश ने कुछ दिन उन्हें अस्पताल में रखा और प्लाज्मा फेरेसिस द्वारा उनका इलाज किया। अब रेणुबाला बिल्कुल स्वस्थ हैं।

नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आर के मनी ने कहा कि इस क्षेत्र में आज नयति में  हर बीमारी की वह विश्वस्तरीय एवं बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है जो अब से पहले केवल महानगरों के कुछ ही अस्पतालों में मौजूद थी। हमारा हमेशा से प्रयास रहा है कि यहां पर हम मरीजों को हर वह सुविधा उपलब्ध करा सकें जिसके लिए उन्हें महानगरों तक कि यात्रा करनी पड़ती थी। हमारे यहां देश के विभिन्न प्रदेशों के अलावा देश की सीमाओं से बाहर के मरीज भी निरंतरता में आकर अपना इलाज करा रहे हैं, जिसकी हमें खुशी है।

रेणुबाला का इलाज करने वाले नयति मेडिसिटी के न्यूरो फिजिशियन डॉ. नीलेश गुप्ता ने बताया कि जो बीमारी रेणुबाला को थी वो एक लाख व्यक्तियो में किसी एक को हो सकती है। इस बीमारी के कोई प्रारम्भिक लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इस बीमारी का अचानक असर दिखाई देता है।

रेणुबाला की जांच करने के बाद हमने प्लाज्मा फेरेसिस (विशेष प्रकार एवं तकनीक से खून की सफाई) की। पहली प्लाज्मा फेरेसिस के बाद ही उनमें सुधार आना शुरू हो गया। उसके बाद सीमित अंतराल के बाद रेणुबाला की दो प्लाज्मा फेरेसिस और कि गयीं। अब रेणुबाला बिल्कुल स्वस्थ हैं लेकिन उन्हें कुछ दिन और दवाओं का सेवन करना पड़ेगा।

April 12, 2018

नयति के डॉक्टरों ने गले में हुई गांठ का किया सफल ऑपरेशन

  • 12 April, 2018

मथुरा 12 अप्रैल। नयति मेडिसिटी के चिकित्सकों ने गले में हुई गांठ (लैरिंगोसील) का सफल ऑपरेशन किया। इस प्रकार की गले में गांठ बहुत कम (दुनिया में अब तक 200 से 250) लोगों में ही पाई गयी है जिसे एक प्रकार की दुर्लभ बीमारी भी कहा जा सकता है। इस बीमारी में सांस की नली में छेद हो जाता है जिसकी वजह से उस नली में गांठ बन जाती है जो समय के साथ बढ़ती रहती है। इस बीमारी की वजह से इंसान का खानापीना एवं सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ योगेश अग्रवाला ने कहा कि 70 वर्षीय भगवान सिंह जब नयति में आये थे तब वे अपने गले में हुई गांठ से काफी परेशान थे, जिसकी वजह से उनका खानापीना भी लगभग बंद हो गया था और उन्हें सांस लेने में भी काफी तकलीफ हो रही थी। पिछले दो साल से वे कई अस्पतालों के चक्कर लगा आये लेकिन उन्हें कहीं भी किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिला। नयति आकर हमसे मिले, हमारे द्वारा करायी गई जांचों में पता चला कि इनके गले में 5 सेमी की गांठ है (जिसे मेडिकल भाषा में लैरिंगोसील कहा जाता है) जिसका तत्काल ऑपरेशन करने की आवश्यकता थी।

परिवार की सहमति के बाद डॉ. योगेश अग्रवाल एवं डॉ. अजय अग्रवाल के नेतृत्व में उनका सफल ऑपरेशन करके गले में से गांठ निकाल दी जिसके बाद भगवान सिंह बिल्कुल स्वस्थ हैं और उनकी खोई हुई आवाज भी वापस लौट आयी है।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अजय अग्रवाल ने कहा कि यह एक दुर्लभ किस्म की बीमारी है और अब तक दुनिया मे 200 से 250 लोगों में ही यह बीमारी पायी गयी है। यदि समय पर इसका इलाज ना हो तो यह बीमारी बढ़ती जाती है जिससे मरीज को काफी तकलीफ से भी गुजरना पड़ सकता है।