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July 28, 2018

नयति ने मनाया विश्व हेपेटाइटिस दिवस

  • 28 July, 2018

203 लोगों की हुई निशुल्क जांच

जागरूकता ही बचाव है: डॉ. कपिल शर्मा

मथुरा 28 जुलाई। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर क्षेत्रीय नागरिकों को हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक करने के लिए नयति मेडिसिटी और नयति हॉस्पिटल के परिसर में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें 250 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर आए हुए लोगों में 203 लोगों की निशुल्क हेपेटाइटिस बी तथा सी की जांच भी की गई।

इस अवसर पर नयति के गैस्ट्रोएंटोलॉजिस्ट डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि विश्व मे 40 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस बी अथवा सी से पीड़ित हैं। हर वर्ष लगभग 13 लाख लोग इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं होता, केवल जांच कराने से ही इस बीमारी के बारे में जाना जा सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक रहते हुए अपनी हेपेटाइटिस की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए, जिससे समय रहते बचाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि कोई पीलिया, बुखार, लगातार थकावट या खुजली से पीड़ित है या किसी के परिवार में किसी अन्य सदस्य को हेपेटाइटिस बी अथवा सी की शिकायत है तो उसे तुरन्त अपनी जांच भी कर लेनी चाहिए। 10 में से 8 लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि वे हेपेटाइटिस बी या सी से ग्रस्त हैं। लीवर सिरोसिस होने का मुख्य कारण हेपेटाइटिस बी और सी हैं, जिसके होने के बाद लीवर फेल तक जाता है और लीवर को प्रत्यारोपित तक करना पड़ सकता है।

नयति मेडिसिटी के ब्लड बैंक के प्रमुख डॉ. नवीन अग्निहोत्री ने कहा कि नयति ब्लड बैंक उत्तरप्रदेश का एकमात्र पहला एनएबीएच द्वारा मान्यता प्राप्त ब्लड बैंक हैं, जहां उच्च गुणवत्ता वाली जांच के बाद ही ब्लड लिया और दिया जाता है। नयति ब्लड बैंक में किसी भी रक्तदाता का ब्लड लेने से पहले भी हैपेटाइटिस बी की जांच की जाती है, जिससे रक्तदाता को हैपेटाइटिस बी होने की दशा में ब्लड नहीं लेते और रक्तदाता का ब्लड बेकार नहीं जाता, साथ ही रक्तदाता को तुरंत परामर्श व परिवार के अन्य सदस्यों की जांच के लिए प्रेरित भी किया जाता है। इस प्रकार नयति ब्लड बैंक समाज में  हेपेटाइटिस बी के संक्रमण की रोकथाम के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।

हेपेटाइटिस ए, ई दूषित पानी तथा भोजन से, तथा हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमित खून तथा सुइयां अथवा असुरक्षित यौन संबंधों से हो सकता है।

July 18, 2018

नयति में महिला के हृदय के एक साथ तीन ओपन हार्ट सर्जरी कर तीन वॉल्व बदले|

  • 18 July, 2018

मथुरा । नयति मेडिसिटी में 30 वर्षीय महिला के हृदय के एक साथ तीन वॉल्व तीन ओपन हार्ट सर्जरी करके बदल दिए गए। इस प्रकार का जटिल ऑपरेशन करने वाला नयति मेडिसिटी इस क्षेत्र का पहला हॉस्पिटल बन गया है, अभी तक इतने बड़े ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली अथवा एनसीआर तक जाना पड़ता था। आगरा निवासी प्रीती के नौ साल पहले सांस फूलने की परेशानी हुई। डॉक्टरों को दिखाने पर पता चला कि उनका एक वॉल्व खराब है जिसे बदलने की आवश्यकता है, लेकिन उन्होंने अपना वॉल्व नहीं बदलवाया और दवाएं खाकर अपना काम चलाती रहीं। कुछ समय पहले उनकी तकलीफ काफी बढ़ गयी, जिसके बाद वह नयति आयीं, जहां कार्डियक सर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉ आदर्श कोप्पुला से मिलीं।

डॉ. कोप्पुला ने बताया कि मनुष्य के हृदय में चार वॉल्व होते हैं प्रीती की जब जांच की गयी तो पता चला कि इनके तीन वॉल्व ख़राब हैं जिनके बदलने की तुरंत आवश्यकता है। परिवार की सहमति के बाद हमने एक बार में तीन ओपन हार्ट सर्जरी करके तीनों वॉल्व बदल दिए। अब से नौ वर्ष पूर्व इनका एक वॉल्व खराब हुआ था जिसे बदलवा लेना चाहिए था, यदि उसी समय वॉल्व बदल गया होता तो इनके और वॉल्व ख़राब नहीं होते। इतने बड़े तथा जटिल ऑपरेशन को करने के लिए कई सुविधाओं एवं मशीनों की जरुरत पड़ती है जो नयति में मौजूद है। हमारे यहां ब्लड बैंक के साथ अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी मौजूद है, जिसकी वजह से हमको ऑपरेशन करने में काफी आसानी हुई। उन्होंने बताया कि अधिकतर महिलाओं में वॉल्व की शिकायत पायी जाती है जो अक्सर डिलीवरी के समय ही पता चलती है, इसलिए जैसे ही वॉल्व के ख़राब होने का पता चले तो तुरंत उसका उचित इलाज करा लेना चाहिए।

नयति हैल्थकेयर के सीईओ डॉ. आरके मनी ने कहा कि नयति में देश के विख्यात हार्ट स्पेशलिस्ट की टीम मौजूद है, जिसकी वजह से नयति हार्ट सेंटर में हृदय रोगों संबंधी हर वह उपचार मौजूद है जिसके लिए अब तक दिल्ली मुम्बई तक की यात्राएं करनी पड़ती थीं। किसी परिवार में जब कोई बीमार होता है तो इसका असर केवल बीमार पर नहीं पड़ता बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। बाहर जाकर इलाज कराने में तो तकलीफ और ज्यादा बढ़ जाती है। एक तो महानगरों में इलाज का खर्च अधिक है दूसरे वहां रहने का भी खर्चा बढ़ता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हमने तय किया था कि इलाज मरीज के पास पहुंचना चाहिए, जिसमें हम कामयाब हैं।

नयति मेडिसिटी के कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एच. एस सोमनाथ ने कहा नयति में हृदय रोग से संबंधित किसी भी आपातकाल के समय सीनियर कार्डियोलोजिस्ट एवं सीनियर कार्डियक सर्जन 24 घंटे मौजूद रहते हैं। आधुनिक उपकरणों और मेडिकल सुविधाओं से युक्त हमारे हार्ट सेंटर में देश के जाने माने चिकित्सक बाईपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर इम्प्लांट जैसी जटिल समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं।

मरीज प्रीती शर्मा ने कहा कि अब से नौ वर्ष पूर्व डॉक्टरों ने मेरा एक वाल्व खराब बता दिया था लेकिन मन में एक भय था कि यदि ऑपरेशन असफल हो गया तो मेरी छोटी सी बच्ची का क्या होगा। दवाओं के सहारे में अपना काम चला रही थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैं ना तो कोई काम कर पा रही थी और ना ही अपनी बच्ची का ध्यान रख पा रही थी। तब हम नयति आये, यहां पर डॉ आदर्श से हमारी बात हुई और हमने यहां अपना ऑपरेशन कराया। अब मुझे कोई परेशानी नहीं है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. विपिन गोयल एवं डॉ. प्रवीर सिन्हा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

July 12, 2018

नयति में मुंह के कैंसर का सर्जरी द्वारा हुआ सफल इलाज

  • 12 July, 2018

मथुरा 12 जुलाई। नयति मेडिसिटी में मुंह के कैंसर का एन ब्लॉक रिमूबल विधि द्वारा सर्जरी करके सफल इलाज किया गया। आमतौर पर इस प्रकार की सर्जरी में पूरा जबड़ा निकाल देते हैं, लेकिन नयति में विशेष तकनीक द्वारा केवल कैंसरग्रस्त जबड़े को ही निकाला गया है।

आगरा निवासी 52 वर्षीय पार्वती के मुंह में छाला हो गया था जो काफी इलाज कराने के बाद भी सही नहीं हुआ, उनका खाना पीना बंद हो गया था, मुंह भी पूरी तरह से नहीं खुल पा रहा था। तब वे नयति आकर नयति मेडिसिटी के कैंसर सर्जरी विभाग के डाइरेक्टर डॉ रविकांत अरोरा से मिलीं, जहां जब पार्वती के छाले की बायोप्सी करायी गयी तो पता चला कि उनके जबड़े के कुछ भाग में कैंसर है जिसकी सर्जरी करने की तुरंत आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद उनकी सर्जरी कर दी गयी।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के कैंसर विभाग के अध्यक्ष डॉ (प्रो.) शान्तनु चौधरी ने कहा कि सही समय पर कराये गये उचित इलाज द्वारा कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है। शरीर में किसी हिस्से में रक्तस्राव अथवा कोई गांठ, ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो, शौच का कड़ा होना आदि लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कैंसर रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

नयति में हर उम्र के व्यक्ति एवं किसी भी प्रकार के कैंसर से सम्बंधित हर वह इलाज मौजूद है जिसके लिए अब तक दिल्ली और मुम्बई तक जाना पड़ता था। नयति में आने वाले किसी भी मरीज के बेहतरीन इलाज के लिए हमारे यहां के अलग अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मिलकर निर्णय लेती है, जिससे मरीज को सटीक इलाज मिल सके।

नयति मेडिसिटी के कैंसर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. रविकांत अरोरा ने बताया कि पार्वती के ऑपरेशन का जब हमने प्लान किया तब यह निश्चय किया कि हम इनका पूरा जबड़ा नहीं निकालेंगे बल्कि जितने भाग में कैंसर फैला है वही भाग निकालेंगे, यह करना काफी जटिल था किंतु हमने यही किया। हमने उनके कैंसरग्रस्त जबड़े का ऑपरेशन एन ब्लॉक रिमूबल विधि से किया और जीभ की त्वचा से खाली हुई जगह को भर दिया, ऑपरेशन के बाद इनको रेडियेशन एवं कीमोथैरेपी भी दी गयी, अब पार्वती बिल्कुल स्वस्थ है।

July 5, 2018

नयति में महिला के सिर से माइक्रोस्कोपिक विधि से 5X5 सेमी बड़ा ट्यूमर निकाला

  • 05 July, 2018

मथुरा । नयति मेडिसिटी के डॉक्टरों ने 50 वर्षीय  महिला के सिर से 5X5 सेमी का ट्यूमर माइक्रोस्कोपिक विधि द्वारा ऑपरेशन करके सफलतापूर्वक निकाल दिया।

अलीगढ निवासी 50 वर्षीय निर्मला पिछले 4 वर्षों से सिर दर्द से पीड़ित थीं। उन्होंने डॉक्टरों को दिखाया तो उनके सिर में एक ट्यूमर बताया, साथ ही यह भी कहा कि यदि इसका ऑपरेशन किया गया या इस ट्यूमर को छेड़ा गया तो शरीर के एक भाग को लकवा मार सकता है या कोई और साइड इफैक्ट भी हो सकता है। यह सुनकर वह घबरा गयीं और उन्होंने अपने ट्यूमर का ऑपरेशन कराने का विचार त्याग दिया। सिर दर्द होने पर वे दर्द निवारक दवा ले लेती थीं और इसी प्रकार अपना जीवन बिता रही थीं। कुछ समय पहले उर्मिला के हाथपैर सुन्न होने शुरू हो गए, अक्सर उल्टियां होने लगीं, चेहरे पर टेढ़ापन आ गया था और निगाह भी काफी कमजोर हो गयी थी। तब वे नयति मेडिसिटी आयीं और न्यूरो विभाग के डॉ रविंद्र श्रीवास्तव से मिले, जो कई वर्ष अपनी सेवाएं एम्स दिल्ली में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जहां उनकी जरुरी जांचें करायी गयी तो पता चला कि उनके सिर में जो ट्यूमर था अब काफी बड़ा (5X5 सेमी का) हो गया है और सिर में पानी भी भर गया है। जिसकी वजह से निर्मला के सिर की कई नसों पर दवाब पड़ रहा है, यदि जल्द इस ट्यूमर को ना निकाला गया तो आने वाले समय में निर्मला की आँखों की रौशनी जा सकती है और शरीर का एक भाग लकवाग्रस्त भी हो सकता है। परिवार की सहमति के बाद डॉ विमल कुमार अग्रवाल के साथ मिलकर निर्मला का माइक्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन करके ट्यूमर निकाल दिया गया।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आरके मनी ने कहा कि नयति में हर वह इलाज मौजूद है जो नयति से पहले केवल महानगरों में ही मिल पाता था। हमारे यहां हर विभाग में देश के जाने माने एवं अनुभवी चिकित्सक हैं, जो मरीज की बीमारी की तह तक पहुंच कर उसके निदान का प्रयास करते हैं।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ रविंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि समय पर इलाज न कराये जाने के कारण ट्यूमर लगातार बढ़ता जा रहा था जिससे दिमाग की नसों पर काफी प्रेशर पड़ रहा था। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में सेरिब्लोपौंटाइन एंगल ट्यूमर कहा जाता है जो दिमाग की आठवीं नर्व से निकलता है, जिसके कारण मरीज को सुनाई देना तक बंद हो सकता है। इस प्रकार के ऑपरेशन देश के कुछ गिने चुने न्यूरो सर्जरी सेंटरो पर तथा अनुभवी चिकित्सकों द्वारा ही किये जा सकते हैं।