PRESS RELEASES

November 24, 2018

नयति में चेहरे के लकवे का हुआ सफल इलाज

  • 24 November, 2018

मथुरा । छाता निवासी सतीश चौधरी का बाइक द्वारा कोसी जाते समय एक्सीडेंट हो गया, समय बीतने के साथ उनकी शारिरिक चोट तो ठीक हो गयी लेकिन दुर्घटना में हड्डी टूटने से चेहरे की नस दब गई थी, जिसकी वजह से चेहरा टेड़ा हो गया और उनके चेहरे पर फालिश (लकवा) मार गया। वे नयति आकर ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ मनीष जैन से मिले, जिनके द्वारा किये गए ऑपरेशन के बाद सतीश चौधरी बिल्कुल स्वस्थ हैं।

नयति मेडिसिटी के ईएनटी विभाग प्रमुख डॉ. मनीष जैन ने बताया कि जब सतीश हमारे पास आये थे तब उनकी स्थिति बहुत नाजुक थी, दुर्घटना में उनके कान का पर्दा फट गया था और मुंह पर काफी चोट थी, उनके चेहरे की मांसपेशियों तक जाने वाली नस (फेशियल नर्व) पर काफी दवाब पड़ रहा था, जिसके चलते उनका चेहरा टेड़ा हो गया था, बांयी आंख बंद नहीं हो पा रही थी और चेहरे पर लकवे की शिकायत भी थी, उनकी नस पर पड़ रहे दवाब को हटाना बहुत जरूरी था। उनके परिवार की सहमति के बाद अपनी टीम के साथ मिलकर हमने मस्टॉयडेकटमी व फेशियल नर्व डिकम्प्रेशन जैसे अत्याधुनिक ऑपरेशन करके उनकी नस पर पड़ रहे दवाब को हटा दिया। ऑपरेशन के बाद सतीश चौधरी के चेहरे का टेढ़ापन बिल्कुल ठीक हो गया और बांयी आंख बंद होने के अलावा लकवे की शिकायत भी दूर हो गयी।

अपना इलाज कराने वाले सतीश चौधरी ने कहा कि नयति आने से पहले हमने खुद को कई जगह दिखाया लेकिन कहीं कोई लाभ न मिल सका, जिसके बाद हम नयति आये और यहां के डॉक्टरों से मिले, उनके द्वारा दिये गए आश्वासन के बाद हमने अपना इलाज नयति में कराया, अब मैं बिल्कुल ठीक हूं।

ऑपरेशन करने वालों में डॉ. मनीष जैन के अलावा उनकी टीम के डॉ. श्वेता महाजन एवं डॉ अमित सिंघल की प्रमुख भूमिका रही।

November 20, 2018

नयति में ओपन हार्ट सर्जरी कर सिकुड़ा वॉल्व बदला

  • 20 November, 2018

मथुरा। नयति मेडिसिटी में 58 वर्षीय महिला के हृदय के सिकुड़े हुए वॉल्व ओपन हार्ट सर्जरी करके बदला गया। इस प्रकार का ऑपरेशन करने वाला नयति मेडिसिटी इस क्षेत्र का पहला हॉस्पिटल बन गया है।

फतेहपुर सीकरी, आगरा निवासी मिथलेश के कई साल पहले सांस फूलने की परेशानी हुई। डॉक्टरों को दिखाने पर पता चला कि उनका माइट्रल व ट्राइकस्पिड वॉल्व खराब है जिसे बदलने की आवश्यकता है, लेकिन उन्होंने अपना वॉल्व नहीं बदलवाया और दवाएं खाकर अपना काम चलाती रहीं। कुछ समय पहले उनकी तकलीफ काफी बढ़ गयी। उनका खाना पीना बन्द हो गया, सांस लेने में परेशानी होने लगी, नींद नहीं आती थी और हर समय बेचौनी रहने लगीं जिसके बाद वह नयति आयीं, जहां कार्डियक सर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉ आदर्श कोप्पुला से मिलीं।

डॉ. कोप्पुला ने बताया कि मनुष्य के हृदय में चार वॉल्व होते हैं मिथलेश की जब जांच की गयी तो पता चला कि इनका वॉल्व खराब हैं और पूरी तरह सिकुड़ गया था और पूरी तरह बंद नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण उनका हृदय काफी फैल गया था, और अशुद्ध खून वापस हृदय में ही आ रहा था, जो लेफ्ट एट्रियम में ही इकट्ठा हो रहा था और उनके हृदय में खून के थक्के भी जम गए थे, जिस वजह से उनके फेफड़ों में भी पानी भर रहा था। मेडिकल भाषा के अनुसार उन्हें मिट्रलस्टिनोसिस हो गया था। उनके खराब वाल्ब को बदलने की तुरंत आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद हमने अपनी टीम के साथ मिलकर ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा मिट्रल वाल्ब रिप्लेसमेंट करके उनके खराब वाल्ब की जगह मैटल वाल्ब लगा दिया और ट्राईकस्पेड वाल्ब की मरम्मत भी कर दी, जिसके बाद अब उनके हृदय में खून के थक्के नहीं पड़ेंगे। वाल्ब बदलने से पहले हमने उनके हृदय ने जमे खून के थक्के भी पूरी तरह हटा दिए।

यह एक बड़ा ऑपरेशन था जिसे करने के लिए कई सुविधाओं एवं मशीनों की जरुरत पड़ती है जो नयति में मौजूद है। हमारे यहां ब्लड बैंक भी है और अन्य डॉक्टरों की टीम भी मौजूद है, जिसकी वजह से हमको ऑपरेशन करने में काफी आसानी हुई।

उन्होंने बताया कि अधिकतर महिलाओं में वॉल्व की शिकायत पायी जाती है जो अक्सर डिलीवरी के समय ही पता चलती है, इसलिए जैसे ही वॉल्व के खराब होने का पता चले तो तुरंत उसका उचित इलाज करा लेना चाहिए।

नयति में अपना ऑपरेशन कराने वाली मिथलेश ने कहा कि अब से कई वर्ष पूर्व डॉक्टरों ने मेरा एक वाल्व खराब बता दिया था। दवाओं के सहारे मैं अपना काम चला रही थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैं काफी परेशान थी तब हम नयति आये, यहां पर डॉ. आदर्श से हमारी बात हुई और हमने यहां अपना ऑपरेशन कराया जो सफल रहा। अब मुझे कोई परेशानी नहीं है।

ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. प्रवीर सिन्हा, डॉ विपिन गोयल एवं वीना वोसवाल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

November 10, 2018

नयति में हुआ गुर्दे के कैंसर का सफल इलाज़

  • 10 November, 2018

मथुरा 10 नवंबर। दो माह पहले मथुरा की ही मांट निवासी कमलेश पेट में दर्द और बेचैनी की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान थीं। उन्होंने मथुरा, आगरा के कई डॉक्टरों को दिखाया पर उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ। वे नयति पहुंची, जहां वे कैंसर विभाग के सर्जिकल विभाग के प्रमुख डॉ. रविकांत अरोरा से मिलीं, जिनके द्वारा जरूरी जांच करने पर पता चला कि उनके गुर्दे के ऊपर की तरफ काफी बड़ी कैंसर की गांठ (ट्यूमर) है जो जिगर तक पहुंच रही है और उस ट्यूमर का एक भाग खून की सबसे बड़ी नस में भी ऊपर की ओर जा रहा है।

उनकी सर्जरी करने की तुरंत आवश्यकता थी। डॉ. रविकांत अरोरा, डॉ. हेमेंद्र एवं उनकी पूरी टीम ने इस ट्यूमर को एक जटिल सर्जेरी के द्वारा निकाल दिया।

नयति मेडिसिटी के कैंसर विभाग के अध्यक्ष डॉ प्रो. शांतनु चौधरी ने कहा कि नयति मेडिसिटी में कैंसर से संबंधित हर उपचार मौजूद है, एक ही छत के नीचे कैंसर का क्लीनिकल, सर्जरी एवं कीमोथेरेपी और कैंसर की जांच संबंधी सभी सुविधाएं होने से मरीज को इलाज कराने में काफी मदद मिलती है, और उसका समय तथा आने जाने में लगने वाला पैसा भी बचता है।

नयति मेडिसिटी के कैंसर सर्जिकल विभाग के प्रमुख डॉ. रविकांत अरोरा ने बताया कि “कमलेश हमारे पास 2 महीने पहले पेट में दर्द की शिकायत के साथ आयी थी, उनके गुर्दे में कैंसर था हमने जरूरी जांच के बाद उनकी सर्जरी (राइट रेडिकल नेफ्रेक्टोमी विथ आईवीसी ट्यूमर थ्रोम्बेक्टोमी) कर दी, यदि इस ट्यूमर का समय पर इलाज न कराया जाता तो वह फेफड़ों एवं शरीर के अन्य भागों में भी फ़ैल सकता था, जिससे मरीज की जान को खतरा भी हो सकता था। हमने खून की नाड़ी जहां खून का थक्का था उसे सब तरफ से बंद किया और गुर्दे के ट्यूमर सहित खून के थक्के को एक ही बार में निकाला, इससे मरीज का सफल इलाज़ तो हुआ ही साथ ही जान जाने का खतरा भी टाला जा सका। कमलेश अब बिल्कुल स्वस्थ हैं।

नयति में अपना इलाज कराने वाली कमलेश ने बताया कि यहां आने से पहले मैंने कई जगह खुद को दिखाया लेकिन मेरी बीमारी का कहीं इलाज नहीं हो सका, यहां तक कि धीरे धीरे मेरी तकलीफ बढ़ती ही जा रही थी। यहां इलाज कराने के बाद मैं बहुत खुश हूं।

November 3, 2018

नयति हेल्थकेयर ने की अंगदान जागरुकता कार्यक्रम की शुरुआत

  • 03 November, 2018

मथुरा – यह आनंद शर्मा हैं, गार्गी के पिता… 15 साल की वह मासूम गार्गी जिसकी आंखों में बहुत से सुनहरे सपने सजे हुए थे, जो ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ती थी और अपने मम्मी पापा व भाई की लाड़ली थी। वह गार्गी जो सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई, डॉक्टरों की कड़ी मेहनत के बाद भी जिसे बचाया नहीं जा सका लेकिन वह गार्गी मर कर भी जिंदा है क्योंकि उसके पापा आनंद शर्मा ने अपनी बेटी की मृत्यु के बाद उसकी सुनहरे सपनो से सजी आंखें दान करने की पेशकश की। आज उसी गार्गी की दान की हुई आंखों से दो लोगों की जिंदगी का सूनापन दूर हुआ है, यह कहते हुए नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया जब आगरा निवासी आनंद शर्मा को लेकर स्टेज पर आईं तो ऑडिटोरियम में बैठे हुए सभी लोग खड़े होकर गार्गी और उसके पिता के सम्मान में तालियां बजाने लगे। यह मौका था मृत्यु उपरांत शरीर के अंगदान करने की उस मुहिम से सबको जोड़ने का जिसे नयति मेडिसिटी ने ऑर्गन डोनेशन इंडिया फाउंडेशन और रोटरी क्लब मुदबिदरी और रोटरी क्लब मथुरा सेंट्रल के साथ मिलकर आगे बढ़ाया है।

नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि मानव जीवन अमूल्य है और यदि मृत्यु के बाद किए गए अंगदान से किसी मानव की जिंदगी की रक्षा हो सके तो इससे बड़ा पुण्य इस धरती पर कुछ नहीं है। ये सोचकर अफ़सोस भी होता है कि लोगो को जानकारी ही नहीं है कि वे मृत्यु के पश्चात भी करीब 8 लोगों की जान बचा सकते हैं और अपनी मृत्यु के बाद भी जीवित रह सकते हैं।

बॉडी ऑर्गन डोनेशन अवेयरनेस प्रोग्राम के जरिए नयति मेडिसिटी द्वारा दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए मृत्यु उपरांत अंगदान के लिए लोगों को शिक्षित और जागरूक करने  का प्रयास किया जाएगा।

इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो ऑर्गन फेल्यर की लास्ट स्टेज का सामना कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि अंगदान को लेकर अभी भी लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियां व्याप्त हैं जिनके कारण एक बहुत बड़ा वर्ग अंगदान करने के लिए आगे नहीं आता। पिछले साल नयति में लॉन्च किए गए किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम के बाद यह पता चल सका कि अपने परिजन की जीवन रक्षा के लिए अंगदान करने वालों की संख्या बढ़ रही है और अब यह बहुत जरूरी है कि सहमति से लोग अंगदान करना शुरू करें ताकि एक संपूर्ण विश्वस्तरीय स्वास्थ्य चिकित्सा आमजन तक पहुंच सके। जल्दी ही नयति हार्ट और फेफड़ों के प्रत्यारोपण कार्यक्रम भी शुरू करने जा रहा है! हमारा उद्देश्य प्रत्यारोपण सुविधाओं को उन लोगों तक पहुंचाना है जो दूसरे शहरों में जाने या महंगे इलाज के कारण अंग प्रत्यारोपण करने में सक्षम नहीं होते

इस मुहिम के जरिए नयति स्वैच्छिक अंगदान को प्रोत्साहित करते हुए साक्षरता व जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा जिसमें विशेषज्ञ काउंसलर्स हर स्तर पर जनसंपर्क द्वारा लोगों तक पहुंच कर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित, शिक्षित और जागरूक करेंगे।

इस अवसर पर ऑर्गन डोनेशन इंडिया के अध्यक्ष लाल गोयल ने कहा “मैं नयति हेल्थकेयर द्वारा शुरू की गई इस पहल की सराहना करता हूं। हर साल भारत में करीब 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, लेकिन अंग दान के बारे में जागरूकता की कमी के कारण कई जानें जो बचायी जा सकती थी नहीं बच पाती। यही कारण है कि इस क्षेत्र में अंगदान के महत्व पर लोगों को शिक्षित करने की बहुत आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंत में रोटरी क्लब के प्रेसिडेंट नीरव अग्रवाल ने वोट ऑफ थैंक्स देते हुए कहा कि आज के कार्यक्रम के बाद मुझे यकीन है कि अंगदान के प्रति जागरूकता की यह पहल अब समाज के सभी वर्गों तक पहुंचेगी।

कार्यक्रम में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी व नगर के गणमान्य और बुद्धिजीवी व्यक्ति प्रमुख रूप से उपस्थित थे।