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March 29, 2019

नयति हॉस्पिटल बना आगरा का पहला सम्पूर्ण विश्वस्तरीय क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा सेंटर

  • 29 March, 2019

आगरा 28 मार्च 2019 नयति हैल्थकेयर द्वारा संचालित नयति हॉस्पिटल आगरा का पहला 24X7 विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला सम्पूर्ण क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा सेंटर बन गया है, जहां विश्वस्तरीय तकनीक एवं सुविधाओं के साथ बेहतरीन डॉक्टरों की टीम मरीजों के इलाज के लिए हर समय उपलब्ध है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि 2017 में हमने नयति हॉस्पिटल की शुरुआत की थी, लेकिन पिछले डेढ़ साल में हमने देखा कि क्रिटिकल केयर के मरीजों को आगरा में सम्पूर्ण सुविधाएं न मिल पाने के कारण मथुरा और दिल्ली तक जाना पड़ रहा था। यहां की विभिन्न कम्युनिटी से पता चला कि आगरा में पूरी तरह से सुसज्जित क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा सेंटर का अभाव है। क्रिटिकल केयर के मरीजों को तत्काल इलाज की जरूरत होती है। इसलिए हमने अपने आगरा के इस हॉस्पिटल को 53 बैड का सम्पूर्ण तथा आधुनिक क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा सेंटर बनाया है, जहां 24X7 क्रिटिकल केयर के मरीजों को बेहतरीन सुविधाएं मिल पाएंगीं। एक ही छत के नीचे प्रत्येक क्रिटिकल बीमारी के डॉक्टर, आधुनिक लैब, रेडियोलॉजी होने से मरीज का समय खराब नहीं होगा और उन्हें तुरंत इलाज मिल पाएगा, जिसके बाद उन्हें अपने इलाज के लिए मथुरा अथवा दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। हमने लोगों की जरूरतों को समझते हुए नयति की चिकित्सा सुविधाओं में लगातार बदलाव किए हैं और आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में भी जिस चिकित्सा सुविधा अथवा संसाधनों की कमी होगी उसे पूरा किया जाएगा। आपको जानकर खुशी होगी कि देश का जाना पहचाना दिल्ली स्थित व्हिमांस हॉस्पिटल अब नयति हैल्थकेयर द्वारा व्हिमांस नयति के नाम से संचालित किया जा रहा है, आगामी मई में हमारे द्वारा दिल्ली में 200 बैड का अशोक विहार स्थित नयति सुंदर लाल जैन हॉस्पिटल शुरू हो जाएगा, और इसी वर्ष हम गुरुग्राम में भी 600 बैड के नयति हॉस्पिटल की शुरुआत करने जा रहे हैं।

आपका नयति देश का पहला ऐसा हॉस्पिटल है जो टियर 2 और टियर3 शहरों से महानगरों तक गया है, वो भी इसलिये क्योंकि टियर 2 और टियर 3 शहरों के लोग अपनी दूसरी ओपीनियन के लिए महानगरों तक जाते हैं।

नयति हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि आगरा में स्थित नयति क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा सेंटर होने से कई दुर्घटना पीड़ितों को बचाया जा सकता है, क्योंकि किसी भी हादसे के बाद पीड़ित को गोल्डन ऑवर्स में ही समुचित चिकित्सा सुविधा मिल जानी चाहिए। नयति हॉस्पिटल में 24×7 विशेष प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर, विश्वस्तरीय लैब और रेडियोलॉजी की व्यवस्था होने से मरीज को तुरंत उपचार मिलना शुरू हो जाता है। इसके अलावा क्रिटिकल केयर के मरीजों को देखते हुए यहां बैड भी बढ़ा दिए गए हैं, जिसके बाद मरीजों को किसी तरह की असुविधा नहीं होगी। हर समय एडवांस्ड क्रिटिकल लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ एम्बुलेंस भी हैं, जिनसे मरीजों को समय पर इलाज मिलना शुरू हो जाता है। नयति हॉस्पिटल स्थित कार्डियक सेंटर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर, ऑर्थोपेडिक विभाग आदि अन्य विभागों की सेवाएं प्राप्त की जा सकती हैं। नयति हॉस्पिटल में 24X7 घर से ही ब्लड सैम्पल ले जाने और फार्मेसी की सुविधा भी शुरू कर दी है।

March 27, 2019

देश के मजबूत भविष्य के लिए बच्चों का वर्तमान स्वस्थ होना चाहिएः नयति हैल्थकेयर

  • 27 March, 2019

मथुरा 27 मार्च | अपने बच्चे का भविष्य संवारने को समाज का हर व्यक्ति अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा आदि के लिए हर संभव प्रयास करता है, जिसके लिये वो अपने बच्चों का अपनी हैसियत के हिसाब से अच्छे से अच्छे स्कूल में एडमिशन कराता है। इसके बाद भी कई बच्चे अपनी क्लास में पिछड़ते चले जाते हैं, जिसके लिये लोग अपने बच्चों को ही दोष देने लगते हैं। अभी कुछ वर्ष पहले एक फिल्म आयी थी तारे जमीं पे, जिसमें बच्चे का पिता अपने बच्चे का रिजल्ट अच्छा आने के लिए स्कूल बदलता है, यहां तक कि उसे होस्टल तक में डाल देता है, लेकिन बच्चे पर कोई असर नहीं पड़ता। उस बच्चे की मनोस्थिति एक टीचर समझता है और उस बच्चे को सही दिशा दिखाता है। उसी तरह हमारे समाज में भी कई बच्चे हैं जिनकी मनोस्थिति को यदि समझा जाये तो वे नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। यह कहना था नयति मेडिसिटी के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ सागर लवानिया का जो नयति में आयोजित विभिन्न स्कूलों से आये शिक्षकों के सेमिनार को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कई बार हम बच्चों की जिद, उसके व्यवहार, उसकी आदतों को एक सामान्य प्रक्रिया समझते हुए अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यदि बच्चे पर ध्यान दिया जाय तो कुछ लक्षणों के आधार पर हम बच्चे की मनोस्थिति को समझ सकते हैं और किसी मनोचिकित्सक को दिखाकर उसकी परेशानियों को दूर कर सकते हैं।

 
यदि बच्चा एक जगह टिककर बैठता नहीं है, आंख मिलाने से बचता है, एक काम को अधूरा छोड़कर दूसरे काम में लग जाता है, मोबाइल से चिपका रहता है, चिड़चिड़ापन है, जिद्दी है, रोज नई फरमाइश करता है, गणित समझने में कमी आदि लक्षण बच्चे में दिखायी देते हैं तो बच्चा मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो सकता है, और यह लाइलाज बीमारी नहीं है। किसी भी योग्य मनोचिकित्सक को दिखाने से बच्चा पूरी तरह ठीक हो सकता है।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं, देश के स्वस्थ तथा मजबूत भविष्य के लिए बच्चों का वर्तमान भी स्वस्थ होना चाहिए। इसी को ध्यान रखते हुए हमने बच्चों के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया है, मुझे पूरा विश्वास है कि इस कार्यक्रम का लाभ समाज तक अवश्य पहुंचेगा।