PRESS RELEASES

June 25, 2019

नयति में डॉक्टरों ने नहीं की ओपीडी, इमरजेंसी और आईपीडी में ही मिला मरीजों को इलाज

  • 25 June, 2019

मथुरा 17 जून। नयति मेडिसिटी में कोलकाता के डॉक्टर के साथ मरीज के परिजनों द्वारा की गई मारपीट और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही न करने के विरोध में देशभर के डॉक्टरों के साथ नयति हैल्थकेयर के सभी अस्पतालों के डॉक्टरों ने ओपीडी नहीं की।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि कोलकाता में एनआरएस हॉस्पिटल के डॉ परिभा मुखर्जी पर मरीज के तीमारदारों के द्वारा किया हुआ सामूहिक हमला बेहद निंदनीय है, और वहां की प्रदेश सरकार द्वारा इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही न करना भी काफी चिंतनीय है।

अपनी ओपीडी सेवाएं बंद करके हमको या हमारे डॉक्टरों को कोई खुशी नहीं है, लेकिन हमें ऐसा करना पड़ रहा है, जिसका हमें दुख है। जिस विश्वास के साथ मरीज अपना इलाज कराने डॉक्टर के पास आते हैं, डॉक्टर भी उसके विश्वास को टूटने नहीं देना चाहते और अपना बेहतर करके मरीज को जल्द ठीक करने का प्रयास करते हैं। डॉक्टर का काम केवल मरीज की जान बचाने का प्रयास करना है, बाकी बहुत सारी चीजें ऊपर वाले के हाथ में हैं। इस प्रकार की घटनाओं से डॉक्टरों का हौसला टूटेगा और वे किसी गंभीर हालत वाले मरीज की चिकित्सा करने में अपने हाथ खड़े कर देंगे।

डॉक्टर समाज की एक बुनियादी आवश्यकता है। अगली पीढ़ी पहले से ही स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। हम केवल गुंडागर्दी और हिंसा द्वारा इस तरह की असहिष्णु कार्यवाही का समर्थन नहीं कर सकते।

आज कोलकाता की उसी घटना की निंदा करते हुए और आईएमए और डॉक्टरों के साथ खड़े होते हुए हमने नयति मेडिसिटी मथुरा, नयति हॉस्पिटल आगरा और व्हिमांस नयति हॉस्पिटल, दिल्ली स्थित अपने सभी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं न देने का निर्णय लिया है। आपातकालीन सेवाएं और आईपीडी सेवाएं सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं।

June 21, 2019

नयति मेडिसिटी और नेफ्रोप्लस में हुई साझेदारी

  • 21 June, 2019

मथुरा 20 जून।क्षेत्र के सबसे बड़े विश्वस्तरीय अस्पताल नयति मेडिसिटी की देशभर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में डायलेसिस की सुविधाएं देने वाली नेफ्रोप्लस से साझेदारी हो गयी है। ज्ञात हो कि नेफ्रोप्लस के अबतक देश के विभिन्न अस्पतालों में 200 से अधिक डायलेसिस सेंटर हैं, जिनके माध्यम से किडनी और डायलेसिस के मरीजों की विश्वस्तरीय तकनीक और सुविधाओं के साथ डायलेसिस की जा रही है।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहाकि नेफ्रोप्लस के साथ हुई साझेदारी से हमें बेहद खुशी है। डायलेसिस के क्षेत्र में नेफ्रोप्लस काफी अच्छा काम कर रही है, जो डायलेसिस के मरीजों की बेहतर देखभाल आधुनिक एवं विश्वस्तरीय तरीकों से करने के लिए जानी जाती है। जब ये हमारे पास साझेदारी का प्रस्ताव लेकर आये तो हम इंकार नहीं कर सके। नयति शुरू करने से पहले हमने भी संकल्प लिया था कि टियर 2 और टियर 3 शहरों के मरीजों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में हर वह सुविधाएं देने का प्रयास करेंगे जिनके लिए उन्हें महानगरों का मुंह ताकना पड़ता था। मुझे पूरा विश्वास है कि नेफ्रोप्लस द्वारा डायलेसिस के मरीजों को उसी प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेगी जो नयति हैल्थकेयर प्रदान कर रहा था।

नेफ्रोप्लस के वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशन) सुकर्ण सिंह सलूजा ने कहाकि हमें नयति हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित अस्पताल के साथ साझेदारी करने पर गर्व है। हमें विश्वास है कि नेफ्रोप्लस मथुरा शहर में और उसके आसपास डायलिसिस पर आश्रित लोगों को बहुत आवश्यक राहत प्रदान करने के अलावा और अधिक गुणवत्ता के साथ डायलिसिस को सुलभ बनाएगी।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य भारत में डायलिसिस के मरीजों की देखभाल को फिर से परिभाषित करना है। हम तेजी से अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। हमने इस वर्ष देश भर में 50 से 60 डायलेसिस केंद्र खोलने की योजना बनाई है।

नयति मेडिसिटी के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर डॉ के एम साहु ने कहाकि नयति में हर महीने 1800 से अधिक मरीजों की डायलेसिस की जा रही है। डायलेसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जो एक बार शुरू हो जाये तो उम्र भर करानी पड़ती है, इसलिये लोगों को इससे बचने के लिए अपनी किडनी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 35 वर्ष की उम्र के बाद हर साल अपनी किडनी की जांच कराते रहना चाहिये, और किडनी में जरा सी भी कमी का पता चलने पर तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए।

पत्रकार वार्ता में नयति मेडिसिटी मथुरा तथा नयति हॉस्पिटल आगरा के सीओओ डॉ अजय अंगरीश तथा नयति मेडिसिटी के यूरोलोजिस्ट डॉ हर्ष गुप्ता प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

June 12, 2019

नयति में दो दिन के बच्चे की रीढ़ की हड्डी पर नसों से उलझी हुई गांठ का हुआ सफल ऑपरेशन

  • 12 June, 2019

नयति स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग बना एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर

मथुरा 7 जून। टूंडला निवासी बॉबी ने रेलवे हॉस्पिटल, टूंडला में बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद डॉक्टरों ने देखा कि बच्चे की पीठ के निचले हिस्से में काफी बड़ा फोड़ा है, जो बच्चे के जीवन के लिये काफी खतरनाक है। यह पता चलने पर बच्चे के परिजन उसके इलाज के लिये नयति मेडिसिटी लेकर आये, जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव और डॉ विमल कुमार ने बताया कि जब बच्चा हमारे यहां लाया गया था तो वह सिर्फ एक दिन का था। उसकी पीठ पर बहुत बड़ी गांठ दिखाई पड़ रहा था, पर उस गांठ के अलावा बच्चे के शरीर की अन्य परेशानियों को जानने के लिए बच्चे की अल्ट्रासाउंड तथा एमआरआई करने की जरूरत थी, उसमें भी काफी चैलेंज था। बच्चे की एमआरआई केवल एनेस्थीसिया देकर ही की जा सकती थी, और बच्चे को एनेस्थीसिया भी बार बार नहीं दी जा सकती, इसलिए हमने तय किया कि बच्चे को केवल एक बार ही एनेस्थीसिया देंगे और वहीं उसकी अल्ट्रासाउंड, एमआरआई (ब्रेन और स्पाइन) की रिपोर्ट को देखकर तुरंत उसका ऑपरेशन कर देंगे।

एमआरआई की रिपोर्ट देखकर पता चला कि बच्चे गांठ में पानी भरा हुआ है और दिमाग तक जाने वाली नसें आपस में काफी उलझी हुई हैं, इसके अलावा बच्चे के दिमाग में भी पानी भरा था। हमने सबसे पहले बच्चे के दिमाग से पानी निकालने के लिए बच्चे के सिर से पेट तक वीपी शंट डाला और उसके बाद गांठ का ऑपरेशन करके उलझी हुई नसों को ठीक कर दिया। दो दिन पीडियाट्रिक आइसीयू में रखने के बाद बच्चे को वापस घर भेज दिया। इस बच्चे के ऑपरेशन में हमारे यहां मौजूद एक ही छत के नीचे सभी सुविधाओं का काफी योगदान रहा, इनकी वजह से हमारा समय बिल्कुल खराब नहीं हुआ और हम बच्चे की सफल सर्जरी कर पाए।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो फिजिशियन डॉ नीलेश गुप्ता ने बताया कि इस तरह की परेशानी को मेडिकल भाषा में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं, जो फोलिक एसिड (एक प्रकार का विटामिन बी) की कमी से होती है। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचने का सबसे आसान तरीका प्रेगनेंसी से पहले या प्रेगनेंसी के दौरान सही मात्रा में फोलिक एसिड का सेवन होता है। गर्भवती महिलाओं को समय समय पर अपनी तथा अपने बच्चे की जांच योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञ से कराते रहना चाहिये। जागरूकता की कमी अथवा लापरवाही से ही इस तरह की परेशानी होती है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि हमारे यहां का न्यूरो सर्जरी विभाग एक बेहतरीन एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर है। नेशनल हाइवे पर होने के कारण हमारे यहां ट्रॉमा के मरीज अक्सर आते रहते हैं। ट्रॉमा के मरीज को इलाज की तत्काल जरूरत होती है और मरीज को न्यूरो सर्जरी के अलावा ब्लड बैंक, ऑर्थोपेडिक, कार्डियक, जीआइ सर्जरी आदि अन्य विभागों की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसके लिए हमारे यहां के हर विभाग में 24ग्7 डॉक्टर उपस्थित रहते ही हैं।

नयति स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग में अब मथुरा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज करा रहे हैं। लोगों का नयति पर बढ़ता विश्वास हमारे यहां के देश के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय सुविधाओं के कारण ही संभव हो पाया है। हमारे यहां अब तक 2 दिन के बच्चे से 96 वर्ष के बुजुर्ग की सफल न्यूरो सर्जरी हो चुकी है।