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July 26, 2019

नयति में नोएडा के 3 माह के बच्चे की स्पाइन पर हुए नसों के गुच्छे का हुआ सफल ऑपरेशन

  • 26 July, 2019

मथुरा 26 जुलाई। ग्रेटर नोएडा निवासी भुवी ने 3 माह पूर्व बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद पता चला कि बच्चे की पीठ के निचले हिस्से में एक ट्यूमर है जिसके लिए उसे दवा आदि दी जाने लगी। काफी इलाज होने के बाद भी ट्यूमर ठीक नहीं हुआ बल्कि वो लगातार बढ़ता जा रहा था, जिसके बाद डॉक्टरों ने बच्चे की एमआरआई करायी तो पता चला कि बच्चे के ट्यूमर में पानी भरा हुआ है और दिमाग तक जाने वाली नसें आपस में काफी उलझी हुई हैं, जिसका ऑपरेशन कराने की जरूरत थी। उन्होंने दिल्ली और नोएडा के कई अस्पतालों में अपने बच्चे को दिखाया लेकिन उन्हें कहीं भी संतुष्टि न मिल सकी। तभी उन्हें मथुरा स्थित नयति मेडिसिटी के बारे में पता चला और वे नयति मथुरा आये, जहां दिल्ली जैसा ही इलाज और व्यवस्थाएं दिल्ली से कम पैसे में मिलने पर उन्होंने अपने बच्चे का इलाज मथुरा में ही कराने का फैसला किया। जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव और डॉ विमल कुमार ने बताया कि जब बच्चा हमारे यहां लाया गया था तो वह 3 माह का था। एमआरआई से पता चला कि बच्चे के दिमाग में पानी भरा हुआ है और उसके फोड़े की नसें भी आपस में उलझी हुई थीं, जिसमें पानी भी भरा हुआ था और एक गुच्छे की तरह दिखाई दे रही थीं।

हमने सबसे पहले बच्चे के दिमाग से पानी निकालने के लिए बच्चे के सिर से पेट तक वीपी शंट डाला और उसके बाद ट्यूमर का ऑपरेशन करके उलझी हुई नसों को ठीक कर दिया। दो दिन पीडियाट्रिक आइसीयू में रखने के बाद बच्चे को वापस घर भेज दिया। इस बच्चे के ऑपरेशन में हमारे यहां मौजूद एक ही छत के नीचे सभी सुविधाओं का काफी योगदान रहा, इनकी वजह से हमारा समय बिल्कुल खराब नहीं हुआ और हम बच्चे की सफल सर्जरी कर पाए।

उन्होंने बताया कि इस तरह की परेशानी को मेडिकल भाषा में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं, जो फोलिक एसिड(एक प्रकार का बी विटामिन बी है) की कमी से होती है। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचने का सबसे आसान तरीका समय पर और सही मात्रा में फोलिक एसिड का सेवन होता है। गर्भवती महिलाओं को समय समय पर अपनी तथा अपने बच्चे की जांच योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से कराते रहना चाहिये। जागरूकता की कमी अथवा लापरवाही से ही इस तरह की परेशानी होती है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से हमारे यहां के न्यूरो साइंस विभाग में ट्रॉमा, स्ट्रोक, स्पाइन आदि अन्य न्यूरो की परेशानियों के साथ काफी मरीज आ रहे हैं, जो बिल्कुल ठीक होकर गए, जिसकी वजह से हमारे यहां दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज कराते हैं। अभी हाल ही में हमारी न्यूरो सर्जरी टीम ने फरीदाबाद से आये 2 महीने के बच्चे के सिर का ऑपरेशन भी किया था। नयति के न्यूरो सर्जरी विभाग में अब तक 2 दिन के बच्चे से 96 वर्ष के बुजुर्ग की सफल न्यूरो सर्जरी हो चुकी है, इसके लिए मैं न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों को बधाई देती हूं और मुझे इस तरह की न्यूरो क्रिटिकल सर्जरी करने के लिये भी अपने डॉक्टरों पर काफी गर्व है।

बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, और महिलाओं की जरा सी जागरूकता से हम देश के आने वाले भविष्य को बेहतर स्वास्थ्य और जीवन दे सकते हैं। गर्भावस्था का पता चलते ही महिलाओं को लगातार किसी योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए, जिससे आने वाला बच्चा किसी शारीरिक विकार के साथ पैदा न हो सके।

July 26, 2019

मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए वरदान है बैरियाट्रिक सर्जरी

  • 26 July, 2019

कासगंज 24 जुलाई। मोटापा इन्सान के ऊपर कुदरत का वो कहर है जो अकेला नहीं आता बल्कि साथ में लाता है डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन, थाइराइड, घुटनों की परेशानी, एसिडिटी और भी पता नहीं कितनी बीमारियां अपने साथ लाता है। मोटापा आने के बाद रुकता नहीं बल्कि दिनों दिन बढ़ता ही जाता है और जिसकी जिन्दगी में ये आया उसका जीना मुश्किल कर देता है। इससे बचने को इन्सान क्या क्या जतन नहीं करता? जिम जाना, डाइटिंग करना, टहलना और भी पता नहीं क्या क्या, लेकिन मोटापा तो आकर ऐसा घर बसाता है कि जाने का नाम ही नहीं लेता और इससे ग्रस्त इन्सान इसे अपनी खराब किस्मत समझकर हीनभावना के साथ इसके साथ जीने को मजबूर हो जाता है।

बैरियाट्रिक सर्जरी के आने के बाद मोटापे से ग्रस्त लोगों के जीवन में एक चमत्कार होने लगा है जो लोग मोटापे को अपना प्रारब्ध मान चुके थे वे बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद अपने सामान्य वजन के साथ इतराते घूम रहे हैं और जो बीमारियां उन्हें घेरे हुई थीं उनसे भी उन्हें मुक्ति मिल गयी

नयति मेडिसिटी के आने से पहले यह केवल महानगरों के कुछ चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध थी और इसे कराने में लोगों को 3.5 लाख से 5 लाख तक खर्च करने पड़ते थे लेकिन नयति ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए और अपने ध्येय वाक्य नयति है सबके लिये“ के चलते अपने यहां इस सर्जरी को महानगरों से काफी कम दाम में करने का निर्णय लिया है। अब बहुत ही कम कीमत में मोटापे से ग्रस्त लोग नयति मेडिसिटी में अपनी सर्जरी कराकर एक सामान्य इन्सान की तरह अपना जीवन जी रहे हैं।

नयति में बैरियाट्रिक सर्जरी करने वाले योगेश अग्रवाला इस क्षेत्र के काफी अनुभवी चिकित्सक हैं, जो अब तक 3 हजार के लगभग बैरियाट्रिक सर्जरी कर चुके हैं और नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सैस सर्जरी, बैरियाटिक एण्ड गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल सर्जरी एवं गेस्ट्रो इंटेस्टाइनल विभाग के चेयरमैन हैं।

उन्होंने कहा कि अभी तक बैरियाटिक सर्जरी केवल विदेशों तथा गिने चुने कुछ बड़े शहरों में ही सम्भव थी, लेकिन मथुरा स्थित नयति मेडिसिटी तथा आगरा में नयति हॉस्पिटल में भी यह सर्जरी लगातार हो रही है और अब तक इस क्षेत्र के भी कई मरीज इस सर्जरी का लाभ उठा चुके हैं। इस क्षेत्र में मोटापे की वजह से डाइबिटीज, थाइराइड, ब्लडप्रेशर आदि बीमारियां अनियमित खानपान तथा पानी के कारण बहुतायत में पाई जाती है। मोटापा दूर करने वाली यह सर्जरी कोई नई नहीं है। भारत में यह 1998 से की जा रही है लेकिन ये अभी तक महानगरों और बड़े बड़े शहरों तक ही सीमित थी किन्तु अब नयति मेडिसिटी मथुरा और नयति मेडिसेंटर आगरा में यह उपलब्ध है। बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद कई अन्य बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अजय अग्रवाल ने कहा कि बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के तुरन्त बाद मरीज का एक ग्राम वजन भी कम नहीं होता। सर्जरी के बाद हर महीने 4 से 5 किलो वजन कम होने लगता है 8 से 9 महीने में व्यक्ति अपना सामान्य वजन प्राप्त कर लेता है। सर्जरी के दूसरे दिन ही मरीज अपने घर चला जाता है।लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाने वाली यह सर्जरी मोटापा कम करने के अलावा कई अन्य बीमारियों से भी निजात दिलाती है।

इसके अलावा भी हमारे यहां लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से कई अन्य सर्जरियाँ भी की जाती हैं। आपको यकीन नहीं होगा कि एक छोटी सी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से एसिडिटी की शिकायत हमेशा के लिए दूर हो सकती है।

इसी तरह लोगों में यह भ्रम है कि डाइबिटीज एक लाइलाज बीमारी है लेकिन उचित चिकित्सा से यह भी पूरी तरह ठीक हो सकती है हमारे यहाँ आमाशय, हर्निया, पित्ताशय, तथा आंतों के ऑपरेशन 95 प्रतिशत तक लेप्रोस्कोपी तकनीक के माध्यम से किये जाते हैं, जिनकी वजह से मरीज दूसरे दिन ही अपने घर जा सकता है। और तो और एक हफ्ते के अन्दर मरीज अपने काम पर भी जा सकता है और पहले की तरह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।

July 12, 2019

मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए वरदान है बैरियाट्रिक सर्जरी

  • 12 July, 2019

ग्वालियर 9 जुलाई। मोटापा इन्सान के ऊपर कुदरत का वो कहर है जो अकेला नहीं आता बल्कि साथ में लाता है डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन, थाइराइड, घुटनों की परेशानी एसिडिटी और भी पता नहीं कितनी बीमारियां अपने साथ लाता है। मोटापा आने के बाद रुकता नहीं बल्कि दिनोंदिन बढ़ता ही जाता है और जिसकी जिन्दगी में ये आया उसका जीना मुश्किल कर देता है। इससे बचने को इन्सान क्या क्या जतन नहीं करता? जिम जाना, डाइटिंग करना, टहलना और भी पता नहीं क्या क्या, लेकिन मोटापा तो आकर ऐसा घर बसाता है कि जाने का नाम ही नहीं लेता और इससे ग्रस्त इन्सान इसे अपनी खराब किस्मत समझकर हीनभावना के साथ इसके साथ जीने को मजबूर हो जाता है।

बैरियाट्रिक सर्जरी के आने के बाद मोटापे से ग्रस्त लोगों के जीवन में एक चमत्कार होने लगा है जो लोग मोटापे को अपना प्रारब्ध मान चुके थे वे बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद अपने सामान्य वजन के साथ इतराते घूम रहे हैं और जो बीमारियां उन्हें घेरे हुई थीं उनसे भी उन्हें मुक्ति मिल गयी

नयति मेडिसिटी के आने से पहले यह केवल महानगरों के कुछ चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध थी और इसे कराने में लोगों को 3.5 लाख से 5 लाख तक खर्च करने पड़ते थे लेकिन नयति ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए और अपने ध्येय वाक्य नयति है सबके लिये“ के चलते अपने यहां इस सर्जरी को महानगरों से काफी कम दाम में करने का निर्णय लिया है। अब बहुत ही कम कीमत में मोटापे से ग्रस्त लोग नयति मेडिसिटी में अपनी सर्जरी कराकर एक सामान्य इन्सान की तरह अपना जीवन जी सकेंगे।

नयति में बैरियाट्रिक सर्जरी करने वाले डॉ. योगेश अग्रवाल इस क्षेत्र के काफी अनुभवी चिकित्सक हैं अभी तक 2500 के लगभग बैरियाट्रिक सर्जरी कर चुके डॉ. योगेश अग्रवाला नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सैस सर्जरी, बैरियाटिक एण्ड गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल सर्जरी एवं गेस्ट्रो इंटेस्टाइनल विभाग के चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक बैरियाटिक सर्जरी केवल विदेशों तथा गिने चुने कुछ बड़े शहरों में ही सम्भव थी, लेकिन मथुरा स्थित नयति मेडिसिटी तथा आगरा में नयति मेडिसेंटर में भी यह सर्जरी लगातार हो रही है और अब तक इस क्षेत्र के भी कई मरीज इस सर्जरी का लाभ उठा चुके हैं। इस क्षेत्र में मोटापे की वजह से डाइबिटीज, थाइराइड, ब्लडप्रेशर आदि बीमारियां अनियमित खानपान तथा पानी के कारण बहुतायत में पाई जाती है। मोटापा दूर करने वाली यह सर्जरी कोई नई नहीं है। भारत में यह 1998 से की जा रही है लेकिन ये अभी तक महानगरों और बड़े बड़े शहरों तक ही सीमित थी किन्तु अब नयति मेडिसिटी मथुरा और नयति मेडिसेंटर आगरा में यह उपलब्ध है। बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद कई अन्य बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के तुरन्त बाद मरीज का एक ग्राम वजन भी कम नहीं होता। पहले दो से तीन महीने में 35 से 40 किलो वजन कम होता है और उसके बाद हर महीने 4 से 5 किलो वजन कम होने लगता है 8 से 9 महीने में व्यक्ति अपना सामान्य वजन प्राप्त कर लेता है। सर्जरी के दूसरे दिन ही मरीज अपने घर चला जाता है। लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाने वाली यह सर्जरी मोटापा कम करने के अलावा कई अन्य बीमारियों से भी निजात दिलाती है।

इसके अलावा भी हमारे यहां लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से कई अन्य सर्जरियाँ भी की जाती हैं। आपको यकीन नहीं होगा कि एक छोटी सी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से एसिडिटी की शिकायत हमेशा के लिए दूर हो सकती है।

इसी तरह लोगों में यह भ्रम है कि डाइबिटीज एक लाइलाज बीमारी है लेकिन उचित चिकित्सा से यह भी पूरी तरह ठीक हो सकती है हमारे यहाँ आमाशय, हर्निया, पित्ताशय, तथा आंतों के ऑपरेशन 95 प्रतिशत तक लेप्रोस्कोपी तकनीक के माध्यम से किये जाते हैं, जिनकी वजह से मरीज दूसरे दिन ही अपने घर जा सकता है। और तो और एक हफ्ते के अन्दर मरीज अपने काम पर भी जा सकता है और पहले की तरह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।

July 9, 2019

नयति में तीमारदारों के लिये शुरू हुआ लाउंज

  • 09 July, 2019


मथुरा 6 जुलाई। नयति मेडिसिटी में मरीजों के तीमारदारों के लिए वीआईपी लाउंज का शुभारंभ नयति मेडिसिटी के सीओओ डॉ अजय अंगरीश ने फीता काटकर किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नयति ने हमेशा ही अपने यहां आने वाले मरीजों तथा उनके तीमारदारों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया है। हमारे यहां मरीजों के साथ साथ तीमारदारों के लिए भी योग आदि के कार्यक्रम चलाए जाते रहते हैं। एक ओर हम मरीज का ध्यान ध्यान रखते हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके तीमारदारों का भी ख्याल रखना अपना कर्तव्य समझते हैं। इसी क्रम में हमने आइसीयू में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए विशेष प्रकार का लाउंज तैयार कराया है, जहां उनके आराम का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा नयति हैल्थकेयर द्वारा दिये गए गोल्ड कार्ड, सिल्वर कार्ड, सीनियर सिटीजन कार्ड तथा वैल वूमेन कार्ड धारकों के लिए इस लाउंज की शुरुआत की गई है। हमारा हमेशा से उद्देश्य रहा है कि हम मरीज को बेहतरीन उपचार देने के अलावा उनके तीमारदारों को भी सभी सुविधाएं प्रदान कर सकें।