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August 13, 2019

उत्तर भारत का सबसे बड़ा और विश्वसनीय एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर बना नयति मेडीसिटी

  • 13 August, 2019

पहले घंटे (गोल्डन ऑवर) के अंदर उचित इलाज शुरू होने पर बच सकती है मरीज की जान

मैनपुरी 10 अगस्त। नयति मेडिसिटी के न्यूरोसाइंस विभाग में न्यूरो सर्जरी और न्यूरोलॉजी से संबंधित हर प्रकार की चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जहां अब तक 2 दिन के बच्चे से लेकर 96 साल के बुजुर्ग के अलावा सैकड़ों मरीजों की न्यूरो सर्जरी अथवा चिकित्सा सफलतापूर्वक की जा चुकी है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि दिल्ली के व्हिमांस और नयति की साझेदारी के बाद न्यूरो के मरीजों के लिए वही विश्वस्तरीय तकनीक एवं चिकित्सा नयति मेडिसिटी मथुरा में भी दी जा रही है और अब नयति उत्तर भारत का सबसे बड़ा न्यूरो सेंटर बन गया है।

हमारे यहां का न्यूरोलॉजी विभाग एक बेहतरीन एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर है, और हर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर को ठीक करने में सक्षम है। ब्रेन स्ट्रोक में प्रति सेकंड 32 हजार कोशिकाएं नष्ट होती हैं और हम सोचने में ही वक्त बिता देते है। त्वरित उपचार से न केवल मरीज की जान बचने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, बल्कि उसका इलाज भी बेहतर हो पाता है। हमारे न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेन से लेकर स्पाइन तक हर प्रकार की चिकित्सा तथा सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही है। नेशनल हाइवे पर होने के कारण हमारे यहां ट्रॉमा के मरीज भी अक्सर आते रहते हैं। ट्रॉमा के मरीज को इलाज की तत्काल जरूरत होती है और मरीज को न्यूरो सर्जरी के अलावा ब्लड बैंक, ऑर्थोपेडिक, कार्डियक, जीआइ सर्जरी आदि अन्य विभागों की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसके लिए हमारे यहां के हर विभाग में 24ग्7 डॉक्टर उपस्थित रहते ही हैं।

नयति स्थित न्यूरो विभाग में अब मथुरा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज करा रहे हैं। लोगों का नयति पर बढ़ता विश्वास हमारे यहां के देश के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय सुविधाओं के कारण ही संभव हो पाया है।“

नयति के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि समय के साथ न्यूरो साइंस ने भी काफी तरक्की की है। एंडोस्कोपी ब्रेन सर्जरी, एंडोस्कोपी स्पाइन सर्जरी, माइक्रो न्यूरो सर्जरी, कॉम्प्लेक्स स्पाइन सर्जरी आदि अन्य सभी प्रकार की सर्जरी हो रही हैं। न्यूरो आईसीयू और पीडियाट्रिक आईसीयू होने से हमारे यहां न्यूरो से संबंधित मरीजों की बेहतर देखभाल हो पाती है। ब्रेन ट्यूमर के कई मरीजों को रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है, हमारे यहां न्यूरो रेडियोथेरेपी की सुविधा होने से मरीजों को ऑपरेशन कराने के बाद कहीं और नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी और न्यूरो रीहबिलिटेशन जैसी भी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

हमारे यहां अभी एक दिन के बच्चे की रीढ़ की हड्डी पर उलझी हुई नसों की गांठ का सफल ऑपरेशन किया गया। अभी हाल ही में हरियाणा के जींद के एक बच्चे (जिसका कुल वजन 8 किलो था, जिसमें से 5 किलो वजन केवल उसके सिर का था) का भी सफल ऑपरेशन किया गया।

नयति मेडिसिटी के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ नीलेश गुप्ता ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) के लक्षण (मुँह का टेढ़ापन, बाजू में सूनापन या कमजोरी, बोलने में दिक्कत, मिर्गी, सिरदर्द, याददाश्त की परेशानी, हाथ पैरों में झनझनाहट, शरीर के अंग का सुन्न हो जाना, शरीर का बैलेंस और कंपन, दिमागी बुखार) आदि अन्य न्यूरो संबंधी परेशानियां होने पर किसी योग्य न्यूरो फिजिशियन को दिखाना चाहिए। किसी भी मरीज का स्ट्रोक आने के बाद यदि पहले घंटे (गोल्डन ऑवर) के अंदर उचित इलाज शुरू हो जाये तो मरीज भविष्य में होने वाली परेशानी से बच सकता हमारे यहां कई मरीज इन परेशानियों के साथ आये और बिल्कुल ठीक होकर गए हैं।

August 13, 2019

नयति मेडिसिटी मथुरा द्वारा स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) एवं मस्तिष्क रोग जांच शिविर

  • 13 August, 2019

मथुरा 10 अगस्त। नयति मेडिसिटी में आज स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) एवं मस्तिष्क रोग जांच शिविर लगाया जा रहा है। इस शिविर में आप अपनी जांच करवा सकते हैं।

शिविर में रीढ़ की हड्डी में टेडापन, रीढ़ की हड्डी का टी बी, रीढ़ की हड्डी का इंफेक्शन और रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर एवं हर तरह की न्यूरो से संबंधित परेशानी के लिये आ सकते हैं।

शिविर में नयति मेडिसिटी के न्यूरो रोग विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव (वरिष्ठ न्यूरो सर्जन) एवं डॉ नीलेश गुप्ता (वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन) रविवार 11 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपनी सेवाएं देंगे।  शिविर में आप ब्लड प्रेशर, रैंडम ब्लड शुगर के अलावा प्लेन एम आर आई एवम् प्लेन सी टी स्कैन पर (डॉक्टर के सलाह पर) 50 प्रतिशत डिस्काउंट और अन्य जांचों पर 20 प्रतिशत की छूट मिल सकेगी।

August 1, 2019

क्षेत्र में पहली बार नयति मेडिसिटी में हुआ सफल एल्बो (कोहनी) प्रत्यारोपण

  • 01 August, 2019

मथुरा 31 जुलाई। क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में हड्डी रोगों से संबंधित हर तरह का उपचार किया जा रहा है, जहां अब तक सैकड़ों की तादात में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट भी किये जा चुके हैं। देश के जानेमाने चिकित्सकों एवं बेहतरीन तकनीक के कारण नयति का ऑर्थोपेडिक विभाग सफलता के नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। अभी हाल ही में नयति मेडिसिटी में सफलतापूर्वक कोहनी का प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में कोहनी का प्रत्यारोपण एक बहुत ही जटिल सर्जरी है जो देश के गिने चुने सर्जनों द्वारा ही की जाती है।

नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि नयति मेडिसिटी का हर विभाग स्वास्थ्य के क्षेत्र अहम भूमिका निभा रहा है, और लोगों के हमारे ऊपर बढ़ते विश्वास से हमें काफी खुशी मिलती है। हमारे यहां के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय तकनीक के कारण ही हम क्षेत्रवासियों को महानगरों में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं दे पा रहे हैं। एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं होने से मरीज के इलाज में समय भी नहीं लगता और डॉक्टर भी अपना काम बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

10 हजार से अधिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट कर चुके देश के जाने पहचाने नयति मेडिसिटी के ऑर्थोपेडिक विभाग के चेयरमैन डॉ राजीव शर्मा ने बताया कि कमलेश देवी अपनी कोहनी की तकलीफ से काफी समय से परेशान थीं, उन्होंने कई जगह अपना इलाज कराया लेकिन उन्हें सन्तुष्टि न मिल सकी। जब वे हमारे पास आयीं तो पता चला कि उनकी कोहनी ठीक से काम नहीं कर रही जिसके प्रत्यारोपण की जरूरत है। कोहनी शरीर का वह भाग है जो त्वचा के बिल्कुल नीचे होती है और काफी सारी मसल्स से घिरी होती है, जिसमें ड्राइसेल्स मसल्स कोहनी को सीधा रखने में मदद करती है। इस तरह की परेशानी वाले मरीजों की हड्डियां भी काफी कमजोर होती है, जिसके कारण उनके टूटने और चटकने का खतरा भी हमेशा बना रहता है। कोहनी के आसपास नसों का जाल बिछा होता है, जिसकी वजह से कोहनी को अपनी जगह से हटाना और फिर दोबारा लगाना भी एक बहुत ही बड़ा काम है, जिसे करने के लिए काफी अनुभव की जरूरत है। हमारे शरीर में 10 हजार से ज्यादा जोड़ हैं, जिसमें एल्बो ज्वाइंट सबसे मुश्किल ज्वाइंट होता है। आर्टिफिशियर सरफेस द्वारा एल्बो को ह्यूमरस और अल्ना के साथ काफी एहतियात के साथ जोड़ा गया, जिससे कि वह अच्छी तरह से काम कर सके। ऑपरेशन के बाद हाथ में एल्बो को सहारा देने के लिए एक सपोर्ट लगाया गया जिसे कुछ दिनों बाद हटा दिया गया। आने वाले समय में कमलेश देवी सामान्य जीवन जी सकेंगी।

August 1, 2019

दुर्घटना में बुरी तरह घायल महिला के सिर की सीवियर इंजरी और लकवाग्रस्त चेहरे का नयति में हुआ सफल इलाज

  • 01 August, 2019

मथुरा 30 जुलाई। दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने से सिर में गंभीर चोट के साथ नयति में पहुंची महिला का न्यूरो सर्जरी विभाग और ईएनटी विभाग के डॉक्टरों द्वारा सफल ऑपरेशन कर नया जीवन दिया।

राया निवासी विमला देवी का मोटरसाइकिल से जाते वक्त एक्सीडेंट हो गया, जिसके बाद वे मौके पर ही बेहोश हो गयीं। उनके सिर तथा चेहरे पर काफी चोट थी। उनके परिजन उन्हें नयति अस्पताल लेकर आये, जहां न्यूरो सर्जरी विभाग और ईएनटी विभाग द्वारा उनके सिर की सर्जरी और मुंह के टेढ़ेपन का इलाज कर दिया गया।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव और डॉ विमल कुमार ने बताया कि दुर्घटना के बाद विमला देवी काफी गंभीर स्थिति में हमारे पास लायी गयी थीं। जांच करने पर पता चला कि उनके सिर के पिछले भाग में फ्रेक्चर है और दिमाग में काफी क्लॉट जमा हो गए थे, जिसका ऑपरेशन करने की तुरंत आवश्यकता थी। हमने उनके सिर का ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर दिया। उनके दिमाग से जाने वाली सातवीं नस फेशियल नर्व हड्डी में फंस गई है, जिसके कारण उनके मुंह पर टेढ़ापन आ गया था, जिसके लिए हमने उन्हें नयति के ही ईएनटी विभाग भेज दिया।

नयति मेडिसिटी के ईएनटी विभाग प्रमुख डॉ मनीष जैन ने बताया कि हमने जब विमला देवी की जब जांच की तो पता चला कि दुर्घटना के कारण इनकी फेशियल नर्व (चेहरे की नस) पर काफी दवाब पड़ रहा है और उस नस में उनकी टूटी हुई हड्डियों के टुकड़े फंस गए हैं, जिसके कारण उस नस का कार्य ना के बराबर हो रहा था।

परिजनों की सहमति के बाद हमने उनकी नस पर पड़ रहे दवाब को हटाकर नस में धंसे हुए हड्डियों के टुकड़ों को हटा दिया। अब विमला देवी की स्थिति में काफी सुधार है और धीरे धीरे ये बिल्कुल ठीक हो रही हैं।

विमला देवी के पति ने बताया कि नयति में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं होने से मेरी पत्नी का समय पर और सही इलाज हो सका। नयति में स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग, ईएनटी विभाग के डॉक्टरों और उनकी टीम द्वारा किये गए ऑपरेशन के बाद इनके सिर की चोट सही हो गयी, आंख भी बंद होने लगी है और मुंह का टेढ़ापन भी काफी हद तक कम हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार समय के साथ और भी सुधार आ जायेगा, और ये ठीक हो जाएंगी।