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July 18, 2018

नयति में महिला के हृदय के एक साथ तीन ओपन हार्ट सर्जरी कर तीन वॉल्व बदलेनयति में महिला के हृदय के एक साथ तीन ओपन हार्ट सर्जरी कर तीन वॉल्व बदले

  • 18 July, 2018

मथुरा । नयति मेडिसिटी में 30 वर्षीय महिला के हृदय के एक साथ तीन वॉल्व तीन ओपन हार्ट सर्जरी करके बदल दिए गए। इस प्रकार का जटिल ऑपरेशन करने वाला नयति मेडिसिटी इस क्षेत्र का पहला हॉस्पिटल बन गया है, अभी तक इतने बड़े ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली अथवा एनसीआर तक जाना पड़ता था। आगरा निवासी प्रीती के नौ साल पहले सांस फूलने की परेशानी हुई। डॉक्टरों को दिखाने पर पता चला कि उनका एक वॉल्व खराब है जिसे बदलने की आवश्यकता है, लेकिन उन्होंने अपना वॉल्व नहीं बदलवाया और दवाएं खाकर अपना काम चलाती रहीं। कुछ समय पहले उनकी तकलीफ काफी बढ़ गयी, जिसके बाद वह नयति आयीं, जहां कार्डियक सर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉ आदर्श कोप्पुला से मिलीं।

डॉ. कोप्पुला ने बताया कि मनुष्य के हृदय में चार वॉल्व होते हैं प्रीती की जब जांच की गयी तो पता चला कि इनके तीन वॉल्व ख़राब हैं जिनके बदलने की तुरंत आवश्यकता है। परिवार की सहमति के बाद हमने एक बार में तीन ओपन हार्ट सर्जरी करके तीनों वॉल्व बदल दिए। अब से नौ वर्ष पूर्व इनका एक वॉल्व खराब हुआ था जिसे बदलवा लेना चाहिए था, यदि उसी समय वॉल्व बदल गया होता तो इनके और वॉल्व ख़राब नहीं होते। इतने बड़े तथा जटिल ऑपरेशन को करने के लिए कई सुविधाओं एवं मशीनों की जरुरत पड़ती है जो नयति में मौजूद है। हमारे यहां ब्लड बैंक के साथ अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी मौजूद है, जिसकी वजह से हमको ऑपरेशन करने में काफी आसानी हुई। उन्होंने बताया कि अधिकतर महिलाओं में वॉल्व की शिकायत पायी जाती है जो अक्सर डिलीवरी के समय ही पता चलती है, इसलिए जैसे ही वॉल्व के ख़राब होने का पता चले तो तुरंत उसका उचित इलाज करा लेना चाहिए।

नयति हैल्थकेयर के सीईओ डॉ. आरके मनी ने कहा कि नयति में देश के विख्यात हार्ट स्पेशलिस्ट की टीम मौजूद है, जिसकी वजह से नयति हार्ट सेंटर में हृदय रोगों संबंधी हर वह उपचार मौजूद है जिसके लिए अब तक दिल्ली मुम्बई तक की यात्राएं करनी पड़ती थीं। किसी परिवार में जब कोई बीमार होता है तो इसका असर केवल बीमार पर नहीं पड़ता बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। बाहर जाकर इलाज कराने में तो तकलीफ और ज्यादा बढ़ जाती है। एक तो महानगरों में इलाज का खर्च अधिक है दूसरे वहां रहने का भी खर्चा बढ़ता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हमने तय किया था कि इलाज मरीज के पास पहुंचना चाहिए, जिसमें हम कामयाब हैं।

नयति मेडिसिटी के कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एच. एस सोमनाथ ने कहा नयति में हृदय रोग से संबंधित किसी भी आपातकाल के समय सीनियर कार्डियोलोजिस्ट एवं सीनियर कार्डियक सर्जन 24 घंटे मौजूद रहते हैं। आधुनिक उपकरणों और मेडिकल सुविधाओं से युक्त हमारे हार्ट सेंटर में देश के जाने माने चिकित्सक बाईपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर इम्प्लांट जैसी जटिल समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं।

मरीज प्रीती शर्मा ने कहा कि अब से नौ वर्ष पूर्व डॉक्टरों ने मेरा एक वाल्व खराब बता दिया था लेकिन मन में एक भय था कि यदि ऑपरेशन असफल हो गया तो मेरी छोटी सी बच्ची का क्या होगा। दवाओं के सहारे में अपना काम चला रही थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैं ना तो कोई काम कर पा रही थी और ना ही अपनी बच्ची का ध्यान रख पा रही थी। तब हम नयति आये, यहां पर डॉ आदर्श से हमारी बात हुई और हमने यहां अपना ऑपरेशन कराया। अब मुझे कोई परेशानी नहीं है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. विपिन गोयल एवं डॉ. प्रवीर सिन्हा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

July 12, 2018

नयति में मुंह के कैंसर का सर्जरी द्वारा हुआ सफल इलाज

  • 12 July, 2018

मथुरा 12 जुलाई। नयति मेडिसिटी में मुंह के कैंसर का एन ब्लॉक रिमूबल विधि द्वारा सर्जरी करके सफल इलाज किया गया। आमतौर पर इस प्रकार की सर्जरी में पूरा जबड़ा निकाल देते हैं, लेकिन नयति में विशेष तकनीक द्वारा केवल कैंसरग्रस्त जबड़े को ही निकाला गया है।

आगरा निवासी 52 वर्षीय पार्वती के मुंह में छाला हो गया था जो काफी इलाज कराने के बाद भी सही नहीं हुआ, उनका खाना पीना बंद हो गया था, मुंह भी पूरी तरह से नहीं खुल पा रहा था। तब वे नयति आकर नयति मेडिसिटी के कैंसर सर्जरी विभाग के डाइरेक्टर डॉ रविकांत अरोरा से मिलीं, जहां जब पार्वती के छाले की बायोप्सी करायी गयी तो पता चला कि उनके जबड़े के कुछ भाग में कैंसर है जिसकी सर्जरी करने की तुरंत आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद उनकी सर्जरी कर दी गयी।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के कैंसर विभाग के अध्यक्ष डॉ (प्रो.) शान्तनु चौधरी ने कहा कि सही समय पर कराये गये उचित इलाज द्वारा कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है। शरीर में किसी हिस्से में रक्तस्राव अथवा कोई गांठ, ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो, शौच का कड़ा होना आदि लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कैंसर रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

नयति में हर उम्र के व्यक्ति एवं किसी भी प्रकार के कैंसर से सम्बंधित हर वह इलाज मौजूद है जिसके लिए अब तक दिल्ली और मुम्बई तक जाना पड़ता था। नयति में आने वाले किसी भी मरीज के बेहतरीन इलाज के लिए हमारे यहां के अलग अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मिलकर निर्णय लेती है, जिससे मरीज को सटीक इलाज मिल सके।

नयति मेडिसिटी के कैंसर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. रविकांत अरोरा ने बताया कि पार्वती के ऑपरेशन का जब हमने प्लान किया तब यह निश्चय किया कि हम इनका पूरा जबड़ा नहीं निकालेंगे बल्कि जितने भाग में कैंसर फैला है वही भाग निकालेंगे, यह करना काफी जटिल था किंतु हमने यही किया। हमने उनके कैंसरग्रस्त जबड़े का ऑपरेशन एन ब्लॉक रिमूबल विधि से किया और जीभ की त्वचा से खाली हुई जगह को भर दिया, ऑपरेशन के बाद इनको रेडियेशन एवं कीमोथैरेपी भी दी गयी, अब पार्वती बिल्कुल स्वस्थ है।

July 5, 2018

नयति में महिला के सिर से माइक्रोस्कोपिक विधि से 5X5 सेमी बड़ा ट्यूमर निकाला

  • 05 July, 2018

मथुरा । नयति मेडिसिटी के डॉक्टरों ने 50 वर्षीय  महिला के सिर से 5X5 सेमी का ट्यूमर माइक्रोस्कोपिक विधि द्वारा ऑपरेशन करके सफलतापूर्वक निकाल दिया।

अलीगढ निवासी 50 वर्षीय निर्मला पिछले 4 वर्षों से सिर दर्द से पीड़ित थीं। उन्होंने डॉक्टरों को दिखाया तो उनके सिर में एक ट्यूमर बताया, साथ ही यह भी कहा कि यदि इसका ऑपरेशन किया गया या इस ट्यूमर को छेड़ा गया तो शरीर के एक भाग को लकवा मार सकता है या कोई और साइड इफैक्ट भी हो सकता है। यह सुनकर वह घबरा गयीं और उन्होंने अपने ट्यूमर का ऑपरेशन कराने का विचार त्याग दिया। सिर दर्द होने पर वे दर्द निवारक दवा ले लेती थीं और इसी प्रकार अपना जीवन बिता रही थीं। कुछ समय पहले उर्मिला के हाथपैर सुन्न होने शुरू हो गए, अक्सर उल्टियां होने लगीं, चेहरे पर टेढ़ापन आ गया था और निगाह भी काफी कमजोर हो गयी थी। तब वे नयति मेडिसिटी आयीं और न्यूरो विभाग के डॉ रविंद्र श्रीवास्तव से मिले, जो कई वर्ष अपनी सेवाएं एम्स दिल्ली में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जहां उनकी जरुरी जांचें करायी गयी तो पता चला कि उनके सिर में जो ट्यूमर था अब काफी बड़ा (5X5 सेमी का) हो गया है और सिर में पानी भी भर गया है। जिसकी वजह से निर्मला के सिर की कई नसों पर दवाब पड़ रहा है, यदि जल्द इस ट्यूमर को ना निकाला गया तो आने वाले समय में निर्मला की आँखों की रौशनी जा सकती है और शरीर का एक भाग लकवाग्रस्त भी हो सकता है। परिवार की सहमति के बाद डॉ विमल कुमार अग्रवाल के साथ मिलकर निर्मला का माइक्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन करके ट्यूमर निकाल दिया गया।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आरके मनी ने कहा कि नयति में हर वह इलाज मौजूद है जो नयति से पहले केवल महानगरों में ही मिल पाता था। हमारे यहां हर विभाग में देश के जाने माने एवं अनुभवी चिकित्सक हैं, जो मरीज की बीमारी की तह तक पहुंच कर उसके निदान का प्रयास करते हैं।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ रविंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि समय पर इलाज न कराये जाने के कारण ट्यूमर लगातार बढ़ता जा रहा था जिससे दिमाग की नसों पर काफी प्रेशर पड़ रहा था। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में सेरिब्लोपौंटाइन एंगल ट्यूमर कहा जाता है जो दिमाग की आठवीं नर्व से निकलता है, जिसके कारण मरीज को सुनाई देना तक बंद हो सकता है। इस प्रकार के ऑपरेशन देश के कुछ गिने चुने न्यूरो सर्जरी सेंटरो पर तथा अनुभवी चिकित्सकों द्वारा ही किये जा सकते हैं।

June 30, 2018

नयति में देश भर के लैप्रोस्कोपिक सर्जन का हुआ जमावड़ा

  • 30 June, 2018

नयति के सहयोग से उप्र में पहली बार मथुरा में आईएजीईएस द्वारा किया जा रहा है आयोजन

मथुरा। नयति मेडिसिटी में इन्डियन एसोसिएशन ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एन्ड एंडोस्कोपिक सर्जन्स द्वारा नयति हैल्थकेयर के सहयोग से उप्र में पहली बार मिनिमल एक्सेस सर्जरी एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन के लिए तीन दिवसीय फैलोशिप का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर से सैकड़ों की संख्या में आये हुए सर्जन ने बढ़चढ़ कर भाग लेते हुए अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। ज्ञात हो कि इस प्रकार का कार्यक्रम उप्र में पहली बार नयति मेडिसिटी में किया जा रहा है।

मथुरा के जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे ज्यादा जरुरत आज छोटे एवं मंझले शहरों के लोगों को ही है, और नयति द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में दिया जा रहा योगदान काफी सराहनीय है। नयति द्वारा शुरू किये गए प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देश की आइएजीइएस जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश में पहली बार मथुरा में यह आयोजन किया गया।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि मेडिकल साइंस के फायदे गांवों कस्बों तक पहुंचने चाहिये, जिससे देश के हर व्यक्ति को बेहतरीन इलाज मिल सके। डॉक्टरों को विश्व में आने वाली नई तकनीक को जानने के लिए ट्रेंड भी होना जरुरी है, जिसके लिए हम हमेशा तत्पर रहते हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉक्टरों का विशेष योगदान रहता है, इसीलिए हम समय समय पर देश के बेहतरीन डॉक्टरों के अनुभव आपस में बांटने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाते रहते हैं, जिससे लोग विश्व की आधुनिक तकनीक तथा कार्यशैली को अपना सकें और मरीज को बेहतरीन उपचार प्रदान कर सके।

हमें गर्व है कि आइएजीइएस जैसी प्रतिष्ठित संस्था के साथ हमें यह कार्यशाला करने का अवसर प्राप्त हुआ।

इन्डियन एसोसिएशन ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एन्ड एंडोस्कोपिक सर्जन्स के अध्यक्ष डॉ सुभाष खन्ना ने कहा कि 20 सदस्यों जे साथ शुरू किये गए इस संगठन में 6 हजार से अधिक सदस्य हैं और आज इस संगठन ने एक वटबृक्ष का रूप धारण कर लिया है। जब हमने मथुरा को इस फैलोशिप के लिए चुना तो कई डॉक्टर्स का कहना था कि मथुरा तो एक छोटा शहर है, पता नहीं कैसा अस्पताल होगा, सुविधाएं अच्छी होंगी या नहीं? यहां आकर जब नयति को देखा तो विश्वास ही नहीं हुआ कि विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला अस्पताल नयति मेडिसिटी मथुरा में ही मौजूद है।

नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सेस एवं जीआई सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश अग्रवाला ने वोट ऑफ थैंक्स देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से हमेशा कुछ नया सीखने को मिलता है और मुझे पूरा विश्वास है कि यहां आये हुए डॉक्टर्स यहां से अपने साथ बेहतरीन अनुभव तथा जानकारी लेकर जायेंगे जो भविष्य में उनके काम आएंगे।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अजय अग्रवाल ने फैलोशिप के लिए देश भर से आये हुए डॉक्टरों का परिचय कराते हुए कहा कि लोगों का डॉक्टरों पर बहुत विश्वास होता है, इसलिए हमें समय समय पर आने वाली आधुनिक तकनीक एवं सुविधाएं जानने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिये जिसका लाभ हमारे द्वारा लोगों तक पहुंच सके।

कार्यक्रम में डॉ. सुरेंद्र शर्मा, डॉ सौरभ अग्रवाल का विशेष योगदान रहा।

June 16, 2018

नयति में रीटरोपैरिटोनियोस्कोपी के माध्यम से खराब किडनी निकाली

  • 16 June, 2018

मथुरावृन्दावन निवासी 36 वर्षीय विमलेश चार पांच दिनों से पेशाब न आने की समस्या से परेशान थीं। उन्होंने खुद को एक दो जगह दिखाया लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ, तब वे नयति मेडिसिटी में आकर यूरो विभाग के प्रमुख डॉ सुमित शर्मा से मिलीं। नयति में जब विमलेश की जांच कराई गई तो पता चला कि उनका क्रियेटिनिन काफी बढ़ा हुआ है, उनकी दोनों किडनियों में पथरी थीं और उनकी एक किडनी मवाद भी भरा हुआ था जिसके कारण उनकी एक किडनी फेल हो चुकी है, जिसको ऑपरेशन करके निकालने की तुरंत आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद उनका ऑपरेशन करके खराब हो चुकी किडनी रीटरोपैरिटोनियोस्कोपी के माध्यम से निकाल दी गयी।

’नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आर के मनी’ ने कहा कि हमने तय किया था कि नयति में हम हर वो सुविधा उपलब्ध कराएंगे जिनके लिए यहां के लोगों मीलों लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं। आज नयति में एक ही छत के नीचे हर बीमारी का इलाज विश्वस्तरीय सुविधाओं एवं चिकित्सको के साथ मौजूद है।उन्होंने कहा कि यह तकनीक इस क्षेत्र के लिए बिल्कुल नयी एवं अत्याधुनिक तकनीक है, अभी तक दिल्ली के कुछ ही अस्पतालों में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के द्वारा किडनी निकालने के लिए पूरा पेट खोलने की जरुरत नहीं होती बल्कि पेट के निचले हिस्से में कमर की ओर केवल एक छोटा सा छेद करके खराब किडनी को निकाल दिया जाता है।

’नयति मेडिसिटी के यूरो विभाग के प्रमुख डॉ. सुमित शर्मा’ ने कहा कि सबसे पहले हमने इनका डायलेसिस कराया उसके बाद अपनी टीम के साथ मिलकर रीटरोपैरिटोनियोस्कोपी के माध्यम से इनकी खराब हो चुकी किडनी को निकाल दिया तथा सही किडनी में से पथरी भी निकाल दी गयी जिसके बाद विमलेश को अब डायलेसिस की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि समय रहते इसका इलाज करा लिया जाता तो किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता था, इनकी खराब किडनी को यदि निकाला ना जाता तो दूसरी किडनी भी खराब हो सकती थी।

June 14, 2018

नयति हॉस्पिटल ने दिलाई शपथ नही करेंगें तंबाकू का सेवन विश्व तम्बाकू निषेध जागरूकता सप्ताह का हुआ समापन

  • 14 June, 2018

आगरा। तम्बाकू सेवन के दुष्परिणामों से आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से नयति हेल्थकेयर की ओर से चलाए जा रहे विश्व तंबाकू निषेध सप्ताह का समापन ”विश्व तंबाकू निषेध दिवस” के उपलक्ष्य में नयति हॉस्पिटल आगरा में परिचर्चा के साथ किया गया। परिचर्चा  में तंबाकू के उपयोग न करने और समाज को जागरूक करने जैसे कई पहलूओं पर विचार विमर्श हुआ। इन मौके पर नयति हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तंबाकू से शरीर और वातावरण को होने वाले नुकसानों के बारे में जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को नयति हेल्थकेयर द्वारा पूरे हफ्ते चलाए गए कार्यक्रमों के बारे में अवगत कराया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने तंबाकू का सेवन न करने के प्रण के साथ तंबाकू सेवन करने वाले अन्य लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों से जागरूक करने की बात कही। परिचर्चा में शामिल हुए लोगों ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से तंबाकू से होने वाली बीमारियों, तंबाकू की लत छोड़ने के उपाय जैसे सवाल पूछ अपनी जिज्ञासा को शांत किया। डाक्टरों ने तंबाकू से होने वाले जानलेवा बीमारियों जैसे कैंसर, टीबी, हृदय रोग आदि के बारे में जानकारी साझा की। परिचर्चा में नयति की ओर से (हृदय रोग विशेषज्ञ) डॉ. विवेक मित्तल एवं डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. अमित सिघंल (नाक, कान, गलारोग विशेषज्ञ), डॉ. नेहा गर्ग (दंत रोग विशेषज्ञ), डॉ. संजीव के गुप्ता (कैंसर रोग विशेषज्ञ), डॉ. सागर लवानिया (मनोचिकित्सक), डॉ. मनीष शर्मा (फेफडा रोग विशेषज्ञ) ने भाग लिया। परिचर्चा का संचालन नयति हॉस्पिटल की यूनिट हेड डॉ. ज्योति तिवारी ने किया।

कार्यक्रम में नयति हेल्थकेयर के सीईओ डॉ. आर के मनी ने कहा  तंबाकू और धूम्रपान आज समाज के लिए सबसे बडा खतरा है, और हम यह मानते है कि यह हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि हम इससे होने वाले खतरों के बारे में समाज के हर वर्ग को अवगत कराते हुए जागरूक कर उन्हें इसके दुष्परिणामों से बचा सकें। हम जानते है कि हमारे क्षेत्र में तम्बाकू धूम्रपान का सेवन जहां लगातार बढ़ रहा तो दूसरी ओर इसके दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता की काफी कमी है जिसके कारण नयति इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इसी श्रृंखला में हमने पिछले एक हफ्ते मे नुक्कड़ नाटको, परिचर्चाओं, नयति तंबाकू निवारण क्लीनिक की शुरुआत के साथ और भी कई विभिन्न माध्यमों के द्वारा आमजन तक इस संदेश को पहुचाने का काम किया है। हमारे इस प्रयास से कई लोगों को इस बुरी लत को छोड़ने का हौसला भी मिला जिससे हमारी यह मुहिम सार्थक साबित हुई। हमारा विश्वास है कि आगे भी हम समाज को स्वस्थ बनाने की अपनी मुहिम में कुछ नया योगदान देते रहेंगें।

June 9, 2018

डाइबिटीज, कोलेस्ट्रॉल एवं असन्तुलित हार्मोन्स के जाने-माने चिकित्सक डॉ.(प्रो) अभय अहलूवालिया बने नयति का हिस्सा

  • 09 June, 2018

मथुरा 9 जून। देश के जाने-माने चिकित्सक डॉ. (प्रो) अभय अहलूवालिया अब नयति मेडिसिटी का हिस्सा बन गए हैं। डाइबिटीज, कोलेस्ट्रॉल एवं असंतुलित हार्मोन्स की चिकित्सा के क्षेत्र में आपका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आप नयति में एंडोक्रिनोलॉजी एवं मेटाबॉलिज्म विभाग के डायरेक्टर एवं विभाग प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। डॉ. अहलूवालिया सप्ताह के सोमवार और शुक्रवार को नयति मेडिसिटी, मथुरा और मंगलवार को नयति हॉस्पिटल, आगरा में अपनी सेवाएं देंगे।

अपने क्षेत्र में 16 वर्ष का अनुभव प्राप्त डॉ अहलूवालिया ने 1999 में एम्स नई दिल्ली से एंडोक्रिनोलॉजी से डीएम किया है। आप देश के कई बड़े अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। डाइबिटीज के क्षेत्र में आपकी खोज के लिए आपको एवार्ड भी प्राप्त हो चुका है, इसके अलावा आपके द्वारा किये गए कई शोध एवं खोज अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आर के मनी ने कहा कि हमारा हमेशा से प्रयास रहा है कि देश और दुनिया की बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं एवं चिकित्सक हमारे साथ जुड़ सकें, जिससे हम ब्रजवासियों एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकें। उसी क्रम में हमने डॉ अहलूवालिया से नयति परिवार के साथ जुड़ने का आग्रह किया जो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि अब बृज तथा आसपास के लोगों को इनकी बेहतरीन चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

डॉ (प्रो) अभय अहलूवालिया ने कहा कि नयति से जुड़ने का जब मुझे अवसर प्राप्त हुआ तो मैं मथुरा आने से खुद को रोक नहीं सका, क्योंकि यहां कार्य करते हुए मुझे ब्रज में रहने का अवसर मिलेगा जिसे मैं छोड़ना नहीं चाहता था। आज खानपान एवं अनियमित दिनचर्या की वजह से अधिकांश लोगों में डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल एवं हार्मोन्स की अनियमितता की शिकायत पायी जा रही है। अब तो गर्भवती महिलाओं में 15 प्रतिशत तक महिलाओं में डायबिटीज पायी जा रही है। इसलिए समय समय पर डाइबिटीज की जांच कराते रहना चाहिए। हार्मोन्स के संतुलित न रहने से बच्चों की लंबाई आदि पर प्रभाव पड़ता है। शरीर के हार्मोन्स यदि संतुलित रहें तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।

May 30, 2018

नयति में पैट सीटी स्कैन द्वारा कैंसर तथा अन्य बीमारियों की मिल रही सटीक जानकारी

  • 30 May, 2018

मथुरा 30 मई। नयति मेडिसिटी में पैट सीटी स्कैन द्वारा कैंसर अथवा किसी अन्य बीमारी जैसे हार्ट या न्यूरो से सम्बंधित किसी भी परेशानी की सटीक जानकारी प्राप्त की जा रही है जिससे मरीज को दिये जाने वाला इलाज और अधिक कारगर हो पा रहा है। अभी तक यह मशीन दिल्ली, मुम्बई जैसे महानगरों में ही उपलब्ध थी। पश्चिमी उ.प्र. में में पहली बार शुरू होने वाली इस मशीन के द्वारा ब्रजवासियों तथा आसपास के लोगों को अब उनके घर के पास नयति में ही बेहतरीन जांच तथा इलाज मिल रहा है, जिससे उनके समय के साथ इलाज पर होने वाले खर्च में भी काफी कमी आ रही है। यह कहना था नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आरके मनी का जो नयति में उपलब्ध पैट सीटीस्कैन के बारे में जानकारी दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमारा हमेशा से यह मानना था कि जो इलाज देश के जाने माने शहरों तक ही सीमित था वह टियर 2 एवं टियर 3 शहरों के लोगों तक भी पहुंचे, उसी क्रम में हम नयति में यह पैट सीटीस्कैन लेकर आये हैं। महानगरों में पैट सीटी स्कैन मशीन द्वारा होने वाली जांच का खर्च भी नयति में 35 प्रतिशत तक कम आता है।
नयति मेडिसिटी के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग की डायरेक्टर डॉ. संगीता टिक्कू ने पैट सीटीस्कैन के बारे में बताते हुए कहा इसके द्वारा एक बार मे ही पूरे शरीर की जांच हो जाती है जिससे शरीर के किस हिस्से में कैंसर है अथवा किस हिस्से के कैंसर की कोशिकाएं सक्रिय हैं उसका सटीक पता चल जाता है। इस मशीन द्वारा मरीज की जांच से पहले मरीज के शरीर में रेडियोएक्टिव ग्लूकोज इंजेक्ट किया जाता है उसके बाद मशीन पर लिटाकर मरीज को मशीन के अंदर भेज जाता है। इस सारी प्रक्रिया में लगभग 30 मिनट का समय लगता है।


इस मशीन द्वारा जांच के बाद कैंसर के मरीजों को दिए जाने वाला रेडिएशन कैंसर की सटीक जगह पर ही दिया जा सकेगा जिससे कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं के अलावा शरीर के किसी हिस्से पर रेडियेशन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, और कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं पर रेडिएशन का प्रभाव पड़ रहा है या नहीं यह भी इस मशीन के द्वारा पता चल सकता है जिसके बाद कैंसर का इलाज बेहतरीन तरीके से किया जा सकेगा।

May 24, 2018

नयति हैल्थकेयर मनायेगा विश्व तंबाकू निषेध सप्ताह नयति मेडिसिटी व नयति हॉस्पिटल में तंबाकू निवारण क्लीनिक की हुई शुरूआत

  • 24 May, 2018

24 मई। नयति हेल्थकेयर द्वारा तंबाकू निषेध सप्ताह मनाया जायेगा, जो 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस तक चलेगा। इस दौरान लोगों को जागरूक करने के विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा, जिसमें सप्ताह भर विभिन्न स्थानों पर निशुल्क कैम्प, नुक्कड़ नाटक, तंबाकू से होने वाले नुकसान एवं बचाव की जानकारी दी जाएंगी। इस दौरान अस्पताल परिसर में एक नयति तंबाकू निवारण क्लीनिक की शुरुआत भी की गयी, जो खासतौर से तंबाकू से पीड़ित मरीजों के लिए ही स्थापित की गयी है। आमजन तक तंबाकू के दुष्परिणामों को पहुंचाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों मे नुक्कड नाटकों का भी आयोजन किया जा रहा है।

सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत नयति परिसर से नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आरके मनी के साथ वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने सांकेतिक रूप से कैसर की मुख्य जड़ सिगरेट को तोड़ते हुए लोगों को तम्बाकू से दूर रहने की सलाह दी। हर साल तंबाकू से होने वाली जनहानी, और बढ़ते हए दुष्परिणामों को देखते हुए विश्व भर में तंबाकू से होने वाले खतरों से बचने तथा लोगों को जागरूक करने के लिए इस दिन का आयोजन हर वर्ष किया जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित डाक्टरों ने तंबाकू और धूम्रपान से होने वाली बीमारियों और उनसे बचने के उपायों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम में कैंसर रोग विभाग, श्वसन रोग विभाग, हृदय रोग विभाग, मनोचिकित्सक विभाग, न्यूरो सर्जरी विभाग, हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग, जी आई सर्जरी विभाग, यूरोलॉजी विभाग, नाक कान गला रोग विभाग, नेत्र रोग विभाग, उदर रोग विभाग, बाल रोग विभाग, ईएनटी विभाग, इंटरनल मेडिसिन विभाग एवं फिजियोथैरेपी विभाग के चिकित्सक मौजूद थे।

कार्यक्रम में नयति के सीईओ डा आर के मनी ने कहा तंबाकू और धूम्रपान आज समाज के लिए सबसे बडा खतरा है, और हम यह मानते है कि यह हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि हम इससे होने वाले खतरों के बारे में समाज के हर वर्ग को अवगत कराते हुए जागरूक कर उन्हें इसके दुष्परिणामों से बचा सकें। हम जानते है कि हमारे क्षेत्र में तंबाकू धूम्रपान का सेवन जहां लगातार बढ़ रहा तो दूसरी ओर इसके दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता की काफी कमी है जिसके कारण नयति इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

सांस संबंधी रोगियों में धूम्रपान करने वालों का प्रतिशत हमेशा अधिक रहता है। धूम्रपान की आदत हृदय रोगों को बढ़ावा देती है। रोग को बढ़ने से रोकने के लिए तंबाकू धूम्रपान को बंद करना जरूरी होता है। इसी कारण तंबाकू सेवन करने वाले लोगों में सीओपीडी, अस्थमा जैसी घातक बीमारियां अधिक पायी जातीं हैं।

नयति के कैंसर चिकित्सा विभाग के निदेशक, डॉ अमित भार्गव ने कहा कि आज के समय में कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू और धूम्रपान का सेवन है। इसी कारण लोगो में मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, आंतों का कैंसर के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। लोगों को कैंसर जैसी बीमारी से बचने के लिए तंबाकू अथवा तंबाकू से बने उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।

नयति मेडिसिटी के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. सागर लवानियां ने कहा कि तंबाकू या धूम्रपान हमारे समाज के लिये किसी अभिशाप से कम नही है लेकिन लोगों में यदि इच्छाशक्ति हो तो इस लत से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिये परिवारजनों और अपनों का सहयोग भी काफी जरूरी है।

May 19, 2018

नयति में सात माह के बच्चे के सिर में भरा पानी दूरबीन विधि द्वारा निकाला गया

  • 19 May, 2018

मथुरा 19 मई। शिकोहाबाद निवासी मनोज प्रताप सिंह का सात माह का पुत्र प्रबल जन्म से ही कई प्रकार की शारीरिक परेशानियों से जूझ रहा था, उसके सिर का आकार लगातार बढ़ता जा रहा था, आंखें घूम गयी थीं और दूध पीते ही वह उल्टी करके निकाल देता था। प्रबल के पिता ने काफी डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उसे कहीं से कोई लाभ नहीं मिलाए तब वे उसे लेकर नयति मेडिसिटी आये जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.के गुप्ता से मिले। उनके द्वारा जरुरी जांच कराने के बाद पता चला कि प्रबल के सिर में पानी भर गया है जिसकी वजह से उसको इन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैए इस बीमारी को मेडिकल भाषा में हाइड्रोसिफेलस कहते हैं। प्रबल के सिर का ऑपरेशन करके तुरंत पानी निकालने की आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद डॉ. एस के गुप्ता और उनकी टीम ने एंडोस्कोपिक थर्ड वेंट्रीक्लोस्टोमी (दूरबीन विधिद्) से बिना चीरे का ऑपरेशन करके प्रबल के सिर से पानी निकाल दिया और दिमाग में ही बाईपास करके पानी की निकासी को रास्ता खोल दिया गया।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आर के मनी ने कहा कि नयति में हर वह इलाज मौजूद है जो नयति से पहले केवल महानगरों में ही मिल पाता थाए और लोगों को मीलों लंबी यात्रा करनी पड़ती थी, जिसके कारण इलाज में होने वाले खर्च के अलावा वहां आने जाने, रहने, खाने पीने में भी काफी पैसे खर्च करने पड़ते थेए किन्तु नयति मेडिसिटी शुरू होने के बाद महानगरों में मिलने वाला इलाज नयति में ही मिल रहा है वो भी वहां से 40 प्रतिशत तक कम खर्च में।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. एस के गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर इस प्रकार सिर में भरे हुए पानी को निकालने के सिर से एक नली सिर से पेट में जोड़ दी जाती है जिससे मरीज के सिर का पानी धीरे-धीरे पेट के रास्ते खून में मिल जाता है। नयति में आज हर प्रकार की आधुनिक तकनीक तथा सुविधा मौजूद है जिसके कारण हमने प्रबल के सिर का बिना चीरे के दूरबीन विधि द्वारा ऑपरेशन करने का फैसला किया, जिसके बाद 24 घंटे में ही उसकी स्थिति में सुधार आ गया, अब वह ठीक से दूध भी पी पा रहा है और उसकी आंखें भी सामान्य हो गयी।