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July 12, 2019

मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए वरदान है बैरियाट्रिक सर्जरी

  • 12 July, 2019

ग्वालियर 9 जुलाई। मोटापा इन्सान के ऊपर कुदरत का वो कहर है जो अकेला नहीं आता बल्कि साथ में लाता है डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन, थाइराइड, घुटनों की परेशानी एसिडिटी और भी पता नहीं कितनी बीमारियां अपने साथ लाता है। मोटापा आने के बाद रुकता नहीं बल्कि दिनोंदिन बढ़ता ही जाता है और जिसकी जिन्दगी में ये आया उसका जीना मुश्किल कर देता है। इससे बचने को इन्सान क्या क्या जतन नहीं करता? जिम जाना, डाइटिंग करना, टहलना और भी पता नहीं क्या क्या, लेकिन मोटापा तो आकर ऐसा घर बसाता है कि जाने का नाम ही नहीं लेता और इससे ग्रस्त इन्सान इसे अपनी खराब किस्मत समझकर हीनभावना के साथ इसके साथ जीने को मजबूर हो जाता है।

बैरियाट्रिक सर्जरी के आने के बाद मोटापे से ग्रस्त लोगों के जीवन में एक चमत्कार होने लगा है जो लोग मोटापे को अपना प्रारब्ध मान चुके थे वे बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद अपने सामान्य वजन के साथ इतराते घूम रहे हैं और जो बीमारियां उन्हें घेरे हुई थीं उनसे भी उन्हें मुक्ति मिल गयी

नयति मेडिसिटी के आने से पहले यह केवल महानगरों के कुछ चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध थी और इसे कराने में लोगों को 3.5 लाख से 5 लाख तक खर्च करने पड़ते थे लेकिन नयति ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए और अपने ध्येय वाक्य नयति है सबके लिये“ के चलते अपने यहां इस सर्जरी को महानगरों से काफी कम दाम में करने का निर्णय लिया है। अब बहुत ही कम कीमत में मोटापे से ग्रस्त लोग नयति मेडिसिटी में अपनी सर्जरी कराकर एक सामान्य इन्सान की तरह अपना जीवन जी सकेंगे।

नयति में बैरियाट्रिक सर्जरी करने वाले डॉ. योगेश अग्रवाल इस क्षेत्र के काफी अनुभवी चिकित्सक हैं अभी तक 2500 के लगभग बैरियाट्रिक सर्जरी कर चुके डॉ. योगेश अग्रवाला नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सैस सर्जरी, बैरियाटिक एण्ड गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल सर्जरी एवं गेस्ट्रो इंटेस्टाइनल विभाग के चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक बैरियाटिक सर्जरी केवल विदेशों तथा गिने चुने कुछ बड़े शहरों में ही सम्भव थी, लेकिन मथुरा स्थित नयति मेडिसिटी तथा आगरा में नयति मेडिसेंटर में भी यह सर्जरी लगातार हो रही है और अब तक इस क्षेत्र के भी कई मरीज इस सर्जरी का लाभ उठा चुके हैं। इस क्षेत्र में मोटापे की वजह से डाइबिटीज, थाइराइड, ब्लडप्रेशर आदि बीमारियां अनियमित खानपान तथा पानी के कारण बहुतायत में पाई जाती है। मोटापा दूर करने वाली यह सर्जरी कोई नई नहीं है। भारत में यह 1998 से की जा रही है लेकिन ये अभी तक महानगरों और बड़े बड़े शहरों तक ही सीमित थी किन्तु अब नयति मेडिसिटी मथुरा और नयति मेडिसेंटर आगरा में यह उपलब्ध है। बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद कई अन्य बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के तुरन्त बाद मरीज का एक ग्राम वजन भी कम नहीं होता। पहले दो से तीन महीने में 35 से 40 किलो वजन कम होता है और उसके बाद हर महीने 4 से 5 किलो वजन कम होने लगता है 8 से 9 महीने में व्यक्ति अपना सामान्य वजन प्राप्त कर लेता है। सर्जरी के दूसरे दिन ही मरीज अपने घर चला जाता है। लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाने वाली यह सर्जरी मोटापा कम करने के अलावा कई अन्य बीमारियों से भी निजात दिलाती है।

इसके अलावा भी हमारे यहां लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से कई अन्य सर्जरियाँ भी की जाती हैं। आपको यकीन नहीं होगा कि एक छोटी सी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से एसिडिटी की शिकायत हमेशा के लिए दूर हो सकती है।

इसी तरह लोगों में यह भ्रम है कि डाइबिटीज एक लाइलाज बीमारी है लेकिन उचित चिकित्सा से यह भी पूरी तरह ठीक हो सकती है हमारे यहाँ आमाशय, हर्निया, पित्ताशय, तथा आंतों के ऑपरेशन 95 प्रतिशत तक लेप्रोस्कोपी तकनीक के माध्यम से किये जाते हैं, जिनकी वजह से मरीज दूसरे दिन ही अपने घर जा सकता है। और तो और एक हफ्ते के अन्दर मरीज अपने काम पर भी जा सकता है और पहले की तरह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।

July 9, 2019

नयति में तीमारदारों के लिये शुरू हुआ लाउंज

  • 09 July, 2019


मथुरा 6 जुलाई। नयति मेडिसिटी में मरीजों के तीमारदारों के लिए वीआईपी लाउंज का शुभारंभ नयति मेडिसिटी के सीओओ डॉ अजय अंगरीश ने फीता काटकर किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नयति ने हमेशा ही अपने यहां आने वाले मरीजों तथा उनके तीमारदारों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया है। हमारे यहां मरीजों के साथ साथ तीमारदारों के लिए भी योग आदि के कार्यक्रम चलाए जाते रहते हैं। एक ओर हम मरीज का ध्यान ध्यान रखते हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके तीमारदारों का भी ख्याल रखना अपना कर्तव्य समझते हैं। इसी क्रम में हमने आइसीयू में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए विशेष प्रकार का लाउंज तैयार कराया है, जहां उनके आराम का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा नयति हैल्थकेयर द्वारा दिये गए गोल्ड कार्ड, सिल्वर कार्ड, सीनियर सिटीजन कार्ड तथा वैल वूमेन कार्ड धारकों के लिए इस लाउंज की शुरुआत की गई है। हमारा हमेशा से उद्देश्य रहा है कि हम मरीज को बेहतरीन उपचार देने के अलावा उनके तीमारदारों को भी सभी सुविधाएं प्रदान कर सकें।

June 25, 2019

नयति में डॉक्टरों ने नहीं की ओपीडी, इमरजेंसी और आईपीडी में ही मिला मरीजों को इलाज

  • 25 June, 2019

मथुरा 17 जून। नयति मेडिसिटी में कोलकाता के डॉक्टर के साथ मरीज के परिजनों द्वारा की गई मारपीट और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही न करने के विरोध में देशभर के डॉक्टरों के साथ नयति हैल्थकेयर के सभी अस्पतालों के डॉक्टरों ने ओपीडी नहीं की।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि कोलकाता में एनआरएस हॉस्पिटल के डॉ परिभा मुखर्जी पर मरीज के तीमारदारों के द्वारा किया हुआ सामूहिक हमला बेहद निंदनीय है, और वहां की प्रदेश सरकार द्वारा इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही न करना भी काफी चिंतनीय है।

अपनी ओपीडी सेवाएं बंद करके हमको या हमारे डॉक्टरों को कोई खुशी नहीं है, लेकिन हमें ऐसा करना पड़ रहा है, जिसका हमें दुख है। जिस विश्वास के साथ मरीज अपना इलाज कराने डॉक्टर के पास आते हैं, डॉक्टर भी उसके विश्वास को टूटने नहीं देना चाहते और अपना बेहतर करके मरीज को जल्द ठीक करने का प्रयास करते हैं। डॉक्टर का काम केवल मरीज की जान बचाने का प्रयास करना है, बाकी बहुत सारी चीजें ऊपर वाले के हाथ में हैं। इस प्रकार की घटनाओं से डॉक्टरों का हौसला टूटेगा और वे किसी गंभीर हालत वाले मरीज की चिकित्सा करने में अपने हाथ खड़े कर देंगे।

डॉक्टर समाज की एक बुनियादी आवश्यकता है। अगली पीढ़ी पहले से ही स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। हम केवल गुंडागर्दी और हिंसा द्वारा इस तरह की असहिष्णु कार्यवाही का समर्थन नहीं कर सकते।

आज कोलकाता की उसी घटना की निंदा करते हुए और आईएमए और डॉक्टरों के साथ खड़े होते हुए हमने नयति मेडिसिटी मथुरा, नयति हॉस्पिटल आगरा और व्हिमांस नयति हॉस्पिटल, दिल्ली स्थित अपने सभी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं न देने का निर्णय लिया है। आपातकालीन सेवाएं और आईपीडी सेवाएं सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं।

June 21, 2019

नयति मेडिसिटी और नेफ्रोप्लस में हुई साझेदारी

  • 21 June, 2019

मथुरा 20 जून।क्षेत्र के सबसे बड़े विश्वस्तरीय अस्पताल नयति मेडिसिटी की देशभर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में डायलेसिस की सुविधाएं देने वाली नेफ्रोप्लस से साझेदारी हो गयी है। ज्ञात हो कि नेफ्रोप्लस के अबतक देश के विभिन्न अस्पतालों में 200 से अधिक डायलेसिस सेंटर हैं, जिनके माध्यम से किडनी और डायलेसिस के मरीजों की विश्वस्तरीय तकनीक और सुविधाओं के साथ डायलेसिस की जा रही है।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहाकि नेफ्रोप्लस के साथ हुई साझेदारी से हमें बेहद खुशी है। डायलेसिस के क्षेत्र में नेफ्रोप्लस काफी अच्छा काम कर रही है, जो डायलेसिस के मरीजों की बेहतर देखभाल आधुनिक एवं विश्वस्तरीय तरीकों से करने के लिए जानी जाती है। जब ये हमारे पास साझेदारी का प्रस्ताव लेकर आये तो हम इंकार नहीं कर सके। नयति शुरू करने से पहले हमने भी संकल्प लिया था कि टियर 2 और टियर 3 शहरों के मरीजों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में हर वह सुविधाएं देने का प्रयास करेंगे जिनके लिए उन्हें महानगरों का मुंह ताकना पड़ता था। मुझे पूरा विश्वास है कि नेफ्रोप्लस द्वारा डायलेसिस के मरीजों को उसी प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेगी जो नयति हैल्थकेयर प्रदान कर रहा था।

नेफ्रोप्लस के वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशन) सुकर्ण सिंह सलूजा ने कहाकि हमें नयति हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित अस्पताल के साथ साझेदारी करने पर गर्व है। हमें विश्वास है कि नेफ्रोप्लस मथुरा शहर में और उसके आसपास डायलिसिस पर आश्रित लोगों को बहुत आवश्यक राहत प्रदान करने के अलावा और अधिक गुणवत्ता के साथ डायलिसिस को सुलभ बनाएगी।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य भारत में डायलिसिस के मरीजों की देखभाल को फिर से परिभाषित करना है। हम तेजी से अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। हमने इस वर्ष देश भर में 50 से 60 डायलेसिस केंद्र खोलने की योजना बनाई है।

नयति मेडिसिटी के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर डॉ के एम साहु ने कहाकि नयति में हर महीने 1800 से अधिक मरीजों की डायलेसिस की जा रही है। डायलेसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जो एक बार शुरू हो जाये तो उम्र भर करानी पड़ती है, इसलिये लोगों को इससे बचने के लिए अपनी किडनी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 35 वर्ष की उम्र के बाद हर साल अपनी किडनी की जांच कराते रहना चाहिये, और किडनी में जरा सी भी कमी का पता चलने पर तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए।

पत्रकार वार्ता में नयति मेडिसिटी मथुरा तथा नयति हॉस्पिटल आगरा के सीओओ डॉ अजय अंगरीश तथा नयति मेडिसिटी के यूरोलोजिस्ट डॉ हर्ष गुप्ता प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

June 12, 2019

नयति में दो दिन के बच्चे की रीढ़ की हड्डी पर नसों से उलझी हुई गांठ का हुआ सफल ऑपरेशन

  • 12 June, 2019

नयति स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग बना एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर

मथुरा 7 जून। टूंडला निवासी बॉबी ने रेलवे हॉस्पिटल, टूंडला में बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद डॉक्टरों ने देखा कि बच्चे की पीठ के निचले हिस्से में काफी बड़ा फोड़ा है, जो बच्चे के जीवन के लिये काफी खतरनाक है। यह पता चलने पर बच्चे के परिजन उसके इलाज के लिये नयति मेडिसिटी लेकर आये, जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव और डॉ विमल कुमार ने बताया कि जब बच्चा हमारे यहां लाया गया था तो वह सिर्फ एक दिन का था। उसकी पीठ पर बहुत बड़ी गांठ दिखाई पड़ रहा था, पर उस गांठ के अलावा बच्चे के शरीर की अन्य परेशानियों को जानने के लिए बच्चे की अल्ट्रासाउंड तथा एमआरआई करने की जरूरत थी, उसमें भी काफी चैलेंज था। बच्चे की एमआरआई केवल एनेस्थीसिया देकर ही की जा सकती थी, और बच्चे को एनेस्थीसिया भी बार बार नहीं दी जा सकती, इसलिए हमने तय किया कि बच्चे को केवल एक बार ही एनेस्थीसिया देंगे और वहीं उसकी अल्ट्रासाउंड, एमआरआई (ब्रेन और स्पाइन) की रिपोर्ट को देखकर तुरंत उसका ऑपरेशन कर देंगे।

एमआरआई की रिपोर्ट देखकर पता चला कि बच्चे गांठ में पानी भरा हुआ है और दिमाग तक जाने वाली नसें आपस में काफी उलझी हुई हैं, इसके अलावा बच्चे के दिमाग में भी पानी भरा था। हमने सबसे पहले बच्चे के दिमाग से पानी निकालने के लिए बच्चे के सिर से पेट तक वीपी शंट डाला और उसके बाद गांठ का ऑपरेशन करके उलझी हुई नसों को ठीक कर दिया। दो दिन पीडियाट्रिक आइसीयू में रखने के बाद बच्चे को वापस घर भेज दिया। इस बच्चे के ऑपरेशन में हमारे यहां मौजूद एक ही छत के नीचे सभी सुविधाओं का काफी योगदान रहा, इनकी वजह से हमारा समय बिल्कुल खराब नहीं हुआ और हम बच्चे की सफल सर्जरी कर पाए।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो फिजिशियन डॉ नीलेश गुप्ता ने बताया कि इस तरह की परेशानी को मेडिकल भाषा में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं, जो फोलिक एसिड (एक प्रकार का विटामिन बी) की कमी से होती है। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचने का सबसे आसान तरीका प्रेगनेंसी से पहले या प्रेगनेंसी के दौरान सही मात्रा में फोलिक एसिड का सेवन होता है। गर्भवती महिलाओं को समय समय पर अपनी तथा अपने बच्चे की जांच योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञ से कराते रहना चाहिये। जागरूकता की कमी अथवा लापरवाही से ही इस तरह की परेशानी होती है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि हमारे यहां का न्यूरो सर्जरी विभाग एक बेहतरीन एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर है। नेशनल हाइवे पर होने के कारण हमारे यहां ट्रॉमा के मरीज अक्सर आते रहते हैं। ट्रॉमा के मरीज को इलाज की तत्काल जरूरत होती है और मरीज को न्यूरो सर्जरी के अलावा ब्लड बैंक, ऑर्थोपेडिक, कार्डियक, जीआइ सर्जरी आदि अन्य विभागों की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसके लिए हमारे यहां के हर विभाग में 24ग्7 डॉक्टर उपस्थित रहते ही हैं।

नयति स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग में अब मथुरा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज करा रहे हैं। लोगों का नयति पर बढ़ता विश्वास हमारे यहां के देश के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय सुविधाओं के कारण ही संभव हो पाया है। हमारे यहां अब तक 2 दिन के बच्चे से 96 वर्ष के बुजुर्ग की सफल न्यूरो सर्जरी हो चुकी है।

May 28, 2019

नयति में 71 वर्षीय बुजुर्ग के पेट से निकाली 7 किलो की सिस्ट

  • 28 May, 2019

मथुरा 25 मई। 71 वर्षीय बहोरन सिंह पिछले 5 साल से पेट के भारीपन से परेशान थे। इसे वह पेट में गैस आदि की सामान्य समस्या समझ कर अपना इलाज करा रहे थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से तो उन्हें खानेपीने में भी दिक्कत होने लगी, यहां तक कि कुछ भी खाते ही वह उल्टी द्वारा निकल जाता था। अपनी इसी परेशानी के साथ वह नयति पहुंचे और डॉक्टरों ने जांच करने पर पाया कि उनके पेट में काफी बड़ी गांठ है, जिसे निकालने की जरूरत है। परिवार की सहमति के बाद उनके पेट से सफलतापूर्वक सिस्ट निकाल दी गयी।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अजय अग्रवाल और डॉ सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि बहोरन की जांच में जो सिस्ट पता चली उसे मेडिकल साइंस में लाइपोसर्कोमा नाम की बीमारी कहते हैं, जिसमें पेट की चर्बी में अंदर की ओर गांठ पड़ जाती है जो लगातार बढ़ती रहती है। यह बीमारी बहुत ही कम लोगों में पायी जाती है। बहोरन के पेट में काफी बड़ी सिस्ट थी, जो पेशाब की नली, छोटी – बड़ी आंत, खून की नालियों तथा पेट के अंदर कई और अंगों से चिपकी हुई थी, जिसे सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद निकाली गयी सिस्ट का वजन 7 किलो था।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ योगेश अग्रवाला ने कहा कि नयति के जीआई सर्जरी विभाग में काफी अनुभवी डॉक्टरों की टीम विश्वस्तरीय तकनीक के साथ मौजूद है, जहां हर्निया, एपेंडिक्स, पित्त की थैली और नली की सर्जरी, छोटी-बड़ी आंतों की सर्जरी के अलावा पेट से संबंधित हर तरह की सर्जरी की जा रही हैं, और तो और हमारे यहां 176 से ज्यादा मोटापा कम करने वाली बैरियाट्रिक सर्जरी भी की जा चुकी हैं। यह सभी सर्जरी लैप्रोस्कोपी सर्जरी के माध्यम से की जाती हैं, जिसमें मरीज दूसरे दिन ही अपने घर वापस चला जाता है। नयति में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मौजूद होने से मरीज के इलाज में सहूलियत मिलती है।

अपना ऑपरेशन कराने वाले बहोरन सिंह ने कहा कि नयति आने से पहले मेरा पेट काफी फुला हुआ रहता था, लगता था कि पेट पर कोई वजन रखा हुआ है। तीन चार दिन में एक बार शौच जा पाता था। ऑपरेशन के बाद मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं और ठीक से खापी भी रहा हूं।

सर्जरी करने वाली टीम में डॉ शिव कुमार यादव और डॉ परमेश्वर वीजी का विशेष योगदान रहा।

May 7, 2019

स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए नयति को मिले अवार्ड

  • 07 May, 2019

5 मई। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के द्वारा दोपुरस्कारों से नवाजा गया है। उन्हें स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये जा रहे अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए टियर 2 और टियर 3 शहरों में सुपर स्पेशियलिटीइलाज पहुंचाने के लिए एक्सीलेंस इन मल्टी स्पेशियलिटी टर्शरी केयर हॉस्पिटल अवार्ड तथा एक्सीलेंस इन सीएसआर इनिशिएटिव अवार्ड देकरसम्मानित किया गया।

ज्ञात हो कि नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने विश्वस्तरीय तथा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को टियर 2 तथा टियर 3 शहरों तक पहुंचाने काकार्य किया है, जिसके अंतर्गत उनके द्वारा मथुरा में शुरू किए गए पहले हॉस्पिटल नयति मेडिसिटी में आज स्वास्थ्य संबंधी हर वो सेवा उपलब्ध है जोनयति से पहले देश के गिने चुने बड़े तथा महानगरों में ही उपलब्ध थी। बिजनेस वर्ल्ड मैग्जीन द्वारा हर वर्ष स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वालेलोगों को इस प्रकार के अवार्ड से नवाजा जाता है।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि बिजनेस वर्ल्ड द्वारा दिये गए इन दोनों एवार्ड्स के लिए मैं आयोजकों का तहेदिलसे शुक्रिया अदा करती हूं।

May 7, 2019

देश के जाने माने कार्डियक सर्जन डॉ. मोहंती बने नयति का हिस्सा

  • 07 May, 2019

मथुरा 3 मई 2019।हृदय की दस हजार से अधिक सर्जरी कर चुके देश के जाने माने कार्डियक सर्जन डॉ. विक्रम केशरी मोहंती अपने 25 वर्षों से अधिकअनुभव के साथ अब नयति मेडिसिटी का हिस्सा बन गए हैं। नयति में डॉ. मोहंती हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। नयतिमेडिसिटी से पहले डॉ. मोहंती सफदरजंग, अपोलो, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, द हार्ट सेंटर, जे पी हॉस्पिटल, तिरुमाला हॉस्पिटल, कामिनेनी मेडिकल कॉलेजएंड हॉस्पिटल तथा हॉस्पिटल ऑफ शाल्बी ग्रुप जैसे देश के विभिन्न अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, तथा आप देश के उन गिने चुने कार्डियक सर्जनमें से एक हैं जिन्हें किसी भी उम्र (नवजात शिशु से बुजुर्ग तक) के मरीज की कार्डियक सर्जरी करने में महारथ हासिल है। उनके नयति से जुड़ने के बाद ब्रजतथा आसपास के लोगों को भी काफी लाभ प्राप्त हो सकेगा। एमबीबीएस, एमएस (जनरल सर्जन), डीएनबी (सीटीवीएस सर्जरी) कर चुके डॉ मोहंती कोकॉम्प्लेक्स बाईपास, बीटिंग हार्ट सर्जरी, री-डू सर्जरी, टोटल ऑर्टरियल रिवाइसक्लाइजेशन, अवेक सर्जरी, कैरोटिड एंडेक्टेक्टॉमी, संयुक्त बाईपास, सिंगलडबल और ट्रिपल वॉल्ब रिप्लेसमेंट, छोटे बच्चों के हृदय सर्जरी के अलावा हृदय संबंधी हर प्रकार की सर्जरी का अनुभव प्राप्त है। आपके द्वारा किये गएकई शोध राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी प्रकाशित हो चूके हैं।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि पिछले 3 वर्षों में हमने देखा कि हमारे हृदय रोग विभाग में बच्चों से लेकर बुजुर्गोंतक हर उम्र के मरीज आ रहे हैं। नयति स्थित कार्डियक सेंटर इस क्षेत्र का सबसे बेहतरीन और विश्वस्तरीय कार्डियक सेंटर है, जहां बेहतरीन संसाधनों केसाथ देश के जाने माने चिकित्सक मौजूद हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि डॉ मोहंती के नयति परिवार से जुड़ने के बाद नयति में आने वाले हृदय रोगियों कोऔर अधिक लाभ मिल सकेगा।

इस अवसर पर डॉ. विक्रम केशरी मोहंती ने कहा कि काफी समय तक मैं देश के कई जाने माने अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं, जैसे ही मुझे ब्रज मेंआने का सौभाग्य प्राप्त हुआ मैं खुद को यहां आने से रोक नहीं पाया। देखा जाय तो आज विश्वस्तरीय इलाज की सबसे ज्यादा जरूरत टियर 2 और टियर 3शहरों के लोगों को ही है। ब्रज में आकर इस क्षेत्र के बड़े अस्पताल नयति से जुड़कर मुझे ब्रजवासियों की सेवा करने का अवसर मिलेगा यह सोचकर खुद कोगौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।

April 23, 2019

नयति हैल्थकेयर करेगा वैल वुमेन्स क्लब का शुभारंभ

  • 23 April, 2019

मथुरा 21 अप्रैल। महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सजग करने के लिए नयति हैल्थकेयर वैल वुमेन्स क्लब की शुरुआत करेगा।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा, “महिलाओं का समाज में विशेष योगदान रहता है। घर हो या बाहर.. महिलाएं हर जगह अपना कामपूरी जिम्मेदारी के साथ बखूबी निभाती हैं, किन्तु इन सारी जिम्मेदारियों को निभाते हुए वे खुद का ध्यान नहीं रख पातीं। महिलाओं में अपने स्वास्थ्य कोलेकर जागरूकता फैलाने के लिए हम वैल वूमेन क्लब का शुभारंभ करने जा रहे है। वैल वुमेन्स क्लब की सदस्य महिलाओं को नयति हैल्थकेयर द्वारासंचालित किसी भी अस्पताल में इलाज कराने पर ओपीडी, विभिन्न जांचों अथवा भर्ती होने पर विशेष छूट दी जाएगी, इसके अलावा समय समय पर क्लबकी सदस्यों के लिए स्वास्थ्य संबंधी कैम्प और जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। हमारा उद्देश्य है कि समाज में महिलाएं अपने स्वास्थ्य केप्रति सजग रहें और बीमारी बढ़ने से पहले अपना ईलाज कराएं।”

मथुरा में महिलाएं इस क्लब का रजिस्ट्रेशन मंगलवार २३ अप्रैल सुबह ११ बजे से १ बजे तक करवा सकती हैं।

April 12, 2019

नयति में एमबीबीएस डॉक्टर प्राप्त कर सकेंगे डीएनबी की डिग्री

  • 12 April, 2019

मथुरा, 11 अप्रैल 2019। क्षेत्र का पहला विश्वस्तरीय मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नयति मेडिसिटी में अब एमबीबीएस डॉक्टर डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत नैशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) द्वारा डीएनबी उपाधि उन उम्मीदवारों को दिया जाता है जो सफलतापूर्वक पोस्ट ग्रेजुएट या पोस्ट डॉक्टोरल मेडिकल पढ़ाई को पूरी करते हैं। अस्पतालों में विशेषज्ञ की कमी को दूर करने के लिए अब कुछ प्राइवेट अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए मंजूरी दी गई है। गौरतलब है कि एनबीई के डीएनबी पाठ्यक्रम को एमडी और एमएस के बराबर ही मान्यता है। एमडी-एमएस की तरह एमबीबीएस करने के बाद यह कोर्स विशेषज्ञता के लिए किया जाता है।

अभी नयति में इंटरनल मेडिसिन, एनेस्थिसियोलॉजी तथा इमयोनोहेमाटॉलजी और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के क्षेत्र में डीएनबी कराया जाएगा, और आने वाले समय में जनरल सर्जरी, क्रिटिकल केयर, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, मेडीकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी तथा नेफ्रोलॉजी में भी डीएनबी कराया जाने लगेगा। इसके अलावा नयति द्वारा मिनिमल एक्सेस सर्जरी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के लिए फेलोशिप नेशनल बोर्ड के लिए भी आवेदन कर दिया है।

इस अवसर पर नयति हेल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि देश में पहले ही डॉक्टरों की काफी कमी है और विशेषज्ञ डॉक्टर तो केवल महानगरों में ही हैं। टियर 2 और टियर 3 शहरों के लोगों को तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधाएं प्राप्त करने के लिए जूझना ही पड़ता है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन द्वारा डीएनबी की मान्यता मिलना स्वास्थ्य सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह मान्यता मिलना हमारे लिये गौरव की बात है। इस मान्यता को प्राप्त करने के लिए किसी भी संस्थान को कड़े मापदंडों से गुजरना पड़ता है। हमें अपने चिकित्सकों, हमारे सलाहकारों तथा विश्वस्तरीय सुविधाओं पर गर्व है, जिनकी वजह से हम यह मान्यता प्राप्त कर सके। हमारे पास पहले से ही क्रिटिकल केयर मेडिसिन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा की 4 सीटों और क्रिटिकल केयर नर्सिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के लिए 4 सीटों के लिए आईएससीसीएम की मान्यता है। हम न केवल टियर 2 और 3 शहरों में क्वार्टरनेटरी केयर इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं, बल्कि अगली पीढ़ी के विशेषज्ञ चिकित्सक को भी सक्षम और विकसित कर रहे हैं।