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September 12, 2019

नयति में गंभीर हालत में आई गर्भवती महिला को मिला नया जीवन

  • 12 September, 2019

मथुरा 9 सितंबर। होडल निवासी 22 वर्षीय आशा का प्रसव के समय एक निजी अस्पताल में बच्चे के साथ गर्भाशय बाहर आ गया, जिसके बाद उनकी स्थिति काफी बिगड़ गयी, स्थिति खराब होने के बाद उनके परिजन शहर के कई अस्पतालों में आशा को लेकर गए किन्तु प्रत्येक अस्पताल ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया, यहां तक कि दो अस्पतालों ने तो आशा को मृत तक घोषित कर दिया था, जिसके बाद आशा के परिजन उसे नयति लेकर आये, और नयति में मिले इलाज के बाद आशा और उसके बच्चे की जान बच सकी।

नयति मेडिसिटी में आशा का इलाज करने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ निधी अग्रवाल ने बताया कि जब आशा हमारे पास इमरजेंसी विभाग में आई थीं तब उनका गर्भाशय शरीर के बाहर निकला हुआ था, जिसके चलते उनके शरीर से काफी मात्रा में खून बह जाने के कारण शरीर में खून की भी काफी कमी हो गयी थी। उनकी नब्ज नहीं चल रही थी, और बीपी भी नहीं था। उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए आईसीयू में स्टेबल करने के बाद 30 मिनट के अंदर ही उन्हें ऑपरेशन थियेटर में शिफ्ट कर दिया, जहां हमने बिना किसी चीरफाड़ के उनके गर्भाशय को अंदर कर अन्य आवश्यक उपचार किया। उन्हें तत्काल खून चढ़ाने की जरूरत थी, और नयति में ही ब्लड बैंक होने के कारण उनको खून चढ़ाने के लिए हमें समय खराब नहीं करना पड़ा, और उन्हें 16 यूनिट खून चढ़ाया जा सका। अस्पताल में कुछ दिन आईसीयू में डॉक्टरों की टीम की निगरानी में रखने के बाद हमने उनको घर भेज दिया। अब वे बिल्कुल स्वस्थ हैं।

नयति के स्त्री रोग विभाग की डायरेक्टर एवं विभाग प्रमुख डॉ शालिनी अग्रवाल ने कहा कि समाज में महिलाओं का विशेष योगदान होता है और स्वस्थ मां से ही स्वस्थ बच्चा होगा और स्वस्थ बच्चे से ही भविष्य का स्वस्थ समाज बन सकता है। महिलाएं ही समाज में एकमात्र हैं जो पूरे साल 24X7 बिना कोई छुट्टी लिए काम करती हैं। टियर 2 एवं टियर 3 शहरों की महिलाओं में जागरूकता और अच्छे अस्पतालों की कमी के चलते स्थिति और भी ज्यादा खराब है, जिसे देखकर मन काफी विचलित होता है।

नयति का स्त्री रोग विभाग इस क्षेत्र का सबसे बेहतरीन एवं अत्याधुनिक स्त्री रोग विभाग है, जहां विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ देश की बेहतरीन डॉक्टरों की टीम मौजूद है। अक्सर देखा जाता है कि नयति में अक्सर कई अस्पतालों से निराश होने के बाद और काफी उम्मीदों के साथ मरीज आते हैं, जिनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी होती है। नयति में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं होने और 24X7 अनुभवी डॉक्टरों की टीम की वजह से हम अपने यहां आने वाले मरीजों का इलाज बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

September 9, 2019

देश की विख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ शालिनी अग्रवाल बनी नयति मेडिसिटी का हिस्सा

  • 09 September, 2019

मथुरा 4 सितंबर। दिल्ली तथा देश के कई शहरों के नामी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे चुकीं डॉ शालिनी अग्रवाल अब नयति मेडिसिटी का हिस्सा बन गयी हैं। डॉ शालिनी अग्रवाल नयति हॉस्पिटल में स्त्री रोग विभाग की डायरेक्टर एवं विभाग प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान करेंगीं। आपको स्त्री रोगों के निदान का 30 वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है, तथा आपके द्वारा महिलाओं से सम्बंधित रोगों पर किये गए कई शोध एवं खोज कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रकाशित हो चुके हैं।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि स्वस्थ महिलाओं से ही स्वस्थ समाज की कल्पना की जा सकती है। हमारे यहां का स्त्री रोग विभाग क्षेत्र का सबसे बेहतरीन एवं अत्याधुनिक स्त्री रोग विभाग है, जहां 24X7 वरिष्ठ एवं अनुभवी चिकित्सकों की टीम मौजूद है। हमारे इस विभाग में हाई रिस्क प्रेगनेंसी, डिफिकल्ट लेबर एवं कॉम्प्लिकेटेड डिलीवरी, लेबर रूम एवं बर्थिंग सुइट, कंप्लीट एंटी नेटल केयर, बांझपन का इलाज, दूरबीन के माध्यम से सर्जरी एवं स्त्रियों से संबंधित कैंसर सर्जरी आदि हर प्रकार की सुविधाएं मौजूद हैं।

हमारे यहां कई महिला मरीज गंभीर अवस्था में आ रही हैं जिन्हें हमारे यहां के डॉक्टरों द्वारा उन्हें फिर से नया जीवन दिया गया।हमारे यहां ब्रज क्षेत्र के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि अन्य राज्यों से भी महिला मरीज अपना इलाज कराने आती हैं। इलाज के बाद घर जाते समय उनके चेहरे की खुशी देखकर मन को काफी सुकून मिलता है। हमारे यहां के स्त्री रोग विभाग में डॉ प्रीति भदौरिया, डॉ निधि अग्रवाल, डॉ तन्वी राज, डॉ निशा मुंजाल, डॉ नेहा गर्ग, डॉ नेहा अग्रवाल और डॉ संदीप कौर 24X7 अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ शालिनी के नयति परिवार में आने का मैं स्वागत करती हूं और मुझे पूरा भरोसा है कि इनके अनुभव का लाभ हमारे स्त्री रोग विभाग के अलावा क्षेत्र के लोगों को भी प्राप्त होगा।

नयति मेडिसिटी के स्त्री रोग विभाग की डायरेक्टर एवं विभाग प्रमुख डॉ. शालिनी ने कहा कि काफी समय तक मैं दिल्ली एनसीआर के जाने माने अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं, जहां महसूस होता था कि देश के टियर 2 एवं टियर 3 शहरों में हैल्थकेयर की स्थिति काफी खराब है। महिलाओं में जागरूकता की कमी के चलते भी स्वास्थ्य संबंधी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक आंकड़े के अनुसार उत्तरप्रदेश में मातृत्व मृत्यु दर सबसे अधिक है, जिसमें कमी लाना भी एक चुनौती है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नयति हैल्थकेयर एक ऐसा नाम है जो टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। देखा जाय तो आज विश्वस्तरीय इलाज की सबसे ज्यादा जरूरत टियर 2 और टियर 3 शहरों के लोगों को ही है। ब्रज में आकर इस क्षेत्र के बड़े अस्पताल नयति से जुड़कर मुझे ब्रजवासियों की सेवा करने का अवसर मिलेगा यह सोचकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ।

August 13, 2019

उत्तर भारत का सबसे बड़ा और विश्वसनीय एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर बना नयति मेडीसिटी

  • 13 August, 2019

पहले घंटे (गोल्डन ऑवर) के अंदर उचित इलाज शुरू होने पर बच सकती है मरीज की जान

मैनपुरी 10 अगस्त। नयति मेडिसिटी के न्यूरोसाइंस विभाग में न्यूरो सर्जरी और न्यूरोलॉजी से संबंधित हर प्रकार की चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जहां अब तक 2 दिन के बच्चे से लेकर 96 साल के बुजुर्ग के अलावा सैकड़ों मरीजों की न्यूरो सर्जरी अथवा चिकित्सा सफलतापूर्वक की जा चुकी है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि दिल्ली के व्हिमांस और नयति की साझेदारी के बाद न्यूरो के मरीजों के लिए वही विश्वस्तरीय तकनीक एवं चिकित्सा नयति मेडिसिटी मथुरा में भी दी जा रही है और अब नयति उत्तर भारत का सबसे बड़ा न्यूरो सेंटर बन गया है।

हमारे यहां का न्यूरोलॉजी विभाग एक बेहतरीन एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर है, और हर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर को ठीक करने में सक्षम है। ब्रेन स्ट्रोक में प्रति सेकंड 32 हजार कोशिकाएं नष्ट होती हैं और हम सोचने में ही वक्त बिता देते है। त्वरित उपचार से न केवल मरीज की जान बचने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, बल्कि उसका इलाज भी बेहतर हो पाता है। हमारे न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेन से लेकर स्पाइन तक हर प्रकार की चिकित्सा तथा सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही है। नेशनल हाइवे पर होने के कारण हमारे यहां ट्रॉमा के मरीज भी अक्सर आते रहते हैं। ट्रॉमा के मरीज को इलाज की तत्काल जरूरत होती है और मरीज को न्यूरो सर्जरी के अलावा ब्लड बैंक, ऑर्थोपेडिक, कार्डियक, जीआइ सर्जरी आदि अन्य विभागों की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसके लिए हमारे यहां के हर विभाग में 24ग्7 डॉक्टर उपस्थित रहते ही हैं।

नयति स्थित न्यूरो विभाग में अब मथुरा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज करा रहे हैं। लोगों का नयति पर बढ़ता विश्वास हमारे यहां के देश के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय सुविधाओं के कारण ही संभव हो पाया है।“

नयति के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि समय के साथ न्यूरो साइंस ने भी काफी तरक्की की है। एंडोस्कोपी ब्रेन सर्जरी, एंडोस्कोपी स्पाइन सर्जरी, माइक्रो न्यूरो सर्जरी, कॉम्प्लेक्स स्पाइन सर्जरी आदि अन्य सभी प्रकार की सर्जरी हो रही हैं। न्यूरो आईसीयू और पीडियाट्रिक आईसीयू होने से हमारे यहां न्यूरो से संबंधित मरीजों की बेहतर देखभाल हो पाती है। ब्रेन ट्यूमर के कई मरीजों को रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है, हमारे यहां न्यूरो रेडियोथेरेपी की सुविधा होने से मरीजों को ऑपरेशन कराने के बाद कहीं और नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी और न्यूरो रीहबिलिटेशन जैसी भी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

हमारे यहां अभी एक दिन के बच्चे की रीढ़ की हड्डी पर उलझी हुई नसों की गांठ का सफल ऑपरेशन किया गया। अभी हाल ही में हरियाणा के जींद के एक बच्चे (जिसका कुल वजन 8 किलो था, जिसमें से 5 किलो वजन केवल उसके सिर का था) का भी सफल ऑपरेशन किया गया।

नयति मेडिसिटी के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ नीलेश गुप्ता ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) के लक्षण (मुँह का टेढ़ापन, बाजू में सूनापन या कमजोरी, बोलने में दिक्कत, मिर्गी, सिरदर्द, याददाश्त की परेशानी, हाथ पैरों में झनझनाहट, शरीर के अंग का सुन्न हो जाना, शरीर का बैलेंस और कंपन, दिमागी बुखार) आदि अन्य न्यूरो संबंधी परेशानियां होने पर किसी योग्य न्यूरो फिजिशियन को दिखाना चाहिए। किसी भी मरीज का स्ट्रोक आने के बाद यदि पहले घंटे (गोल्डन ऑवर) के अंदर उचित इलाज शुरू हो जाये तो मरीज भविष्य में होने वाली परेशानी से बच सकता हमारे यहां कई मरीज इन परेशानियों के साथ आये और बिल्कुल ठीक होकर गए हैं।

August 13, 2019

नयति मेडिसिटी मथुरा द्वारा स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) एवं मस्तिष्क रोग जांच शिविर

  • 13 August, 2019

मथुरा 10 अगस्त। नयति मेडिसिटी में आज स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) एवं मस्तिष्क रोग जांच शिविर लगाया जा रहा है। इस शिविर में आप अपनी जांच करवा सकते हैं।

शिविर में रीढ़ की हड्डी में टेडापन, रीढ़ की हड्डी का टी बी, रीढ़ की हड्डी का इंफेक्शन और रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर एवं हर तरह की न्यूरो से संबंधित परेशानी के लिये आ सकते हैं।

शिविर में नयति मेडिसिटी के न्यूरो रोग विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव (वरिष्ठ न्यूरो सर्जन) एवं डॉ नीलेश गुप्ता (वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन) रविवार 11 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपनी सेवाएं देंगे।  शिविर में आप ब्लड प्रेशर, रैंडम ब्लड शुगर के अलावा प्लेन एम आर आई एवम् प्लेन सी टी स्कैन पर (डॉक्टर के सलाह पर) 50 प्रतिशत डिस्काउंट और अन्य जांचों पर 20 प्रतिशत की छूट मिल सकेगी।

August 1, 2019

क्षेत्र में पहली बार नयति मेडिसिटी में हुआ सफल एल्बो (कोहनी) प्रत्यारोपण

  • 01 August, 2019

मथुरा 31 जुलाई। क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में हड्डी रोगों से संबंधित हर तरह का उपचार किया जा रहा है, जहां अब तक सैकड़ों की तादात में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट भी किये जा चुके हैं। देश के जानेमाने चिकित्सकों एवं बेहतरीन तकनीक के कारण नयति का ऑर्थोपेडिक विभाग सफलता के नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। अभी हाल ही में नयति मेडिसिटी में सफलतापूर्वक कोहनी का प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में कोहनी का प्रत्यारोपण एक बहुत ही जटिल सर्जरी है जो देश के गिने चुने सर्जनों द्वारा ही की जाती है।

नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि नयति मेडिसिटी का हर विभाग स्वास्थ्य के क्षेत्र अहम भूमिका निभा रहा है, और लोगों के हमारे ऊपर बढ़ते विश्वास से हमें काफी खुशी मिलती है। हमारे यहां के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय तकनीक के कारण ही हम क्षेत्रवासियों को महानगरों में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं दे पा रहे हैं। एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं होने से मरीज के इलाज में समय भी नहीं लगता और डॉक्टर भी अपना काम बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

10 हजार से अधिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट कर चुके देश के जाने पहचाने नयति मेडिसिटी के ऑर्थोपेडिक विभाग के चेयरमैन डॉ राजीव शर्मा ने बताया कि कमलेश देवी अपनी कोहनी की तकलीफ से काफी समय से परेशान थीं, उन्होंने कई जगह अपना इलाज कराया लेकिन उन्हें सन्तुष्टि न मिल सकी। जब वे हमारे पास आयीं तो पता चला कि उनकी कोहनी ठीक से काम नहीं कर रही जिसके प्रत्यारोपण की जरूरत है। कोहनी शरीर का वह भाग है जो त्वचा के बिल्कुल नीचे होती है और काफी सारी मसल्स से घिरी होती है, जिसमें ड्राइसेल्स मसल्स कोहनी को सीधा रखने में मदद करती है। इस तरह की परेशानी वाले मरीजों की हड्डियां भी काफी कमजोर होती है, जिसके कारण उनके टूटने और चटकने का खतरा भी हमेशा बना रहता है। कोहनी के आसपास नसों का जाल बिछा होता है, जिसकी वजह से कोहनी को अपनी जगह से हटाना और फिर दोबारा लगाना भी एक बहुत ही बड़ा काम है, जिसे करने के लिए काफी अनुभव की जरूरत है। हमारे शरीर में 10 हजार से ज्यादा जोड़ हैं, जिसमें एल्बो ज्वाइंट सबसे मुश्किल ज्वाइंट होता है। आर्टिफिशियर सरफेस द्वारा एल्बो को ह्यूमरस और अल्ना के साथ काफी एहतियात के साथ जोड़ा गया, जिससे कि वह अच्छी तरह से काम कर सके। ऑपरेशन के बाद हाथ में एल्बो को सहारा देने के लिए एक सपोर्ट लगाया गया जिसे कुछ दिनों बाद हटा दिया गया। आने वाले समय में कमलेश देवी सामान्य जीवन जी सकेंगी।

August 1, 2019

दुर्घटना में बुरी तरह घायल महिला के सिर की सीवियर इंजरी और लकवाग्रस्त चेहरे का नयति में हुआ सफल इलाज

  • 01 August, 2019

मथुरा 30 जुलाई। दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने से सिर में गंभीर चोट के साथ नयति में पहुंची महिला का न्यूरो सर्जरी विभाग और ईएनटी विभाग के डॉक्टरों द्वारा सफल ऑपरेशन कर नया जीवन दिया।

राया निवासी विमला देवी का मोटरसाइकिल से जाते वक्त एक्सीडेंट हो गया, जिसके बाद वे मौके पर ही बेहोश हो गयीं। उनके सिर तथा चेहरे पर काफी चोट थी। उनके परिजन उन्हें नयति अस्पताल लेकर आये, जहां न्यूरो सर्जरी विभाग और ईएनटी विभाग द्वारा उनके सिर की सर्जरी और मुंह के टेढ़ेपन का इलाज कर दिया गया।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव और डॉ विमल कुमार ने बताया कि दुर्घटना के बाद विमला देवी काफी गंभीर स्थिति में हमारे पास लायी गयी थीं। जांच करने पर पता चला कि उनके सिर के पिछले भाग में फ्रेक्चर है और दिमाग में काफी क्लॉट जमा हो गए थे, जिसका ऑपरेशन करने की तुरंत आवश्यकता थी। हमने उनके सिर का ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर दिया। उनके दिमाग से जाने वाली सातवीं नस फेशियल नर्व हड्डी में फंस गई है, जिसके कारण उनके मुंह पर टेढ़ापन आ गया था, जिसके लिए हमने उन्हें नयति के ही ईएनटी विभाग भेज दिया।

नयति मेडिसिटी के ईएनटी विभाग प्रमुख डॉ मनीष जैन ने बताया कि हमने जब विमला देवी की जब जांच की तो पता चला कि दुर्घटना के कारण इनकी फेशियल नर्व (चेहरे की नस) पर काफी दवाब पड़ रहा है और उस नस में उनकी टूटी हुई हड्डियों के टुकड़े फंस गए हैं, जिसके कारण उस नस का कार्य ना के बराबर हो रहा था।

परिजनों की सहमति के बाद हमने उनकी नस पर पड़ रहे दवाब को हटाकर नस में धंसे हुए हड्डियों के टुकड़ों को हटा दिया। अब विमला देवी की स्थिति में काफी सुधार है और धीरे धीरे ये बिल्कुल ठीक हो रही हैं।

विमला देवी के पति ने बताया कि नयति में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं होने से मेरी पत्नी का समय पर और सही इलाज हो सका। नयति में स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग, ईएनटी विभाग के डॉक्टरों और उनकी टीम द्वारा किये गए ऑपरेशन के बाद इनके सिर की चोट सही हो गयी, आंख भी बंद होने लगी है और मुंह का टेढ़ापन भी काफी हद तक कम हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार समय के साथ और भी सुधार आ जायेगा, और ये ठीक हो जाएंगी।

July 26, 2019

नयति में नोएडा के 3 माह के बच्चे की स्पाइन पर हुए नसों के गुच्छे का हुआ सफल ऑपरेशन

  • 26 July, 2019

मथुरा 26 जुलाई। ग्रेटर नोएडा निवासी भुवी ने 3 माह पूर्व बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद पता चला कि बच्चे की पीठ के निचले हिस्से में एक ट्यूमर है जिसके लिए उसे दवा आदि दी जाने लगी। काफी इलाज होने के बाद भी ट्यूमर ठीक नहीं हुआ बल्कि वो लगातार बढ़ता जा रहा था, जिसके बाद डॉक्टरों ने बच्चे की एमआरआई करायी तो पता चला कि बच्चे के ट्यूमर में पानी भरा हुआ है और दिमाग तक जाने वाली नसें आपस में काफी उलझी हुई हैं, जिसका ऑपरेशन कराने की जरूरत थी। उन्होंने दिल्ली और नोएडा के कई अस्पतालों में अपने बच्चे को दिखाया लेकिन उन्हें कहीं भी संतुष्टि न मिल सकी। तभी उन्हें मथुरा स्थित नयति मेडिसिटी के बारे में पता चला और वे नयति मथुरा आये, जहां दिल्ली जैसा ही इलाज और व्यवस्थाएं दिल्ली से कम पैसे में मिलने पर उन्होंने अपने बच्चे का इलाज मथुरा में ही कराने का फैसला किया। जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव और डॉ विमल कुमार ने बताया कि जब बच्चा हमारे यहां लाया गया था तो वह 3 माह का था। एमआरआई से पता चला कि बच्चे के दिमाग में पानी भरा हुआ है और उसके फोड़े की नसें भी आपस में उलझी हुई थीं, जिसमें पानी भी भरा हुआ था और एक गुच्छे की तरह दिखाई दे रही थीं।

हमने सबसे पहले बच्चे के दिमाग से पानी निकालने के लिए बच्चे के सिर से पेट तक वीपी शंट डाला और उसके बाद ट्यूमर का ऑपरेशन करके उलझी हुई नसों को ठीक कर दिया। दो दिन पीडियाट्रिक आइसीयू में रखने के बाद बच्चे को वापस घर भेज दिया। इस बच्चे के ऑपरेशन में हमारे यहां मौजूद एक ही छत के नीचे सभी सुविधाओं का काफी योगदान रहा, इनकी वजह से हमारा समय बिल्कुल खराब नहीं हुआ और हम बच्चे की सफल सर्जरी कर पाए।

उन्होंने बताया कि इस तरह की परेशानी को मेडिकल भाषा में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं, जो फोलिक एसिड(एक प्रकार का बी विटामिन बी है) की कमी से होती है। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचने का सबसे आसान तरीका समय पर और सही मात्रा में फोलिक एसिड का सेवन होता है। गर्भवती महिलाओं को समय समय पर अपनी तथा अपने बच्चे की जांच योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से कराते रहना चाहिये। जागरूकता की कमी अथवा लापरवाही से ही इस तरह की परेशानी होती है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से हमारे यहां के न्यूरो साइंस विभाग में ट्रॉमा, स्ट्रोक, स्पाइन आदि अन्य न्यूरो की परेशानियों के साथ काफी मरीज आ रहे हैं, जो बिल्कुल ठीक होकर गए, जिसकी वजह से हमारे यहां दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज कराते हैं। अभी हाल ही में हमारी न्यूरो सर्जरी टीम ने फरीदाबाद से आये 2 महीने के बच्चे के सिर का ऑपरेशन भी किया था। नयति के न्यूरो सर्जरी विभाग में अब तक 2 दिन के बच्चे से 96 वर्ष के बुजुर्ग की सफल न्यूरो सर्जरी हो चुकी है, इसके लिए मैं न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों को बधाई देती हूं और मुझे इस तरह की न्यूरो क्रिटिकल सर्जरी करने के लिये भी अपने डॉक्टरों पर काफी गर्व है।

बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, और महिलाओं की जरा सी जागरूकता से हम देश के आने वाले भविष्य को बेहतर स्वास्थ्य और जीवन दे सकते हैं। गर्भावस्था का पता चलते ही महिलाओं को लगातार किसी योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए, जिससे आने वाला बच्चा किसी शारीरिक विकार के साथ पैदा न हो सके।

July 26, 2019

मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए वरदान है बैरियाट्रिक सर्जरी

  • 26 July, 2019

कासगंज 24 जुलाई। मोटापा इन्सान के ऊपर कुदरत का वो कहर है जो अकेला नहीं आता बल्कि साथ में लाता है डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन, थाइराइड, घुटनों की परेशानी, एसिडिटी और भी पता नहीं कितनी बीमारियां अपने साथ लाता है। मोटापा आने के बाद रुकता नहीं बल्कि दिनों दिन बढ़ता ही जाता है और जिसकी जिन्दगी में ये आया उसका जीना मुश्किल कर देता है। इससे बचने को इन्सान क्या क्या जतन नहीं करता? जिम जाना, डाइटिंग करना, टहलना और भी पता नहीं क्या क्या, लेकिन मोटापा तो आकर ऐसा घर बसाता है कि जाने का नाम ही नहीं लेता और इससे ग्रस्त इन्सान इसे अपनी खराब किस्मत समझकर हीनभावना के साथ इसके साथ जीने को मजबूर हो जाता है।

बैरियाट्रिक सर्जरी के आने के बाद मोटापे से ग्रस्त लोगों के जीवन में एक चमत्कार होने लगा है जो लोग मोटापे को अपना प्रारब्ध मान चुके थे वे बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद अपने सामान्य वजन के साथ इतराते घूम रहे हैं और जो बीमारियां उन्हें घेरे हुई थीं उनसे भी उन्हें मुक्ति मिल गयी

नयति मेडिसिटी के आने से पहले यह केवल महानगरों के कुछ चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध थी और इसे कराने में लोगों को 3.5 लाख से 5 लाख तक खर्च करने पड़ते थे लेकिन नयति ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए और अपने ध्येय वाक्य नयति है सबके लिये“ के चलते अपने यहां इस सर्जरी को महानगरों से काफी कम दाम में करने का निर्णय लिया है। अब बहुत ही कम कीमत में मोटापे से ग्रस्त लोग नयति मेडिसिटी में अपनी सर्जरी कराकर एक सामान्य इन्सान की तरह अपना जीवन जी रहे हैं।

नयति में बैरियाट्रिक सर्जरी करने वाले योगेश अग्रवाला इस क्षेत्र के काफी अनुभवी चिकित्सक हैं, जो अब तक 3 हजार के लगभग बैरियाट्रिक सर्जरी कर चुके हैं और नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सैस सर्जरी, बैरियाटिक एण्ड गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल सर्जरी एवं गेस्ट्रो इंटेस्टाइनल विभाग के चेयरमैन हैं।

उन्होंने कहा कि अभी तक बैरियाटिक सर्जरी केवल विदेशों तथा गिने चुने कुछ बड़े शहरों में ही सम्भव थी, लेकिन मथुरा स्थित नयति मेडिसिटी तथा आगरा में नयति हॉस्पिटल में भी यह सर्जरी लगातार हो रही है और अब तक इस क्षेत्र के भी कई मरीज इस सर्जरी का लाभ उठा चुके हैं। इस क्षेत्र में मोटापे की वजह से डाइबिटीज, थाइराइड, ब्लडप्रेशर आदि बीमारियां अनियमित खानपान तथा पानी के कारण बहुतायत में पाई जाती है। मोटापा दूर करने वाली यह सर्जरी कोई नई नहीं है। भारत में यह 1998 से की जा रही है लेकिन ये अभी तक महानगरों और बड़े बड़े शहरों तक ही सीमित थी किन्तु अब नयति मेडिसिटी मथुरा और नयति मेडिसेंटर आगरा में यह उपलब्ध है। बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद कई अन्य बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अजय अग्रवाल ने कहा कि बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के तुरन्त बाद मरीज का एक ग्राम वजन भी कम नहीं होता। सर्जरी के बाद हर महीने 4 से 5 किलो वजन कम होने लगता है 8 से 9 महीने में व्यक्ति अपना सामान्य वजन प्राप्त कर लेता है। सर्जरी के दूसरे दिन ही मरीज अपने घर चला जाता है।लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाने वाली यह सर्जरी मोटापा कम करने के अलावा कई अन्य बीमारियों से भी निजात दिलाती है।

इसके अलावा भी हमारे यहां लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से कई अन्य सर्जरियाँ भी की जाती हैं। आपको यकीन नहीं होगा कि एक छोटी सी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से एसिडिटी की शिकायत हमेशा के लिए दूर हो सकती है।

इसी तरह लोगों में यह भ्रम है कि डाइबिटीज एक लाइलाज बीमारी है लेकिन उचित चिकित्सा से यह भी पूरी तरह ठीक हो सकती है हमारे यहाँ आमाशय, हर्निया, पित्ताशय, तथा आंतों के ऑपरेशन 95 प्रतिशत तक लेप्रोस्कोपी तकनीक के माध्यम से किये जाते हैं, जिनकी वजह से मरीज दूसरे दिन ही अपने घर जा सकता है। और तो और एक हफ्ते के अन्दर मरीज अपने काम पर भी जा सकता है और पहले की तरह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।

July 12, 2019

मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए वरदान है बैरियाट्रिक सर्जरी

  • 12 July, 2019

ग्वालियर 9 जुलाई। मोटापा इन्सान के ऊपर कुदरत का वो कहर है जो अकेला नहीं आता बल्कि साथ में लाता है डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन, थाइराइड, घुटनों की परेशानी एसिडिटी और भी पता नहीं कितनी बीमारियां अपने साथ लाता है। मोटापा आने के बाद रुकता नहीं बल्कि दिनोंदिन बढ़ता ही जाता है और जिसकी जिन्दगी में ये आया उसका जीना मुश्किल कर देता है। इससे बचने को इन्सान क्या क्या जतन नहीं करता? जिम जाना, डाइटिंग करना, टहलना और भी पता नहीं क्या क्या, लेकिन मोटापा तो आकर ऐसा घर बसाता है कि जाने का नाम ही नहीं लेता और इससे ग्रस्त इन्सान इसे अपनी खराब किस्मत समझकर हीनभावना के साथ इसके साथ जीने को मजबूर हो जाता है।

बैरियाट्रिक सर्जरी के आने के बाद मोटापे से ग्रस्त लोगों के जीवन में एक चमत्कार होने लगा है जो लोग मोटापे को अपना प्रारब्ध मान चुके थे वे बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद अपने सामान्य वजन के साथ इतराते घूम रहे हैं और जो बीमारियां उन्हें घेरे हुई थीं उनसे भी उन्हें मुक्ति मिल गयी

नयति मेडिसिटी के आने से पहले यह केवल महानगरों के कुछ चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध थी और इसे कराने में लोगों को 3.5 लाख से 5 लाख तक खर्च करने पड़ते थे लेकिन नयति ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए और अपने ध्येय वाक्य नयति है सबके लिये“ के चलते अपने यहां इस सर्जरी को महानगरों से काफी कम दाम में करने का निर्णय लिया है। अब बहुत ही कम कीमत में मोटापे से ग्रस्त लोग नयति मेडिसिटी में अपनी सर्जरी कराकर एक सामान्य इन्सान की तरह अपना जीवन जी सकेंगे।

नयति में बैरियाट्रिक सर्जरी करने वाले डॉ. योगेश अग्रवाल इस क्षेत्र के काफी अनुभवी चिकित्सक हैं अभी तक 2500 के लगभग बैरियाट्रिक सर्जरी कर चुके डॉ. योगेश अग्रवाला नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सैस सर्जरी, बैरियाटिक एण्ड गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल सर्जरी एवं गेस्ट्रो इंटेस्टाइनल विभाग के चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक बैरियाटिक सर्जरी केवल विदेशों तथा गिने चुने कुछ बड़े शहरों में ही सम्भव थी, लेकिन मथुरा स्थित नयति मेडिसिटी तथा आगरा में नयति मेडिसेंटर में भी यह सर्जरी लगातार हो रही है और अब तक इस क्षेत्र के भी कई मरीज इस सर्जरी का लाभ उठा चुके हैं। इस क्षेत्र में मोटापे की वजह से डाइबिटीज, थाइराइड, ब्लडप्रेशर आदि बीमारियां अनियमित खानपान तथा पानी के कारण बहुतायत में पाई जाती है। मोटापा दूर करने वाली यह सर्जरी कोई नई नहीं है। भारत में यह 1998 से की जा रही है लेकिन ये अभी तक महानगरों और बड़े बड़े शहरों तक ही सीमित थी किन्तु अब नयति मेडिसिटी मथुरा और नयति मेडिसेंटर आगरा में यह उपलब्ध है। बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद कई अन्य बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

बैरियाट्रिक सर्जरी कराने के तुरन्त बाद मरीज का एक ग्राम वजन भी कम नहीं होता। पहले दो से तीन महीने में 35 से 40 किलो वजन कम होता है और उसके बाद हर महीने 4 से 5 किलो वजन कम होने लगता है 8 से 9 महीने में व्यक्ति अपना सामान्य वजन प्राप्त कर लेता है। सर्जरी के दूसरे दिन ही मरीज अपने घर चला जाता है। लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाने वाली यह सर्जरी मोटापा कम करने के अलावा कई अन्य बीमारियों से भी निजात दिलाती है।

इसके अलावा भी हमारे यहां लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से कई अन्य सर्जरियाँ भी की जाती हैं। आपको यकीन नहीं होगा कि एक छोटी सी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से एसिडिटी की शिकायत हमेशा के लिए दूर हो सकती है।

इसी तरह लोगों में यह भ्रम है कि डाइबिटीज एक लाइलाज बीमारी है लेकिन उचित चिकित्सा से यह भी पूरी तरह ठीक हो सकती है हमारे यहाँ आमाशय, हर्निया, पित्ताशय, तथा आंतों के ऑपरेशन 95 प्रतिशत तक लेप्रोस्कोपी तकनीक के माध्यम से किये जाते हैं, जिनकी वजह से मरीज दूसरे दिन ही अपने घर जा सकता है। और तो और एक हफ्ते के अन्दर मरीज अपने काम पर भी जा सकता है और पहले की तरह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।

July 9, 2019

नयति में तीमारदारों के लिये शुरू हुआ लाउंज

  • 09 July, 2019


मथुरा 6 जुलाई। नयति मेडिसिटी में मरीजों के तीमारदारों के लिए वीआईपी लाउंज का शुभारंभ नयति मेडिसिटी के सीओओ डॉ अजय अंगरीश ने फीता काटकर किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नयति ने हमेशा ही अपने यहां आने वाले मरीजों तथा उनके तीमारदारों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया है। हमारे यहां मरीजों के साथ साथ तीमारदारों के लिए भी योग आदि के कार्यक्रम चलाए जाते रहते हैं। एक ओर हम मरीज का ध्यान ध्यान रखते हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके तीमारदारों का भी ख्याल रखना अपना कर्तव्य समझते हैं। इसी क्रम में हमने आइसीयू में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए विशेष प्रकार का लाउंज तैयार कराया है, जहां उनके आराम का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा नयति हैल्थकेयर द्वारा दिये गए गोल्ड कार्ड, सिल्वर कार्ड, सीनियर सिटीजन कार्ड तथा वैल वूमेन कार्ड धारकों के लिए इस लाउंज की शुरुआत की गई है। हमारा हमेशा से उद्देश्य रहा है कि हम मरीज को बेहतरीन उपचार देने के अलावा उनके तीमारदारों को भी सभी सुविधाएं प्रदान कर सकें।