उठने बैठने में असमर्थ महिला का नयति में हुआ सफल ऑपरेशन

मथुरा 13 फरवरी। उठने बैठने में असमर्थ 65 वर्षीय एनआरआई कौशल्या द्विवेदी का नयति मेडिसिटी में सफल ऑपरेशन किया गया। कई वर्षों से ऑस्ट्रेलिया रह रहीं कौशल्या दर्शन के लिए वृन्दावन आयीं थीं। वृन्दावन स्थित अपने निवास स्थान पर एक रोज वे फिसल कर गिर गयीं जिसके कारण उनकी कमर और पीठ के निचले भाग में काफी दर्द महसूस हुआ।

उन्होंने पास के ही एक डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने उन्हें दवा देकर कमर का पट्टा उपयोग करने की सलाह दी। एक हफ्ता बीतने के बाद भी उनकी तकलीफ लगातार बढ़ती जा रही थी यहां तक कि वे खुद को उठने बैठने में भी असमर्थ पा रहीं थीं और शौच आदि दैनिक नित्य कर्म के लिए भी उनका शरीर साथ नहीं दे रहा था। यह जानकर उनके बेटों ने (जो ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं) उनका इलाज ऑस्ट्रेलिया में कराने के लिए बुलाना चाहा, लेकिन नयति के विश्वस्तरीय इलाज तथा सुविधाओं के बारे में पता चलने पर उन्होंने अपनी मां कौशल्या जी का इलाज नयति मेडिसिटी में कराया, अब वे बिल्कुल स्वस्थ हैं।

कौशल्या द्विवेदी का इलाज करने वाले नयति मेडिसिटी के हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. यू.के साधू ने कहा कि हमारे यहां के विश्वस्तरीय संसाधन तथा हमारी टीम के चिकित्सक हड्डियों से संबंधित किसी भी प्रकार का इलाज जैसे ऑर्थोस्कोपी सर्जरी (स्पोर्ट्स इंजरी सर्जरी), स्पाइनल सर्जरी, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी आदि करने में सक्षम हैं, जिनमें नयति मेडिसिटी के हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग के प्रमुख डॉ विवेक फंसवाल तथा जितेन्द्र गुप्ता देश के बेहतरीन चिकित्सकों में से हैं।

इस अवसर पर डॉ जितेन्द्र गुप्ता ने बताया कि कौशल्या जी हमारे पास काफी नाजुक हालत में आयीं थीं। हमने इनकी कमर की एमआरआई करायी तो पता चला कि गिरने की वजह से इनकी रीढ़ की हड्डी (क्12) में फ्रेक्चर हुआ है और रीढ़ की नस ( स्पाइनल कॉर्ड) पर बहुत अधिक दवाब भी पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनके दोनों पैरों में काफी कमजोरी भी आ गयी है, मेडिकल भाषा में इसे पैराप्लीजिया कहा जाता है, और इनके ब्लैडर और आंतों  ने भी 90 प्रतिशत तक काम करना बन्द कर दिया था जिसके कारण इनका अपने शौच आदि दैनिक नित्य कर्म पर भी कोई कंट्रोल नहीं रह गया था।

हमने इनका अत्याधुनिक तकनीक (ट्रांस्पेडिक्युलर एंट्रोलेट्रल डीकम्प्रेशन ऑफ स्पाइनल कॉर्ड एंड पेडिकल स्क्रू फिक्सेशन) के माध्यम से ऑपरेशन करके नस पर पड़ रहे दवाब को खत्म कर दिया एवं रीढ़ की हड्डी को पेचों से फिक्स कर दिया। आमतौर पर होने वाले ऑपरेशन के बाद इस प्रकार के मरीजों को बैठने तथा चलने में ही 6 माह से 2 साल तक लग जाते हैं लेकिन नयति में अत्याधुनिक तरीके से की गई सर्जरी के कारण कौशल्या जी सर्जरी के दूसरे दिन ही सपोर्ट के माध्यम से बैठने लगीं और कुछ दिन बाद ही वॉकर से चलना भी शुरू कर दिया। अब कौशल्या जी एक सामान्य महिला की तरह अपना जीवन जी रही हैं।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आरके मनी ने कहा कि नयति में विश्व की अत्याधुनिक तकनीक तथा अनुभवी चिकित्सकों की टीम मौजूद है जिनकी वजह से हम ब्रजवासियों तक विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा पहुंचा पा रहे हैं।

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