उत्तर भारत का सबसे बड़ा और विश्वसनीय एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर बना नयति मेडीसिटी

पहले घंटे (गोल्डन ऑवर) के अंदर उचित इलाज शुरू होने पर बच सकती है मरीज की जान

मैनपुरी 10 अगस्त। नयति मेडिसिटी के न्यूरोसाइंस विभाग में न्यूरो सर्जरी और न्यूरोलॉजी से संबंधित हर प्रकार की चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जहां अब तक 2 दिन के बच्चे से लेकर 96 साल के बुजुर्ग के अलावा सैकड़ों मरीजों की न्यूरो सर्जरी अथवा चिकित्सा सफलतापूर्वक की जा चुकी है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि दिल्ली के व्हिमांस और नयति की साझेदारी के बाद न्यूरो के मरीजों के लिए वही विश्वस्तरीय तकनीक एवं चिकित्सा नयति मेडिसिटी मथुरा में भी दी जा रही है और अब नयति उत्तर भारत का सबसे बड़ा न्यूरो सेंटर बन गया है।

हमारे यहां का न्यूरोलॉजी विभाग एक बेहतरीन एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर है, और हर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर को ठीक करने में सक्षम है। ब्रेन स्ट्रोक में प्रति सेकंड 32 हजार कोशिकाएं नष्ट होती हैं और हम सोचने में ही वक्त बिता देते है। त्वरित उपचार से न केवल मरीज की जान बचने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, बल्कि उसका इलाज भी बेहतर हो पाता है। हमारे न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेन से लेकर स्पाइन तक हर प्रकार की चिकित्सा तथा सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही है। नेशनल हाइवे पर होने के कारण हमारे यहां ट्रॉमा के मरीज भी अक्सर आते रहते हैं। ट्रॉमा के मरीज को इलाज की तत्काल जरूरत होती है और मरीज को न्यूरो सर्जरी के अलावा ब्लड बैंक, ऑर्थोपेडिक, कार्डियक, जीआइ सर्जरी आदि अन्य विभागों की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसके लिए हमारे यहां के हर विभाग में 24ग्7 डॉक्टर उपस्थित रहते ही हैं।

नयति स्थित न्यूरो विभाग में अब मथुरा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज करा रहे हैं। लोगों का नयति पर बढ़ता विश्वास हमारे यहां के देश के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय सुविधाओं के कारण ही संभव हो पाया है।“

नयति के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि समय के साथ न्यूरो साइंस ने भी काफी तरक्की की है। एंडोस्कोपी ब्रेन सर्जरी, एंडोस्कोपी स्पाइन सर्जरी, माइक्रो न्यूरो सर्जरी, कॉम्प्लेक्स स्पाइन सर्जरी आदि अन्य सभी प्रकार की सर्जरी हो रही हैं। न्यूरो आईसीयू और पीडियाट्रिक आईसीयू होने से हमारे यहां न्यूरो से संबंधित मरीजों की बेहतर देखभाल हो पाती है। ब्रेन ट्यूमर के कई मरीजों को रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है, हमारे यहां न्यूरो रेडियोथेरेपी की सुविधा होने से मरीजों को ऑपरेशन कराने के बाद कहीं और नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी और न्यूरो रीहबिलिटेशन जैसी भी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

हमारे यहां अभी एक दिन के बच्चे की रीढ़ की हड्डी पर उलझी हुई नसों की गांठ का सफल ऑपरेशन किया गया। अभी हाल ही में हरियाणा के जींद के एक बच्चे (जिसका कुल वजन 8 किलो था, जिसमें से 5 किलो वजन केवल उसके सिर का था) का भी सफल ऑपरेशन किया गया।

नयति मेडिसिटी के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ नीलेश गुप्ता ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) के लक्षण (मुँह का टेढ़ापन, बाजू में सूनापन या कमजोरी, बोलने में दिक्कत, मिर्गी, सिरदर्द, याददाश्त की परेशानी, हाथ पैरों में झनझनाहट, शरीर के अंग का सुन्न हो जाना, शरीर का बैलेंस और कंपन, दिमागी बुखार) आदि अन्य न्यूरो संबंधी परेशानियां होने पर किसी योग्य न्यूरो फिजिशियन को दिखाना चाहिए। किसी भी मरीज का स्ट्रोक आने के बाद यदि पहले घंटे (गोल्डन ऑवर) के अंदर उचित इलाज शुरू हो जाये तो मरीज भविष्य में होने वाली परेशानी से बच सकता हमारे यहां कई मरीज इन परेशानियों के साथ आये और बिल्कुल ठीक होकर गए हैं।

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