क्षेत्र में पहली बार नयति मेडिसिटी में हुआ सफल एल्बो (कोहनी) प्रत्यारोपण

मथुरा 31 जुलाई। क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में हड्डी रोगों से संबंधित हर तरह का उपचार किया जा रहा है, जहां अब तक सैकड़ों की तादात में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट भी किये जा चुके हैं। देश के जानेमाने चिकित्सकों एवं बेहतरीन तकनीक के कारण नयति का ऑर्थोपेडिक विभाग सफलता के नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। अभी हाल ही में नयति मेडिसिटी में सफलतापूर्वक कोहनी का प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में कोहनी का प्रत्यारोपण एक बहुत ही जटिल सर्जरी है जो देश के गिने चुने सर्जनों द्वारा ही की जाती है।

नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि नयति मेडिसिटी का हर विभाग स्वास्थ्य के क्षेत्र अहम भूमिका निभा रहा है, और लोगों के हमारे ऊपर बढ़ते विश्वास से हमें काफी खुशी मिलती है। हमारे यहां के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय तकनीक के कारण ही हम क्षेत्रवासियों को महानगरों में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं दे पा रहे हैं। एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं होने से मरीज के इलाज में समय भी नहीं लगता और डॉक्टर भी अपना काम बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

10 हजार से अधिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट कर चुके देश के जाने पहचाने नयति मेडिसिटी के ऑर्थोपेडिक विभाग के चेयरमैन डॉ राजीव शर्मा ने बताया कि कमलेश देवी अपनी कोहनी की तकलीफ से काफी समय से परेशान थीं, उन्होंने कई जगह अपना इलाज कराया लेकिन उन्हें सन्तुष्टि न मिल सकी। जब वे हमारे पास आयीं तो पता चला कि उनकी कोहनी ठीक से काम नहीं कर रही जिसके प्रत्यारोपण की जरूरत है। कोहनी शरीर का वह भाग है जो त्वचा के बिल्कुल नीचे होती है और काफी सारी मसल्स से घिरी होती है, जिसमें ड्राइसेल्स मसल्स कोहनी को सीधा रखने में मदद करती है। इस तरह की परेशानी वाले मरीजों की हड्डियां भी काफी कमजोर होती है, जिसके कारण उनके टूटने और चटकने का खतरा भी हमेशा बना रहता है। कोहनी के आसपास नसों का जाल बिछा होता है, जिसकी वजह से कोहनी को अपनी जगह से हटाना और फिर दोबारा लगाना भी एक बहुत ही बड़ा काम है, जिसे करने के लिए काफी अनुभव की जरूरत है। हमारे शरीर में 10 हजार से ज्यादा जोड़ हैं, जिसमें एल्बो ज्वाइंट सबसे मुश्किल ज्वाइंट होता है। आर्टिफिशियर सरफेस द्वारा एल्बो को ह्यूमरस और अल्ना के साथ काफी एहतियात के साथ जोड़ा गया, जिससे कि वह अच्छी तरह से काम कर सके। ऑपरेशन के बाद हाथ में एल्बो को सहारा देने के लिए एक सपोर्ट लगाया गया जिसे कुछ दिनों बाद हटा दिया गया। आने वाले समय में कमलेश देवी सामान्य जीवन जी सकेंगी।

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