देश के मजबूत भविष्य के लिए बच्चों का वर्तमान स्वस्थ होना चाहिएः नयति हैल्थकेयर

मथुरा 27 मार्च | अपने बच्चे का भविष्य संवारने को समाज का हर व्यक्ति अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा आदि के लिए हर संभव प्रयास करता है, जिसके लिये वो अपने बच्चों का अपनी हैसियत के हिसाब से अच्छे से अच्छे स्कूल में एडमिशन कराता है। इसके बाद भी कई बच्चे अपनी क्लास में पिछड़ते चले जाते हैं, जिसके लिये लोग अपने बच्चों को ही दोष देने लगते हैं। अभी कुछ वर्ष पहले एक फिल्म आयी थी तारे जमीं पे, जिसमें बच्चे का पिता अपने बच्चे का रिजल्ट अच्छा आने के लिए स्कूल बदलता है, यहां तक कि उसे होस्टल तक में डाल देता है, लेकिन बच्चे पर कोई असर नहीं पड़ता। उस बच्चे की मनोस्थिति एक टीचर समझता है और उस बच्चे को सही दिशा दिखाता है। उसी तरह हमारे समाज में भी कई बच्चे हैं जिनकी मनोस्थिति को यदि समझा जाये तो वे नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। यह कहना था नयति मेडिसिटी के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ सागर लवानिया का जो नयति में आयोजित विभिन्न स्कूलों से आये शिक्षकों के सेमिनार को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कई बार हम बच्चों की जिद, उसके व्यवहार, उसकी आदतों को एक सामान्य प्रक्रिया समझते हुए अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यदि बच्चे पर ध्यान दिया जाय तो कुछ लक्षणों के आधार पर हम बच्चे की मनोस्थिति को समझ सकते हैं और किसी मनोचिकित्सक को दिखाकर उसकी परेशानियों को दूर कर सकते हैं।

 
यदि बच्चा एक जगह टिककर बैठता नहीं है, आंख मिलाने से बचता है, एक काम को अधूरा छोड़कर दूसरे काम में लग जाता है, मोबाइल से चिपका रहता है, चिड़चिड़ापन है, जिद्दी है, रोज नई फरमाइश करता है, गणित समझने में कमी आदि लक्षण बच्चे में दिखायी देते हैं तो बच्चा मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो सकता है, और यह लाइलाज बीमारी नहीं है। किसी भी योग्य मनोचिकित्सक को दिखाने से बच्चा पूरी तरह ठीक हो सकता है।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं, देश के स्वस्थ तथा मजबूत भविष्य के लिए बच्चों का वर्तमान भी स्वस्थ होना चाहिए। इसी को ध्यान रखते हुए हमने बच्चों के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया है, मुझे पूरा विश्वास है कि इस कार्यक्रम का लाभ समाज तक अवश्य पहुंचेगा।

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