नयति द्वारा मेडिकल इमरजेंसी आने पर किये जाने वाले कार्यों की दी जा रही है ट्रेनिंग’

मथुरा 17 अगस्त। किसी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी होने पर लोग घबरा जाते हैं, और अक्सर उन्हें पता नहीं होता कि क्या करें और क्या नहीं। अस्पताल पहुंचने तक तीमारदारों द्वारा उचित प्रक्रिया न अपनायी जाने के कारण कभी कभी गंभीर हादसा भी हो जाता है। इन सबसे बचने के लिए नयति हैल्थकेयर द्वारा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर ईएफआर (इमरजेंसी फर्स्ट रिस्पांडर) ट्रेनिंग के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे लोग किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी होने पर उचित प्रक्रिया अपना सकें और किसी की जान बचाने में सहयोगी बन सकें। अभी यह कार्यक्रम पुलिस कर्मियों के बीच चलाये जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत अभी तक 3 सैशन हो चुके हैं और अब तक 80 लोग प्रशिक्षित किये जा चुके हैं। पुलिस विभाग के अलावा यह इएफआर ट्रेनिंग कार्यक्रम स्कूलों, कॉलेजों, होटलों, एवं फैक्ट्रियों आदि में चलाए जाएंगे। यह कार्यक्रम मथुरा के अलावा आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज, अलीगढ़, हाथरस आदि विभिन्न जनपदों में चलाए जाएंगे।

’मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार’ ने नयति द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि समाज में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर लोग सबसे पहले पुलिस को याद करते हैं। यह ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद पुलिसकर्मी लोगों की और अच्छे तरीके से सेवा कर पाएंगे, ऐसा मुझे पूरा विश्वास है।

’नयति हैल्थकेयर के ग्रुप सीईओ डॉ. आर के मनी’ ने कहा कि स्वास्थ्य सम्बंधी किसी इमरजेंसी में सबसे पहले वो लोग मददगार होते हैं जो उस समय वहाँ मौजूद होते हैं। यह परिवार के सदस्य, पड़ोसी, फैक्ट्री या आफिस के सह कर्मचारी, स्कूल या कालेज के छात्र और टीचर हो सकते हैं। अक्सर पुलिस वाले, ड्राइवर या फ़ायर बिग्रेड के लोग भी होते है। आम आदमी पहले एम्बूलेंस को काल करके बिना किसी सहायता के इंतज़ार करते हैं। नयति हेल्थकेयर ने आम आदमी को स्वास्थ्य सम्बंधी इमरजेंसी के लिए प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। हम चाहते हैं कि समाज के हर वर्ग के लोगों को इएफआर की ट्रेनिंग मिल सके।

’नयति मेडिकल एजुकेशन के डीन डॉ. पीके कोहली’ ने बताया कि किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के तत्काल बाद के 10 मिनट (प्लेटिनम 10 मिनट) का किसी की जिंदगी बचाने में बहुत योगदान होता है। इन 10 मिनटों में किये गए उचित कार्य के बहुत बेहतर और सकारात्मक परिणाम आते हैं। आमतौर पर मेडिकल इमरजेंसी आने पर लोगों को पता ही नहीं होता कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फैसला किया कि लोगों को जागरूक कर उन्हें मेडिकल इमरजेंसी आने पर किये जाने वाले कार्यों की ट्रेनिंग दी जाए, जिससे समाज स्वस्थ एवं जागरूक बन सके।

3 घंटे दी जाने वाली इस इएफआर ट्रेनिंग में हमारे द्वारा केवल लेक्चर के अलावा प्रेक्टिकल करके भी सिखाया जाता है। ट्रेनिंग के बाद लोगों की एक परीक्षा होती है। परीक्षा में कम अंक लाने वालों को दोबारा ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग प्राप्त कर चुके लोगों को एक प्रमाणपत्र भी दिया जाता है।

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