नयति मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल ने मनाया विश्व स्तनपान सप्ताह

मथुरा 06 जुलाइ  2016। नयति मल्टी सुपर स्पेिशयलिटी हास्पिटल ने विश्व स्तनपान सप्ताह के मौके पर अपने यहाॅं स्तनपान को बढ़ावा देने के लिये जिला मथुरा के स्वास्थ अधिकारिया,े महिला स्वास्थ र्कमचारियो  के साथ दो दिवसीय र्कायशाला का आयाजेन किया। इस र्कायशाला का मख्ुय उद्वेश लागेो को स्तनपान के प्रति जागरूक्ता, स्तनपान का सहि तरिका एंव उनसे होने वाले फायदेे के बारे मे जागरूक करना है।


र्कायकरम का शुभारंभ करते हुए   लाधिकारी श्री निखिल चन्द्र शुक्ला  जी ने कहाॅं की ’’  िशशु के स्वास्थ जीवन का आधार, स्तनपान होता हैं। वल्ॅड मिलेनियम गाले 2030 के ल्क्ष्य के अन्र्तगत स्तनपान को बढाव़ा देने के लिये हम विश्व स्तनपान सप्ताह मनाते हैं। माँ यदि अपने शिशु को लम्बे समय तक स्तनपान करायें तो भारत मंे प्रतिवर्ष 1.56 लाख शिशुओं को जान से बचाया जा सकता है। इससे 26 प्रतिशत बच्चे मोटापे से दूर रहते हैं। बच्चों का आई क्यू लेवल ते  रहता है।  रीब से  रीब माँ भी अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती है। उन्हांेने कहा कि शिक्षा तथा जानकारी के अभाव मंे माँ अपने बच्चे को लम्बे समय तक स्तनपान नहीं कराती है जिसके कारण बच्चे को शुरुआत मंे डायरिया, निमाेिनया, पीलिया आदि बीमारियाँ घरे लेती हैं। इसके लिए डॉ. तथा अन्य स्टा  को वन-टू-वन काउंसिलिंग करनी चाहिए। माताआंे को निरंतर जागरूक किया जा         जिससे घर-घर तक स्तनपान का लाभ पहंचुे। ’’

 

इस अवसर पर नयति अस्पताल की               डॉ. वरुणा एच.ओ.डी ने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह 1992 मंे पहली बार प्रारंभ हुआ था। इस हिसाब से हम इसकी सिल्वर जुबली मना रहे हैं। पुराने समय सभी माँ अपने बच्चों को अपना दूध पिलाती थीं किन्तु द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात दूध पाउडर के प्रचार-प्रसार मंे बढ़ोत्तरी हुई। जिससे अस्पतालांे तथा गाँव-गाँव में दूध पाउडर के सैम्पल    बाटंे गय।े उच्च वर्ग मंे पाउडर वाला दूध पिलाना स्टेटस सिंबल माना जाने लगा। आज भी विश्व के विकसित देशांे में ब्रेस्ट फीडिंग मात्र 15 प्रतिशत है। वहीं भारत मंे ये दर 44 प्रतिशत है। भारत में लागे आज भी बच्चे के जन्म के उपरांत गाय का दूध अथवा शहद आदि पिलाते हैं जो कि नु सानदायक है। यूनिसे  तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य से संबंधित जो दस बिन्दु दिये हैं उनमंे ब्रेस्ट फीडिंग प्रमुख है। उन्हांेने कहा कि दुनिया के समस्त प्राणियांे मंे पैदा होते बच्चे     ही माँ का दूध पीने लगते हैं फिर मनुष्य के बच्चे क्यों नहीं पीते। एक वीडियो के माध्यम से बताया कि मनुष्य का बच्चा भी पैदा होते ही यदि माँ के पास छोड़ दिया जाए तो बच्चा     ही स्तनपान की जगह ढूढं लेता है। सही विधि से दूध पिलाने पर लम्बे समय तक दूध आता रहता है। पहले दो दिन का गाढ़ा दूध बहुत ही लाभदायक होता है जिसे हर हाल मंे बच्चे को पिलाना चाहिए। डाॅ वर्णना ने यह बताया की नयति हास्पिटल मे बच्चे जन्म के बाद माॅ और बच्चे को साथ रखने मे विश्वास रखती हैंैे इसलिए र्नसरी रूमिगं फैसिलीटी नही रखी है।’’

 

नयति अस्पताल के बच्चो के चिकित्सिक डॉ. नुरुल ने कहा ’’ मदर मिल्क संपूर्ण आहार है।  6 माह तक दूध मंे संपूर्ण न्युट्रिशन होता है। एक्जिमा, अस्थमा, डायरिया,   , काल्ेड आदि से माँ का दूध बच्च े का बचाव करता है। प्राटेीन की अधिकता होने से बच्चे का आई क्यू लेवल बढ़ता है। पैदा होने के 1 घंटे के अंदर बच्चे को स्तनपान करा देना चाहिए क्यांेकि उस समय माँ को आने वाला गाढ़ा पीला दूध (कालेेस्ट्रम) प्राकृतिक रूप से पहला वैक्सीन है जिससे बच्चे को कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने की ताकत प्राप्त होती है। 3 वर्ष की आयु तक माँ को अपना दूध पिलाते रहना चाहिए।
नयति अस्पताल की मनोचिकित्सिक डॉ. सपना ने कहा ’’ माँ के दूध से बच्चे अधिक परिपक्व, आत्मविश्वासी तथा सामाजिक बनते हैं। यह देखा गया कि जिन बच्चों ने माँ का दूध पिया वो अपराध की आरे अग्रसर नहीं हुए। ’’

 

नयति अस्पताल की डायटिशियन डॉ. आस्था शर्मा ने कहा कि स्तनपान कराने वाली महिला को बच्चे को अधिक से अधिक दूध पिलाना चाहिए तथा माँ की खाने-पीने की मात्रा मंे सामान्य से 550 कैलोरी ही अधिक होनी चाहिए। इससे अधिक खिलाने पर माँ का वजन वढ़ सकता है।
धन्यवाद व्यक्त करते हुए विवेक दबे आउटरीच एवं चेेरीटी के      ने कहा ’’ ब्लॉक एवं गाँव की हर गर्भवती महिला तथा माँ तक उक्त बातें पहुंचे, ये हम सभी स्वास्थ्य कर्मियांे का लक्ष्य होना चाहिए। इस अवसर पर सी.एम.ओ. डॉ. विवेश मिश्रा, ए.सी.एम.ओ. डॉ. सज्जन सिंह,                             ,  डॉ. वण्ेाुगापेाल, डॉ. ज्योति, डॉ. सीमा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।’’
कार्यशाला का समापन मुख्य विकास अधिकारी मनीष वर्मा ने किया। इस अवसर पर उन्हांेने कहा कि सभी डॉ. तथा स्वास्थ्य कर्मियांे को जनपद के प्रत्यके गाँव की माँ तक स्तनपान से होने वाले लाभ पहुंचाने चाहिए।

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