नयति मल्टी सुपर स्पेषियलिटी हाॅस्पिटल न ेरचा इतिहास

इलाके मे ंपहली बार 70 साल क ेएक पुरुश मरीज की आपेन डोर सर्वाइकल लैमिनाप्ेलास्टी सर्जरी की गई

मथुरा, 18 अगस्त, 2016ः नयति मल्टी सुपर स्पेषियलिटी हाॅस्पिटल मथुरा ने इलाक ेमंे पहला सर्वाइकल लैमिनाप्ेलास्टी सर्जरी को सफलतापर्वूक कर इतिहास रच दिया और ससाथ ही उसने इससे पीडित़ 70 वर्शीय व्यक्ति का ेनया जीवन भी प्रदान किया।
मथुरा निवासी 70 वर्शीय पुरुश मरीज करीब एक साल से बिस्तर पर पड़ा था क्योंिक उसक ेपिछले हिस्से मंे लंबवत् लिगामंेट की हड्डी काफी सख्त होन े और मल्टी-सेगमेंट सर्वाइकल स्पाॅन्डिलाइटिस क ेसाथ कोर्ड मंे बदलाव और स्पैस्टिक क्वाड्रपाइरेसिस की वजह से सर्वाइकल कैनाल मे ंसकंुचन की बीमारी थी।

 

मरीज की जब जांच की गई ता ेपाया गया कि वह स्पैस्टिक क्वाड्रपाइरेसिस (सभी चार अंगों मंे पक्षाघात) से पीडित़ है, जिसकी वजह से बिस्तर पर पड़े रहने की स्थिति पैदा हुई। सभी जांच परूी करने और सावधानीपूर्वक उसका परीक्षण करने के बाद आपेन डोर सर्वाइकल लैमिनाप्ेलास्टी करने की योजना बनाई गई और उसे सफलतापर्वूक पूरा किया गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति मंे सुधार हानेे लगा और उसे 5 दिनांे में अस्पताल स ेछुट्टी मिल गई।

 

नयति मल्टी सुपर स्पेिषयलिटी हाॅस्पिटल, मथुरा क ेडाॅ. सुनील कुमार गुप्ता (विभाग प्रमुख- मिनिमल इनवैसिव न्यूरोसर्जरी एंड न्यूरो-इंटरवेष्ंानल सर्जरी) ने कहा, ‘‘यह पहला मौका है जब इस     मंे सर्वाइकल लैमिनाप्ेलास्ट ी सर्जरी की गई। हम इस इलाक ेक ेलागेांे क ेलिए किफायती लागत पर सर्वश्रेश्ठ स्वास्थ देखभाल प्रदान करने और इस तरह दिल्ली-एनसीआर की यात्रा की चिंता भी दरू करन ेके लिए प्रतिबद्ध है।ं’’

 

उन्होनंे कहा, ‘‘सर्वाइकल लैमिनाप्ेलास्टी एक तरह की स्पाइन सर्जरी है, जिसमंे सर्वाइकल स् पाइन या गर्दन से जुडी़ रीढ ़की नसांे पर अतिरिक्त दबाव से राहत के लिए हड्डी को पुनर्संरचना की जाती है या उसे खिसकाया जाता है। सर्वाइकल लैमिनाप्ेलास्टी अक्सर स्पाइनल कैनाल के संकरे होन ेयानी स्पाइनल स्टैनाेिसस में की जाती है। इसमंे गर्दन मंे दर्द, कंधां,े बाजुओ ंय ा हाथो ंतक दर्द का फैलना, सुन्न होना, गले और/या हाथ-पैरो ंमें झुनझुनी और मासंपेषियांे मंे कमजारेी और आतं और/या मत्रूाषय को नुकसान होन ेजैस ेलक्षण नज़र आत ेहैं और इन लक्षणां ेसे राहत के लिए अक्सर सर्वाइकल लैमिनाप्ेलास्टी की जाती है। इस प्रक्रिया को गर्दन क ेपीछे मध्य भाग के समीप एक छोटा सा चीरा लगाकर की जाती है।’’

 

स्पाइनल कोर्ड पर दबाव विभिन्न कारणों से हो सकता है, जिनमं ेडिजेनरेटिव बदलाव, गठिया, हड्डियां ेका बढ़ जाना, डिस्क हार्निएषंस, आपेीएलएल, ट्यूमर्स या फ्रैक्चर्स षामिल हैं। स्पाइनल कोर्ड पर लगातार दबाव रहने की स्थिति को स्पाइनल स्टैनोसिस कहा जाता है और यह एक ही समय मंे सर्वाइकल स्पाइन मंे कई स्तरां ेपर हो सकता है। अगर यह दबाव काफी ज्यादा हो तो इस तरह क ेलक्षण से माइलापेैथी विकसित हो सकती है।

 

लंबवत् लिगामंेट की हडड्ी क ेकाफी सख्त होन ेकी वजह से भारतीयो ंमंे माइलापेैथी की बीमारी होनो बहुत असामान्य है। हालांिक यह जापान के लागेांे मंे बहुत सामान्य है। यह बीमारी महिलाओ ं की तुलना मंे पुरुशों में हानेे की संभावना दागेुनी होती है। इसके लक्षण आमतौर पर 40 वर्श की उम्र क ेबाद नज़र आत ेहैं।

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