नयति में दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त लिवर तथा पैंक्रियाज का ऑपरेशन के बाद हुआ सफल उपचार

व्हिप्पल सर्जरी जैसी जटिल सर्जरी करने वाला इस क्षेत्र का पहला हॉस्पिटल बना नयति
मथुरा 15 मार्च। नयति मेडिसिटी में दुर्घटना में बुरी तरह घायल 20 वर्षीय बालकृष्ण आये थे , जिनका लिवर बुरी तरह क्षतिग्रस्त था तथा पैंक्रियाज भी दो भागों में बंट गया था। उनका सफलतापूर्वक ऑपरेशन (व्हिप्पल सर्जरी) करके इलाज किया गया।

ज्ञात हो कि इस क्षेत्र में व्हिप्पल सर्जरी द्वारा पहली बार ऑपरेशन किया गया है और यह सर्जरी किसी भी चिकित्सक के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होती।

एनेस्थीसिया, ब्लड बैंक आदि विभाग नयति में ही एक ही छत के नीचे होने के कारण तत्काल ऑपरेशन किया जाना सम्भव हो सका। ऑपरेशन के बाद केवल 8 दिन उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आर के मनी ने कहा कि हमने यही सोचकर ब्रज में नयति की शुरुआत की थी कि यहां के लोगों को बेहतरीन तथा विश्वस्तरीय इलाज के लिए मीलों लम्बी यात्रा न करनी पड़े और उनके घर के पास ही बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। यहां आने वाले मरीज जब स्वस्थ होकर अपने घर जाते हैं तब उनके चेहरे की खुशी देखने लायक होती है जो हमें सुकून देने के साथ प्रोत्साहित भी करती है। नयति में हमने विश्व का बेहतरीन इलाज विश्वस्तरीय तकनीक तथा चिकित्सकों के माध्यम से देने का जो फैसला किया था उसमें हम कामयाब हो रहे हैं।

बालकृष्ण का ऑपरेशन करने वाले नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश अग्रवाला कहा कि मेडिकल साइंस में अभी तक सवा सौ से डेढ़ सौ मरीज पाए गए हैं जिनमें 50 प्रतिशत मरीजों की जान ही बच सकी।

इस प्रकार के ऑपरेशन के लिए अस्पताल में विश्वस्तरीय संसाधनों की आवश्यकता होती है जो नयति में उपलब्ध है। बालकृष्ण जब नयति आये थे तब उनका बीपी नहीं था और ना ही उनकी पल्स चल रही थी। इस प्रकार की सर्जरी के लिए चिकित्सा क्षेत्र के कई विभागों की आवश्यकता होती है, जिनमें एनेस्थीसिया, आईसीयू केयर तथा ब्लड बैंक की आवश्यकता होती है। नयति में एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं जिनकी वजह से ऑपरेशन आदि करने में बिल्कुल समय का दुरुपयोग नहीं हो पाता।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अजय अग्रवाल ने कहा कि दुर्घटना के बाद जब बालकृष्ण नयति आये थे तब इनकी हालत बेहद नाजुक थी। जरूरी जांच करने पर पता चला कि इनका लिवर बुरी तरह क्षतिग्रस्त है तथा पैंक्रियाज भी क्षतिग्रस्त होकर दो भागों में बंट गया था। परिवार की सहमति करने के बाद इनका ऑपरेशन किया गया, जो 3 से 4 घंटे तक चला। मेडिकल भाषा मे इस ऑपरेशन को व्हिप्पल सर्जरी कहा जाता है। नयति मेडिसिटी इस क्षेत्र में व्हिप्पल सर्जरी करने वाला पहला अस्पताल बन गया है।

ऑपरेशन करने वाली चिकित्सकीय टीम में जीआई सर्जरी विभाग के डॉ. सुरेन्द्र शर्मा का विशेष योगदान रहा।

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