नयति में दो दिन के बच्चे की रीढ़ की हड्डी पर नसों से उलझी हुई गांठ का हुआ सफल ऑपरेशन

नयति स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग बना एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर

मथुरा 7 जून। टूंडला निवासी बॉबी ने रेलवे हॉस्पिटल, टूंडला में बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद डॉक्टरों ने देखा कि बच्चे की पीठ के निचले हिस्से में काफी बड़ा फोड़ा है, जो बच्चे के जीवन के लिये काफी खतरनाक है। यह पता चलने पर बच्चे के परिजन उसके इलाज के लिये नयति मेडिसिटी लेकर आये, जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ रविन्द्र श्रीवास्तव और डॉ विमल कुमार ने बताया कि जब बच्चा हमारे यहां लाया गया था तो वह सिर्फ एक दिन का था। उसकी पीठ पर बहुत बड़ी गांठ दिखाई पड़ रहा था, पर उस गांठ के अलावा बच्चे के शरीर की अन्य परेशानियों को जानने के लिए बच्चे की अल्ट्रासाउंड तथा एमआरआई करने की जरूरत थी, उसमें भी काफी चैलेंज था। बच्चे की एमआरआई केवल एनेस्थीसिया देकर ही की जा सकती थी, और बच्चे को एनेस्थीसिया भी बार बार नहीं दी जा सकती, इसलिए हमने तय किया कि बच्चे को केवल एक बार ही एनेस्थीसिया देंगे और वहीं उसकी अल्ट्रासाउंड, एमआरआई (ब्रेन और स्पाइन) की रिपोर्ट को देखकर तुरंत उसका ऑपरेशन कर देंगे।

एमआरआई की रिपोर्ट देखकर पता चला कि बच्चे गांठ में पानी भरा हुआ है और दिमाग तक जाने वाली नसें आपस में काफी उलझी हुई हैं, इसके अलावा बच्चे के दिमाग में भी पानी भरा था। हमने सबसे पहले बच्चे के दिमाग से पानी निकालने के लिए बच्चे के सिर से पेट तक वीपी शंट डाला और उसके बाद गांठ का ऑपरेशन करके उलझी हुई नसों को ठीक कर दिया। दो दिन पीडियाट्रिक आइसीयू में रखने के बाद बच्चे को वापस घर भेज दिया। इस बच्चे के ऑपरेशन में हमारे यहां मौजूद एक ही छत के नीचे सभी सुविधाओं का काफी योगदान रहा, इनकी वजह से हमारा समय बिल्कुल खराब नहीं हुआ और हम बच्चे की सफल सर्जरी कर पाए।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो फिजिशियन डॉ नीलेश गुप्ता ने बताया कि इस तरह की परेशानी को मेडिकल भाषा में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं, जो फोलिक एसिड (एक प्रकार का विटामिन बी) की कमी से होती है। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचने का सबसे आसान तरीका प्रेगनेंसी से पहले या प्रेगनेंसी के दौरान सही मात्रा में फोलिक एसिड का सेवन होता है। गर्भवती महिलाओं को समय समय पर अपनी तथा अपने बच्चे की जांच योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञ से कराते रहना चाहिये। जागरूकता की कमी अथवा लापरवाही से ही इस तरह की परेशानी होती है।

नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि हमारे यहां का न्यूरो सर्जरी विभाग एक बेहतरीन एन्ड टू एन्ड स्ट्रोक मैनेजमेंट सेंटर है। नेशनल हाइवे पर होने के कारण हमारे यहां ट्रॉमा के मरीज अक्सर आते रहते हैं। ट्रॉमा के मरीज को इलाज की तत्काल जरूरत होती है और मरीज को न्यूरो सर्जरी के अलावा ब्लड बैंक, ऑर्थोपेडिक, कार्डियक, जीआइ सर्जरी आदि अन्य विभागों की जरूरत भी पड़ सकती है, जिसके लिए हमारे यहां के हर विभाग में 24ग्7 डॉक्टर उपस्थित रहते ही हैं।

नयति स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग में अब मथुरा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि अन्य प्रदेशों से भी मरीज आकर अपना इलाज करा रहे हैं। लोगों का नयति पर बढ़ता विश्वास हमारे यहां के देश के बेहतरीन डॉक्टरों तथा विश्वस्तरीय सुविधाओं के कारण ही संभव हो पाया है। हमारे यहां अब तक 2 दिन के बच्चे से 96 वर्ष के बुजुर्ग की सफल न्यूरो सर्जरी हो चुकी है।

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