नयति में बिना ऑपरेशन हुआ दिल में छेद का इलाज

मथुरा 2 अगस्त। नयति मेडिसिटी ने इस क्षेत्र में पहली बार बिना चीरे और ऑपरेशन के दिल के छेद एएसडी डिवाइस क्लोजर विधि द्वारा बंद कर दिये। आमतौर पर दिल का छेद बंद करने के लिए ऑपरेशन किया जाता है, जिसके बाद मरीज को कुछ दिनों तक अस्पताल में ही रहना पड़ता है, किन्तु इस विधि से इलाज के बाद मरीज दूसरे दिन से ही अपने काम पर जा सकता है।

23 वर्षीय शिरीष कुमार सांस फूलने की परेशानी के साथ काफी दिन पहले नयति आये थे। जांच करने पर पता चला कि बचपन से उनके दिल में छेद है। उन्हें तभी इसका इलाज कराने को कहा गया, लेकिन उन्होंने नहीं कराया और दिल्ली जाकर अन्य बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों से मिले, जहां उन्हें बीमारी तो यही बताई गई पर खर्च नयति से काफी अधिक था। उसके बाद वे दोबारा नयति आये और यहां आकर उन्होंने अपना इलाज कराया। अब शिरीष कुमार किसी भी सामान्य इंसान की तरह बिल्कुल स्वस्थ हैं।

नयति हैल्थकेयर के ग्रुप सीईओ डॉ आरके मनी ने कहा कि नयति हार्ट सेंटर में बेहतरीन एवं विश्वस्तरीय तकनीक एवं डॉक्टरों की टीम मौजूद हैं जो 24 घंटे हृदय से संबंधित हर प्रकार की बीमारी का इलाज करने में सक्षम हैं। हृदय संबंधी परेशानी होने पर तत्काल इलाज की जरूरत होती है, और समय पर कराये गए इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

नयति मेडिसिटी के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ एच एस सोमनाथ ने कहा कि हृदय रोगियों के इलाज के लिए समय का बहुत महत्व होता है, इलाज के दौरान होने वाली जांचों अथवा ब्लड आदि के लिए अस्पताल परिसर से बाहर नहीं जाना पड़ता क्योंकि नयति में एक ही छत के नीचे इलाज के दौरान उपयोग होने वाली सभी सुविधाएं सीटी स्कैन, एमआरआई, इको, लैब, ब्लड बैंक आदि मौजूद हैं, जिससे कम समय में इलाज होना संभव हो पाता है।

 

इनका इलाज करने वाले नयति मेडिसिटी के हृदय रोग विभाग के डॉ जगदानंद झा एवं डॉ रोहित तिवारी ने बताया कि दिल में छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) हृदय की ऐसी बीमारी है जो आमतौर पर बचपन में ही पता चल जाती है। कई बार कई वर्षों तक इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चल पाता। शिरीष को भी 23 साल की उम्र में आकर इस बीमारी का पता चला। इस बीमारी का ऑपरेशन द्वारा इलाज संभव है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक नई तकनीक एएसडी डिवाइस क्लोजर द्वारा भी इसका इलाज काफी सफलतापूर्वक किया जा रहा है, जिसमें जांघ की नस द्वारा बिना चीरे के दिल का छेद बंद कर दिया जाता है और मरीज दूसरे दिन से ही अपने काम पर जा सकता है। अभी तक इस तकनीक द्वारा देश के कुछ ही बड़े अस्पतालों में इसका इलाज किया जा रहा था, अब नयति में भी यह सुविधा उपलब्ध है।

नयति में अपने दिल के छेद का इलाज कराने वाले शिरीष कुमार ने कहा कि पिछले 2 साल से मैं सांस की समस्या से परेशान था। आगरा, मथुरा और अलीगढ़ के कई बड़े डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कोई मेरी बीमारी पकड़ तक नहीं पाया। नयति आकर जरूरी जांच करने के बाद डॉक्टरों ने मेरे दिल मे छेद बताया। बीमारी का पता चलने के बाद मैंने दिल्ली के बड़े अस्पतालों से भी संपर्क किया लेकिन वहां का खर्च नयति से काफी अधिक था, तब मैंने अपना इलाज नयति में ही कराने का फैसला किया। यहां की सबसे खास बात यह थी कि मेरा इलाज पूरी कार्डियक टीम ने मिलकर किया, जबकि दिल्ली में एक ही डॉक्टर मेरा इलाज करने वाला था।

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