नयति में संतों की वाणी से संपन्न हुआ अध्यात्म उत्सव

 मथुरा, 31st July, 2016:  हमारा धर्म हमारे अध्यात्म का उत्सव ही तो है! और मेरा धर्म है, नयति अस्पताल और ब्रज की सेवा। ये उद्गार नयति अस्पताल की चेयरपरसन नीरा राडिया ने रविवार को नयति मल्टी सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल में अध्यात्म उत्सव के भव्य आयोजन के अवसर पर व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि नयति अस्पताल मेरे द्वारा संजोया गया एक सपना था जो अब साकार हो चुका है और मेरा परम सौभाग्य है कि नयति को मथुरा में खोलकर मैं ब्रजवासियों के सुख दु:ख में खुद को भागीदार पाती हूँ।

 

अतिथियों को संबोधित करते हुए नयति की चेयरपरसन नीरा राडिया ने कहा “यहाँ उपस्थित हमारे तीन महान संतों ने भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के लाखों लोगों को अध्यात्म की शक्ति और ऊर्जा से परिचित कराया है जिससे उनका पूरा जीवन ही बदल गया। नयति अस्पताल के माध्यम से हम ब्रजवासियों को विश्वस्तर की चिकित्सा पद्धति, ब्रज में ही उपलब्ध करा रहे हैं और एक अच्छे बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। हमारा प्रयास है: पहुँच के अंदर इलाज का ख़र्चा, विश्वस्तरीय इलाज, बेहतरीन डॉक्टर, आधुनिकतम तकनीक और सबसे ऊपर समर्पित सेवाभाव।

 

अपने उद्बोधन में श्रीवत्स गोस्वामी जी ने कहा कि ब्रजक्षेत्र को नयति जैसे अस्पताल की महती आवश्यकता थी। नीरा राडिया जी का उद्देश्य यदि अस्पताल के माध्यम से पैसा कमाना ही होता तो वे किसी महानगर में अस्पताल खोलतीं मथुरा में नहीं। मेरा मानना है कि उनका प्रथम उद्देश्य ब्रजवासियों की सेवा करना ही है।

 

इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी अवधेशानन्द जी ने कहा कि नयति के मूल में भी गुरु सत्ता का वास है। इसलिये रोगी यहाँ तन और मन को स्वस्थ करा कर ही जाएंगे। मैंने देश-विदेश के काफी अस्पताल देखे किन्तु मुझे व्यक्तिगत रूप से नयति इसलिए अच्छा लगा कि यहाँ की चेयरपरसन नीरा राडिया व्यक्तिगत रूप से मरीजों को जानती हैं तथा उनके सुख-दु:ख में खड़ी रहती हैं।

 

स्वामी ज्ञानानंद जी ने अपने संबोधन में कहा कि संसार में जितने भी प्राणी हैं उनमें मनुष्य का जीवन सर्वोपरि है। पहला सुख निरोगी काया कहा गया है और शरीर के स्वस्थ रखने में नयति अस्पताल अपनी महत्ती भूमिका निभा रहा है। सत्संग तथा कुसंग के अंतर पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जहाँ जाकर बुद्धि बिगड़ जाए वो कुसंग है और जहाँ जाकर बुद्धि संभल जाए वो सत्संग है। मनुष्य को संतों का समागम निरंतरता से करना चाहिए।

 

परम आदरणीय गुरु शरणानन्द जी ने कहा कि हमें अपनी जीवनचर्या इस प्रकार की बनानी चाहिए कि हम बीमार पड़ें ही न। उन्होंने कहा कि नयति चिकित्सालय नहीं सेवालय है। सही मायने में कहा जाए तो नयति अस्पताल बिहारी जी के सेवकों की सेवा कर रहा है।

 

इस अवसर पर नयति के को-प्रमोटर राजेश चतुर्वेदी ने कहा कि स्कूल तथा कॉलेजों से हमें केवल शिक्षा प्राप्त होती है जिनसे हम अपनी आजीविका चला सकते हैं किन्तु ज्ञान हमें गुरुओं से ही प्राप्त होता है। संतों के समागम के बिना विवेक और ज्ञान का आना असंभव है।

 

नयति अस्पताल के सीईओ (मेडिकल) डॉ. आर.के.मणि अस्पताल रिपोर्ट कार्ड पर नज़र डालते हुए कहा कि पिछले 5 महीने में प्रतिदिन नई चुनौती आईं किन्तु उनका सामना सहयोगी डॉक्टरों एवं सहयोगियों के साथ मिलकर किया। उत्तम तथा किफायती उपचार के साथ गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। बड़े शहरों की अपेक्षा हम यहाँ सस्ता एवं किफायती इलाज कर रहे हैं। इस बीच 28 हज़ार से अधिक मरीजों ने ओ.पी.डी. में दिखाया। 3 हज़ार 2 सौ से अधिक मरीज भर्ती रहे, 600 मरीजों की सर्जरी, 900 से अधिक मरीजों की डायलिसिस, 200 मरीजों की कीमोथेरेपी, 1200 से अधिक गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का जीवन बचाया गया। साथ ही साथ लगभग 3 हज़ार 2 सौ से अधिक मरीज इमरजेंसी में भर्ती हुए।

 

इस कार्यक्रम में कुछ मरीजों ने भी अपने नयति अस्पताल के अनुभव व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन हरीश अरोड़ा ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से नयति अस्पताल के सभी डॉक्टर, नगर पालिका अध्यक्षा मनीषा गुप्ता, मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सी.पी. सिंह, अजय सिंह एडवोकेट, नंद किशोर एडवोकेट, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, मोहन स्वरूप भाटिया, डॉ. अशोक अग्रवाल, उदयन शर्मा, राजीव अग्रवाल, प्रमोद गर्ग आदि उपस्थित थे।

 

 

विस्तृत जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें:

शिवानी शर्मा / नेहा सिंह

नयति हेल्थकेयर एंड रिसर्च

91 9871741891 /91 9910638881

shivani.sharma@nayatihealthcare.com/ neha.singh@nayatihealthcare.com

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