नयति मेडिसिटी के ईएनटी विभाग ने गले में फंसा 4 सेमी लम्बा मछली का कांटा निकाला

मथुरा 28 मई। मछली खाने के बेहद शौकीन मथुरा की घनी आबादी निवासी बसन्त दास (काल्पनिक नाम) आज से चार दिन पहले बड़े चाव से मछली खा रहे थे। तभी उनके गले में अचानक असहनीय दर्द का अनुभव हुआ। नयति मेडिसिटी आने से पहले उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। असहनीय दर्द की वजह से वे कुछ भी खा पी नहीं पा रहे थे और उनके दर्द की शिकायत भी लगातार बढ़ती जा रही थी। तब किसी की सलाह पर वे नयति मेडिसिटी आये और वहां जाकर ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष कुमार जैन से मिले। डॉ. मनीष ने उनकी जांच करने के बाद एक ऑपरेशन किया और उनके गले में 4 सेमी का कांटा जो मछली खाते समय उनके गले में चला गया था, उसे निकाल दिया। अब बसन्त दास बिल्कुल स्वस्थ हैं।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आर के मनी ने कहा कि हमारे यहां के विभिन्न विभागों के डॉक्टर नित नए आयाम रच रहे हैं, जिसकी वजह से ब्रजवासियों का विश्वास नयति पर बढ़ रहा है। हमारा शुरू से यही प्रयास रहा है कि देश के योग्य चिकित्सक तथा सर्वोत्तम तकनीक नयति मेडिसिटी का हिस्सा बन सकें, और हम अपने प्रयास में सफल भी हुए हैं। नयति मेडिसिटी का ईएनटी विभाग तथा इसके प्रमुख डॉ. मनीष कुमार जैन पूर्व में भी कई सफल ऑपरेशन कर चुके हैं। मैं इन्हें तथा इनकी टीम को तहेदिल से बधाई देता हूँ।

नयति मेडिसिटी के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ मनीष कुमार जैन ने बताया कि जब बसन्त हमारे पास आये थे तो दर्द की अधिकता की वजह से तड़प रहे थे। दर्द होने की वजह से वे कई दिन से खाना भी नहीं खा पा रहे थे। उनकी परेशानी को देखते हुए हमने उनकी फाइबर ऑप्टिक लैरिंगोस्कोपी (एफओएल) के माध्यम से जांच की तो पता चला कि इन्होंने जब मछली खाई थी तब उसे खाते समय मछली का लगभग 4 सेमी लम्बा कांटा उनके गले में चला गया था और खाने तथा सांस की नली के बिल्कुल ऊपर जाकर फंस गया था, जिसकी वजह से बसन्त को असहनीय दर्द की शिकायत थी और वे कुछ खा भी नहीं पा रहे थे। हमने तत्काल उनका ऑपरेशन करने का फैसला किया। माइक्रो लैरिंगोस्कोपी द्वारा सर्जरी करने के बाद उनके गले में फंसा कांटा निकाल दिया गया है। अब बसन्त बिल्कुल स्वस्थ हैं और कल तक अपने घर जा सकते हैं।

ऑपरेशन करने में डॉ. मनीष कुमार जैन के साथ डॉ. श्वेता के महाजन की भी प्रमुख भूमिका रही।

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