नयति मेडिसिटी में वूमेंस डे पर विचार गोष्ठी एवं निशुल्क चिकित्सा शिविर का हुआ आयोजन

12 March, 2017

मथुरा 08 मार्च। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं में कई तरह की बीमारियां घर कर रही हैं, इसी को लेकर वूमेंस डे के अवसर पर नयति मेडिसिटी में एक विचार गोष्ठी एवं निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया जिसमें आसपास के क्षेत्रों से आयी विभिन्न संगठनों की महिलाओं ने भाग लिया तथा अपने स्वास्थ्य की जाँच करायी।

कार्यक्रम में महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य सम्बन्धी विषय जैसे अवसाद, घुटनों का दर्द, भूलने की बीमारी तथा स्त्रियों से सम्बंधित रोगों पर चर्चा हुई। विचार गोष्ठी में प्रमुख रूप से डॉ. वर्णा वेणुगोपाल, डॉ.नीरजा, डॉ. ज्योति गोयल, डॉ. स्वप्ना बी. मौजूद थीं। विचार गोष्ठी का संचालन खजानी वुमेन्स की शिप्रा राठी ने किया।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि नारी शक्ति का हमारे समाज में बहुत बड़ा योगदान है। नारी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है…. वह एक बेटी है, बहन है, बहू है, माँ है और पत्नी भी है जिसकी वजह से हर कदम पर उसकी जिम्मेदारियां बदलती और बढ़ती रहती हैं। आज के परिवेश में नारी घर के साथ बाहर की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही है। इन सब जिम्मेदारियों को पूरा करते-करते वह अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज करती रहती है। एक स्वस्थ नारी अपने घर को, समाज को और देश को स्वस्थ बना सकती है। नारी जब स्वस्थ रहती है तो वह समाज में भी एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। नयति मेडिसिटी पहले दिन से ही नारी के स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढाने के लिए स्वास्थ्य शिविर करते आये हैं और आगे भी करते रहेंगे ।

उत्तर प्रदेश में प्रसव के समय माँ की मृत्यु दर सारे देश ने सबसे अधिक है इसलिये महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच करा लेनी चाहिए।

नयति मेडिसिटी के प्रसूति विभाग की प्रमुख डॉ. वरना वेणुगोपाल राव ने कहा कि आज हम लोग बहुत ज्यादा साधन संपन्न हो गये हैं जिसकी वजह से हम लोगों में आराम तलबी भी आ गयी है। आज हमने सीढियाँ चढ़ना छोड़ दिया है, जमीन पर बैठना बन्द कर दिया है और भी कई काम ऐसे है जिन्हें हम छोड़ अथवा बन्द कर चुके हैं जिसकी वजह से आजकल महिलाओं में नॉर्मल डिलीवरी की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं। हम सभी को गर्भावस्था के दौरान अपने शरीर को कम से कम आराम देकर काम करते रहना चाहिए जिससे सामान्य डिलीवरी हो सके।

नयति मेडिसिटी के मनोचिकित्सक विभाग की प्रमुख डॉ. स्वप्ना बी ने कहा कि काम की अधिकता की वजह से कभी कभी महिलाओं में डिप्रेशन की शिकायत हो जाती है जो एक सामान्य बात है किन्तु यदि यह समस्या लम्बे समय तक जारी रहे तो देर नहीं करनी चाहिए और तुरन्त किसी मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए।

नयति मेडिसिटी के इंटरनल मेडिसिन की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ज्योति गोयल ने कहा कि पिछले एक वर्ष में हमने देखा है कि इस क्षेत्र की महिलाओं में डायबिटीज की समस्या पायी जा रही है और लोग जब तक अपना इलाज कराने आते हैं तब तक डाइबिटीज काफी बढ़ चुकी होती है। उन्होंने कहा कि हम सभी को 35 वर्ष की उम्र के बाद अपनी डाइबिटीज की जाँच अवश्य करा लेनी चाहिए जिससे यदि कोई समस्या हो तो समय रहते उसका इलाज या परहेज शुरू किया जा सके।

इस अवसर पर करीब 250 से अधिक महिलाओं ने निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श और स्वास्थ्य जांच का लाभ उठाया।

 

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