ब्रेन हेमरेज के मरीज को नयति अस्पताल ने दिया जीवनदान

05 July, 2016

मथुरा, 05 जुलाई, 2016 : नयति मल्टी स्पेश्यलिटी अस्पताल ने मथुरा के एक मरीज के राइट पेरिटल स्पॉन्टियस इंट्रासेरीब्रल हेमरेज का सफलतापूर्वक इलाज कर उसे नया जीवनदान दिया है।

30 साल के पुष्पेंद्र शर्मा मथुरा जिले के ओल के रहने वाले हैं। कुछ दिन पहले उन्हें अचानक सिर में असहनीय दर्द हुआ और उनको बेहोशी छाने लगी। उन्हें भरतपुर के स्थानीय अस्पताल में दिखाया गया और उनके मस्तिष्क सीटी स्कैन करने पर पता चला की ब्रेन के दाहिने हिस्से में ब्रेन हेमरेज हुआ था (राइट पेरिटल स्पॉन्टियस इंट्रासेरीब्रल हेमरेज) ।

पुष्पेंद्र की जांच करने पर स्थानीय डॉक्टर ने उन्हें नयति अस्पताल जाने की सलाह दी। मरीज 11 जून को नयति अस्पताल में जांच कराने आए। यहाँ आने पर मरीज़ का पुन: सीटी स्कैन किया गया जिसमें ब्लड क्लाट का साइज़ बढ़ा हुआ पाया गया। खून के इस जमे हुए थक्के को निकालने के लिए 12 जून को उनका आपरेशन किया गया जो सफल रहा। मरीज़ को 21 जून को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वे स्वस्थ हैं।

युवावस्था में ब्रेन हेमरेज गंभीर बीमारी का लक्षण है जो कि संभवत: मरीज के मस्तिष्क में जन्म से ही मौजूद रक्तनलिकाओं के गुच्छे की वजह से भी हो सकता है। इस प्रकार की गंभीर स्थितियों का उपचार विकल्प पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न्यूरोसर्जरी की उन्नत सुविधाओं के उपलब्ध होने का सूचक है। यहां न्यूरोसर्जरी सुविधा के उपलब्ध होने के बाद से अब तक करीब ढाई दर्जन मामलों का सफल इलाज किया जा चुका है। अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में पहुंचा हर मामला बेहद चुनौतीपूर्ण और जटिल था।

डॉ एस के गुप्ताए प्रमुखए मिनीमैली इन्वेसिव न्यूरोसर्जरी एंड न्यूरोइंटरवेंशनल सर्जरीए नयति मल्टी सुपर स्पेश्यलिटी अस्पतालए मथुरा ने बताया बे्रन हेमरेज एक प्रकार का स्ट्रोक हैं ओर जीवन शैली में बदलाव करके हम बे्रन हेमरेज से कुछ हद तक बचाव कर सकते है। इसी प्रकार का एक मरीज जिसको बे्रन हेमरेज हुआ था आपरेशन करके बे्रन हेमरेज से निजात दिलाई। देश में पिछले कुछ सालो बे्रन हेमरेज के मामले बढ रहे है ज्यातर मामलो में जान का खतरा रहता है।

बे्रन हेमरेज

दिमाग में जाने वाली कोई धमनी फठ जाने के कारण ऊतकों के चारों और खून के रिसाव शुरू होने पर बे्रन हेमरेज हो सकता है। खून का रिसाव दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इससे रोगी की मौत भी हो सकती है।

कारण

चोट लगने से बे्रन हेमरेज होना काॅमन कारण है। लम्बे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से भी ब्रेन हेमरेज हो सकता है। लगातार हाई ब्लड प्रशर रहने से खून की नलिकाओं की दीवारें कमजोर पड जाती है।

जन्म के समय से ही दिमाग के आसपास की ब्लड वेसेल्स का कमजोर होना इसका पता भी तभी लग पाता है जब इसके लक्षण सामने आने लगते हैं। रक्तवाहिका रूग्णता ऐसी विकृति हैं

जो उम्र बढने या रक्तचाप के दौरान बढने लगती है जो बाद में ब्रेन हेमरेज का कारण बन जाती है।

लक्षण

असहनीय सिरदर्द हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होना। उल्टियां होना या जी मचलाना दृष्टि में अन्तर शरीर के किसी अंग का सुन्न होना या गुदगुदी सी होना बोलने या समझने में परेशानी होना पढने लिखने में परेशानी महसूस होना संवेदना खत्म होना किसी चीज का टेस्ट पता न चलने जैसे स्थिति ब्रेन हेमरेज का लक्षण हो सकता है।

जाॅच

सीटीए बे्रन एन्जियोग्राफीए न्यूरोलाॅजीकल टेस्टए आंखों का परीक्षणए आॅप्टिक नर्व में सूजन दर्शाता है।

बचाव के कुछ उपाय

1. हाई ब्लेड प्रेशर का गम्भीरता से इलाज कराएं।

2. शराब न पीये।

3. धूम्रपान न करें

4. दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करें।

5. कार चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग करें।

6. अफीम गांजा चरस जेसे नशीले पदार्थ के सेवन से बचै।

7. यदि परिवार में किसी सदस्य को ब्रेन एन्यूरिज्म ;खून की नली का गुब्बाराद्ध या खून की नलियों का गुच्छा; ।तजमतपवअमदवने डंसवितउंजपवदद्ध है तो न्यूरो इन्टरवेन्सनल सर्जन के पास जाकर परीक्षण अवश्य करायें।


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