PRESS RELEASES

August 9, 2018

नयति के ईएनटी विभाग में तालू से 6×7 सेमी बड़ी गांठ को ऑपरेशन करके निकाला

  • 09 August, 2018

मथुरा । नयति मेडिसिटी में 32 वर्षीय महिला के तालू पर 6×7 सेमी बड़ी गांठ को ऑपरेशन करके सफलता पूर्वक निकाल दिया गया। नयति आने से पहले मरीज अपना इलाज कराने आगरा और जयपुर तक जा चुका था, जहां उसे कोई लाभ नहीं हुआ और गांठ भी लगातार बढ़ती जा रही थी।

4 वर्ष पूर्व हाथरस निवासी 32 वर्षीय निर्मला के मुंह में तालू पर एक छोटी गांठ हो गयी थी, जिसमें अब दर्द भी शुरू हो गया था। उनका खाना पीना, बोलना आदि बिल्कुल बंद हो गया था। किसी के बताने के बाद वे अपना इलाज कराने नयति मेडिसिटी आयीं और यहां आकर नयति के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ मनीष जैन से मिलीं। जिन्होंने जरूरी जांचों के बाद ऑपरेशन करके उनके तालू की गांठ निकाल दी।

उन्होंने बताया कि जांच करने के बाद पता चला कि निर्मला के तालू में 6×7 सेमी बड़ी गांठ है जो कैंसर नहीं है और इसे निकालना बेहद जरूरी है। समय रहते यदि यह गांठ न निकाली जाती तो यह बढ़ती रहती जिसकी वजह से इनकी सांस तथा खाने की नली पर दवाब पड़ता और इनके जीवन के लिए ये काफी खतरनाक हो सकती थी। अब निर्मला बिल्कुल स्वस्थ हैं।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आरके मनी ने कहा कि नयति में हर प्रकार की विश्वस्तरीय तकनीक तथा चिकित्सक मौजूद हैं जिनके कारण हम लोगों तक बेहतरीन इलाज उपलब्ध करा पा रहे हैं, वो भी महानगरों से कम खर्च में। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में जो भी नई तकनीक आएगी हम ब्रजवासियों के लिए उपलब्ध कराएंगे।

नयति में अपने ऑपरेशन के बाद निर्मला ने बताया कि नयति में आकर जब हम डॉ मनीष जैन से मिले तो उम्मीद की एक किरण नजर आयी और हमने अपना ऑपरेशन नयति में ही कराने का फैसला किया। अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ श्वेता के महाजन तथा डॉ अमित सिंघल भी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

August 6, 2018

नयति मेडिसिटी बना क्षेत्र का पहला एनएबीएच प्रमाणित हॉस्पीटल

  • 06 August, 2018

बेहतरीन चिकित्सा सेवाओं और उपचार गुणवत्ता के लिए किया प्रमाणित

मथुरा 6 अगस्त। नयति मेडिसिटी मथुरा को चिकित्सा क्षेत्र में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक उपचार प्रदान करने के चलते देश की सबसे विश्वस्नीय संस्था नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाईडर्स (एनएबीएच) द्वारा मान्यता दे दी गई है। इसी मान्यता के साथ नयति अब क्षेत्र का पहला एनएबीएच प्रमाणित हॉस्पिटल बन गया है। एनएबीएच संस्था के कड़े मानकों पर नयति मेडिसिटी पूर्ण रूप से खरा उतरा। इस मान्यता को देने से पहले संस्था ने उपचार प्रणाली, मरीजों की देखभाल, आधुनिक चिकित्सा सेवाएं जैसे तमाम मानकों पर परखा और पाया कि नयति मेडिसिटी मरीजों के उपचार के लिए एक सर्वोत्तम स्थान है।

इस अवसर पर नयति हेल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि मै काफी खुश हूं और यह खुशी में सभी ब्रजवासियों के साथ बांट रही हूं। जिनके प्यार और विश्वास के बिना यह संभव नही था। हम कृतज्ञ हैं कि अब आमजन और विश्वस्तरीय चिकित्सा के बीच की दूरी को कम करने के हमारे इस प्रयास को देश की सबसे विश्वस्नीय संस्था एनएबीएच ने भी मान्यता दे दी।एनएबीएच के कड़े मानकों पर खरा उतरना यह दर्शाता है कि नयति मरीजों के उपचार, उनकी देखभाल और विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर कितना प्रतिबद्व जिसके कारण लोगों का हम पर बढ़ता विश्वास हमें और प्रेरित करता है। मै यह विश्वास दिलाती हूं कि हमारी आमजन तक सुलभ, किफायती और विश्वस्नीय स्वास्थ सेवाओं को पहुंचाने की क्रांतिकारी मुहिम इसी प्रकार जारी रहेगी।

इस अवसर पर नयति हेल्थकेयर के सीईओ डॉ. आर के मनी ने कहा कि एनएबीएच द्वारा दी गई मान्यता इस बात का प्रमाण है कि नयति में मौजूद स्वास्थ सेवाएं, विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम और तमाम संसाधन सर्वश्रेष्ठ विश्वस्तर के हैं।

August 6, 2018

Nayati Medicity, Mathura receives prestigious NABH accreditation for providing high quality healthcare

  • 06 August, 2018

First hospital in the region to receive this coveted certification

New Delhi, 6th August 2018:: Nayati Medicity, Mathura, the flagship hospital of Nayati Healthcare received the prestigious accreditation from the National Accreditation Board for Hospitals and Healthcare Providers (NABH), the highest recognition for providing quality patient care and safety. With this, Nayati Medicity becomes the first hospital in the region to receive this certification. NABH recognizes hospitals for fulfilling high standards in delivering quality healthcare to its patients. The accreditation recognizes the fact that the hospital meets strict standards of quality and safety set by the esteemed body.

On the occasion Ms. Niira Radia, Chairperson Nayati Healthcare, said “It brings a great sense of fulfillment and happiness that within two and half years of starting its operations, Nayati Medicity has become one of the most sought after healthcare institutions, in terms of high quality patient care, bringing in the world’s best infrastructure and clinical expertise. This would not have been possible without the overwhelming love and support we received from the people of the region.

NABH recognition is a landmark and a testimony to our effort of bridging the gap and taking world class state-of-the-art medical facilities to people living in tier II and tier III cities of India. It reinforces our commitment of making quality healthcare accessible, affordable and accountable to communities who need it the most .”

Dr. R.K. Mani, CEO Nayati Healthcare, said, “The NABH accreditation is a major milestone for any healthcare provider as it recognizes the fact that the facilities meet the highest norms of quality and safety standards. Nayati Medicity provides comprehensive medical facilities in all disciplines and specialized verticals of healthcare. With eminent doctors leading each practice, we are committed to delivering world class healthcare to an increasing number of patient base at an affordable price point, while continuing to strive for excellence.”

Nayati Medicity, Mathura, commenced operations in February 2016 and has emerged as one of the finest healthcare providers in the country. The 351 bed hospital has seven Centers of Excellence and 14 Specialty departments including Cardiac Sciences, Oncology, Orthopedics and Joint Replacement, Critical Care, Renal Sciences, MAS GI & Bariatric Surgery, Neurosciences, Pulmonary medicine, Pediatrics & Neonatology, Trauma and Emergency. These centers are supported by the region’s most advanced Intensive Care units comprising of MICU, CCU, SICU, NICU and PICU. Located two and half hours from the Delhi airport, the hospital has emerged as a preferred choice not just for residents of Uttar Pradesh and the adjoining states, but also for patients from other parts of the country and abroad. Owing to the huge demand, the hospital is undergoing major capacity expansion from the existing 351 beds to 775 beds, making it one of the largest multi super speciality hospitals in Uttar Pradesh.

August 4, 2018

नयति मेडिसिटी में रविवार को मिल सकेगा निशुल्क परामर्श

  • 04 August, 2018

मथुरा 4 अगस्त। अच्छा स्वास्थ्य सबका हक की अपनी सोच को ध्यान में रखते हुए नयति मेडिसिटी समाज के हर तबके तक बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चाहता है। नयति द्वारा समय समय पर विभिन्न स्थानों पर हैल्थ कैम्प एवं जागरूकता कार्यक्रम आदि भी किये जाते रहे हैं, उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए नयति द्वारा नयति मेडिसिटी में रविवार 5 अगस्त को नयति में मौजूद सभी स्पेशियलिटी की ओपीडी (परामर्श) 11 बजे से 4 बजे तक निशुल्क किया जा रहा है।

निःशुल्क ओपीडी में नयति मेडिसिटी के मेडिसिन विभाग, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, कैंसर विभाग, यूरोलॉजी विभाग, हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग, किडनी एवं गुर्दा रोग विभाग, हृदय रोग विभाग, नवजात शिशु एवं बाल रोग विभाग, न्यूरो सर्जरी एवं न्यूरो मेडिसिन विभाग, ईएनटी विभाग, डेंटल विभाग, नेत्र रोग विभाग, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग, क्रिटिकल केयर, श्वसन रोग विभाग आदि अन्य विभागों के डॉक्टर निशुल्क परामर्श देंगे। इसके अलावा सीबीसी एवं ग्लूकोस रैंडम की जांच भी की जाएगी जो नि:शुल्क रहेगी। फ्री ओपीडी एवं जांचों का लाभ प्राप्त करने के लिए 0565-6675500 पर फोन करके रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

August 2, 2018

नयति में बिना ऑपरेशन हुआ दिल में छेद का इलाज

  • 02 August, 2018

मथुरा 2 अगस्त। नयति मेडिसिटी ने इस क्षेत्र में पहली बार बिना चीरे और ऑपरेशन के दिल के छेद एएसडी डिवाइस क्लोजर विधि द्वारा बंद कर दिये। आमतौर पर दिल का छेद बंद करने के लिए ऑपरेशन किया जाता है, जिसके बाद मरीज को कुछ दिनों तक अस्पताल में ही रहना पड़ता है, किन्तु इस विधि से इलाज के बाद मरीज दूसरे दिन से ही अपने काम पर जा सकता है।

23 वर्षीय शिरीष कुमार सांस फूलने की परेशानी के साथ काफी दिन पहले नयति आये थे। जांच करने पर पता चला कि बचपन से उनके दिल में छेद है। उन्हें तभी इसका इलाज कराने को कहा गया, लेकिन उन्होंने नहीं कराया और दिल्ली जाकर अन्य बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों से मिले, जहां उन्हें बीमारी तो यही बताई गई पर खर्च नयति से काफी अधिक था। उसके बाद वे दोबारा नयति आये और यहां आकर उन्होंने अपना इलाज कराया। अब शिरीष कुमार किसी भी सामान्य इंसान की तरह बिल्कुल स्वस्थ हैं।

नयति हैल्थकेयर के ग्रुप सीईओ डॉ आरके मनी ने कहा कि नयति हार्ट सेंटर में बेहतरीन एवं विश्वस्तरीय तकनीक एवं डॉक्टरों की टीम मौजूद हैं जो 24 घंटे हृदय से संबंधित हर प्रकार की बीमारी का इलाज करने में सक्षम हैं। हृदय संबंधी परेशानी होने पर तत्काल इलाज की जरूरत होती है, और समय पर कराये गए इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

नयति मेडिसिटी के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ एच एस सोमनाथ ने कहा कि हृदय रोगियों के इलाज के लिए समय का बहुत महत्व होता है, इलाज के दौरान होने वाली जांचों अथवा ब्लड आदि के लिए अस्पताल परिसर से बाहर नहीं जाना पड़ता क्योंकि नयति में एक ही छत के नीचे इलाज के दौरान उपयोग होने वाली सभी सुविधाएं सीटी स्कैन, एमआरआई, इको, लैब, ब्लड बैंक आदि मौजूद हैं, जिससे कम समय में इलाज होना संभव हो पाता है।

 

इनका इलाज करने वाले नयति मेडिसिटी के हृदय रोग विभाग के डॉ जगदानंद झा एवं डॉ रोहित तिवारी ने बताया कि दिल में छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) हृदय की ऐसी बीमारी है जो आमतौर पर बचपन में ही पता चल जाती है। कई बार कई वर्षों तक इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चल पाता। शिरीष को भी 23 साल की उम्र में आकर इस बीमारी का पता चला। इस बीमारी का ऑपरेशन द्वारा इलाज संभव है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक नई तकनीक एएसडी डिवाइस क्लोजर द्वारा भी इसका इलाज काफी सफलतापूर्वक किया जा रहा है, जिसमें जांघ की नस द्वारा बिना चीरे के दिल का छेद बंद कर दिया जाता है और मरीज दूसरे दिन से ही अपने काम पर जा सकता है। अभी तक इस तकनीक द्वारा देश के कुछ ही बड़े अस्पतालों में इसका इलाज किया जा रहा था, अब नयति में भी यह सुविधा उपलब्ध है।

नयति में अपने दिल के छेद का इलाज कराने वाले शिरीष कुमार ने कहा कि पिछले 2 साल से मैं सांस की समस्या से परेशान था। आगरा, मथुरा और अलीगढ़ के कई बड़े डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कोई मेरी बीमारी पकड़ तक नहीं पाया। नयति आकर जरूरी जांच करने के बाद डॉक्टरों ने मेरे दिल मे छेद बताया। बीमारी का पता चलने के बाद मैंने दिल्ली के बड़े अस्पतालों से भी संपर्क किया लेकिन वहां का खर्च नयति से काफी अधिक था, तब मैंने अपना इलाज नयति में ही कराने का फैसला किया। यहां की सबसे खास बात यह थी कि मेरा इलाज पूरी कार्डियक टीम ने मिलकर किया, जबकि दिल्ली में एक ही डॉक्टर मेरा इलाज करने वाला था।

July 28, 2018

नयति ने मनाया विश्व हेपेटाइटिस दिवस

  • 28 July, 2018

203 लोगों की हुई निशुल्क जांच

जागरूकता ही बचाव है: डॉ. कपिल शर्मा

मथुरा 28 जुलाई। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर क्षेत्रीय नागरिकों को हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक करने के लिए नयति मेडिसिटी और नयति हॉस्पिटल के परिसर में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें 250 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर आए हुए लोगों में 203 लोगों की निशुल्क हेपेटाइटिस बी तथा सी की जांच भी की गई।

इस अवसर पर नयति के गैस्ट्रोएंटोलॉजिस्ट डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि विश्व मे 40 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस बी अथवा सी से पीड़ित हैं। हर वर्ष लगभग 13 लाख लोग इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं होता, केवल जांच कराने से ही इस बीमारी के बारे में जाना जा सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक रहते हुए अपनी हेपेटाइटिस की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए, जिससे समय रहते बचाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि कोई पीलिया, बुखार, लगातार थकावट या खुजली से पीड़ित है या किसी के परिवार में किसी अन्य सदस्य को हेपेटाइटिस बी अथवा सी की शिकायत है तो उसे तुरन्त अपनी जांच भी कर लेनी चाहिए। 10 में से 8 लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि वे हेपेटाइटिस बी या सी से ग्रस्त हैं। लीवर सिरोसिस होने का मुख्य कारण हेपेटाइटिस बी और सी हैं, जिसके होने के बाद लीवर फेल तक जाता है और लीवर को प्रत्यारोपित तक करना पड़ सकता है।

नयति मेडिसिटी के ब्लड बैंक के प्रमुख डॉ. नवीन अग्निहोत्री ने कहा कि नयति ब्लड बैंक उत्तरप्रदेश का एकमात्र पहला एनएबीएच द्वारा मान्यता प्राप्त ब्लड बैंक हैं, जहां उच्च गुणवत्ता वाली जांच के बाद ही ब्लड लिया और दिया जाता है। नयति ब्लड बैंक में किसी भी रक्तदाता का ब्लड लेने से पहले भी हैपेटाइटिस बी की जांच की जाती है, जिससे रक्तदाता को हैपेटाइटिस बी होने की दशा में ब्लड नहीं लेते और रक्तदाता का ब्लड बेकार नहीं जाता, साथ ही रक्तदाता को तुरंत परामर्श व परिवार के अन्य सदस्यों की जांच के लिए प्रेरित भी किया जाता है। इस प्रकार नयति ब्लड बैंक समाज में  हेपेटाइटिस बी के संक्रमण की रोकथाम के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।

हेपेटाइटिस ए, ई दूषित पानी तथा भोजन से, तथा हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमित खून तथा सुइयां अथवा असुरक्षित यौन संबंधों से हो सकता है।

July 18, 2018

नयति में महिला के हृदय के एक साथ तीन ओपन हार्ट सर्जरी कर तीन वॉल्व बदले|

  • 18 July, 2018

मथुरा । नयति मेडिसिटी में 30 वर्षीय महिला के हृदय के एक साथ तीन वॉल्व तीन ओपन हार्ट सर्जरी करके बदल दिए गए। इस प्रकार का जटिल ऑपरेशन करने वाला नयति मेडिसिटी इस क्षेत्र का पहला हॉस्पिटल बन गया है, अभी तक इतने बड़े ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली अथवा एनसीआर तक जाना पड़ता था। आगरा निवासी प्रीती के नौ साल पहले सांस फूलने की परेशानी हुई। डॉक्टरों को दिखाने पर पता चला कि उनका एक वॉल्व खराब है जिसे बदलने की आवश्यकता है, लेकिन उन्होंने अपना वॉल्व नहीं बदलवाया और दवाएं खाकर अपना काम चलाती रहीं। कुछ समय पहले उनकी तकलीफ काफी बढ़ गयी, जिसके बाद वह नयति आयीं, जहां कार्डियक सर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉ आदर्श कोप्पुला से मिलीं।

डॉ. कोप्पुला ने बताया कि मनुष्य के हृदय में चार वॉल्व होते हैं प्रीती की जब जांच की गयी तो पता चला कि इनके तीन वॉल्व ख़राब हैं जिनके बदलने की तुरंत आवश्यकता है। परिवार की सहमति के बाद हमने एक बार में तीन ओपन हार्ट सर्जरी करके तीनों वॉल्व बदल दिए। अब से नौ वर्ष पूर्व इनका एक वॉल्व खराब हुआ था जिसे बदलवा लेना चाहिए था, यदि उसी समय वॉल्व बदल गया होता तो इनके और वॉल्व ख़राब नहीं होते। इतने बड़े तथा जटिल ऑपरेशन को करने के लिए कई सुविधाओं एवं मशीनों की जरुरत पड़ती है जो नयति में मौजूद है। हमारे यहां ब्लड बैंक के साथ अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी मौजूद है, जिसकी वजह से हमको ऑपरेशन करने में काफी आसानी हुई। उन्होंने बताया कि अधिकतर महिलाओं में वॉल्व की शिकायत पायी जाती है जो अक्सर डिलीवरी के समय ही पता चलती है, इसलिए जैसे ही वॉल्व के ख़राब होने का पता चले तो तुरंत उसका उचित इलाज करा लेना चाहिए।

नयति हैल्थकेयर के सीईओ डॉ. आरके मनी ने कहा कि नयति में देश के विख्यात हार्ट स्पेशलिस्ट की टीम मौजूद है, जिसकी वजह से नयति हार्ट सेंटर में हृदय रोगों संबंधी हर वह उपचार मौजूद है जिसके लिए अब तक दिल्ली मुम्बई तक की यात्राएं करनी पड़ती थीं। किसी परिवार में जब कोई बीमार होता है तो इसका असर केवल बीमार पर नहीं पड़ता बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। बाहर जाकर इलाज कराने में तो तकलीफ और ज्यादा बढ़ जाती है। एक तो महानगरों में इलाज का खर्च अधिक है दूसरे वहां रहने का भी खर्चा बढ़ता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हमने तय किया था कि इलाज मरीज के पास पहुंचना चाहिए, जिसमें हम कामयाब हैं।

नयति मेडिसिटी के कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एच. एस सोमनाथ ने कहा नयति में हृदय रोग से संबंधित किसी भी आपातकाल के समय सीनियर कार्डियोलोजिस्ट एवं सीनियर कार्डियक सर्जन 24 घंटे मौजूद रहते हैं। आधुनिक उपकरणों और मेडिकल सुविधाओं से युक्त हमारे हार्ट सेंटर में देश के जाने माने चिकित्सक बाईपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर इम्प्लांट जैसी जटिल समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं।

मरीज प्रीती शर्मा ने कहा कि अब से नौ वर्ष पूर्व डॉक्टरों ने मेरा एक वाल्व खराब बता दिया था लेकिन मन में एक भय था कि यदि ऑपरेशन असफल हो गया तो मेरी छोटी सी बच्ची का क्या होगा। दवाओं के सहारे में अपना काम चला रही थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैं ना तो कोई काम कर पा रही थी और ना ही अपनी बच्ची का ध्यान रख पा रही थी। तब हम नयति आये, यहां पर डॉ आदर्श से हमारी बात हुई और हमने यहां अपना ऑपरेशन कराया। अब मुझे कोई परेशानी नहीं है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. विपिन गोयल एवं डॉ. प्रवीर सिन्हा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

July 12, 2018

नयति में मुंह के कैंसर का सर्जरी द्वारा हुआ सफल इलाज

  • 12 July, 2018

मथुरा 12 जुलाई। नयति मेडिसिटी में मुंह के कैंसर का एन ब्लॉक रिमूबल विधि द्वारा सर्जरी करके सफल इलाज किया गया। आमतौर पर इस प्रकार की सर्जरी में पूरा जबड़ा निकाल देते हैं, लेकिन नयति में विशेष तकनीक द्वारा केवल कैंसरग्रस्त जबड़े को ही निकाला गया है।

आगरा निवासी 52 वर्षीय पार्वती के मुंह में छाला हो गया था जो काफी इलाज कराने के बाद भी सही नहीं हुआ, उनका खाना पीना बंद हो गया था, मुंह भी पूरी तरह से नहीं खुल पा रहा था। तब वे नयति आकर नयति मेडिसिटी के कैंसर सर्जरी विभाग के डाइरेक्टर डॉ रविकांत अरोरा से मिलीं, जहां जब पार्वती के छाले की बायोप्सी करायी गयी तो पता चला कि उनके जबड़े के कुछ भाग में कैंसर है जिसकी सर्जरी करने की तुरंत आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद उनकी सर्जरी कर दी गयी।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के कैंसर विभाग के अध्यक्ष डॉ (प्रो.) शान्तनु चौधरी ने कहा कि सही समय पर कराये गये उचित इलाज द्वारा कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है। शरीर में किसी हिस्से में रक्तस्राव अथवा कोई गांठ, ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो, शौच का कड़ा होना आदि लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कैंसर रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

नयति में हर उम्र के व्यक्ति एवं किसी भी प्रकार के कैंसर से सम्बंधित हर वह इलाज मौजूद है जिसके लिए अब तक दिल्ली और मुम्बई तक जाना पड़ता था। नयति में आने वाले किसी भी मरीज के बेहतरीन इलाज के लिए हमारे यहां के अलग अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मिलकर निर्णय लेती है, जिससे मरीज को सटीक इलाज मिल सके।

नयति मेडिसिटी के कैंसर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. रविकांत अरोरा ने बताया कि पार्वती के ऑपरेशन का जब हमने प्लान किया तब यह निश्चय किया कि हम इनका पूरा जबड़ा नहीं निकालेंगे बल्कि जितने भाग में कैंसर फैला है वही भाग निकालेंगे, यह करना काफी जटिल था किंतु हमने यही किया। हमने उनके कैंसरग्रस्त जबड़े का ऑपरेशन एन ब्लॉक रिमूबल विधि से किया और जीभ की त्वचा से खाली हुई जगह को भर दिया, ऑपरेशन के बाद इनको रेडियेशन एवं कीमोथैरेपी भी दी गयी, अब पार्वती बिल्कुल स्वस्थ है।

July 5, 2018

नयति में महिला के सिर से माइक्रोस्कोपिक विधि से 5X5 सेमी बड़ा ट्यूमर निकाला

  • 05 July, 2018

मथुरा । नयति मेडिसिटी के डॉक्टरों ने 50 वर्षीय  महिला के सिर से 5X5 सेमी का ट्यूमर माइक्रोस्कोपिक विधि द्वारा ऑपरेशन करके सफलतापूर्वक निकाल दिया।

अलीगढ निवासी 50 वर्षीय निर्मला पिछले 4 वर्षों से सिर दर्द से पीड़ित थीं। उन्होंने डॉक्टरों को दिखाया तो उनके सिर में एक ट्यूमर बताया, साथ ही यह भी कहा कि यदि इसका ऑपरेशन किया गया या इस ट्यूमर को छेड़ा गया तो शरीर के एक भाग को लकवा मार सकता है या कोई और साइड इफैक्ट भी हो सकता है। यह सुनकर वह घबरा गयीं और उन्होंने अपने ट्यूमर का ऑपरेशन कराने का विचार त्याग दिया। सिर दर्द होने पर वे दर्द निवारक दवा ले लेती थीं और इसी प्रकार अपना जीवन बिता रही थीं। कुछ समय पहले उर्मिला के हाथपैर सुन्न होने शुरू हो गए, अक्सर उल्टियां होने लगीं, चेहरे पर टेढ़ापन आ गया था और निगाह भी काफी कमजोर हो गयी थी। तब वे नयति मेडिसिटी आयीं और न्यूरो विभाग के डॉ रविंद्र श्रीवास्तव से मिले, जो कई वर्ष अपनी सेवाएं एम्स दिल्ली में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जहां उनकी जरुरी जांचें करायी गयी तो पता चला कि उनके सिर में जो ट्यूमर था अब काफी बड़ा (5X5 सेमी का) हो गया है और सिर में पानी भी भर गया है। जिसकी वजह से निर्मला के सिर की कई नसों पर दवाब पड़ रहा है, यदि जल्द इस ट्यूमर को ना निकाला गया तो आने वाले समय में निर्मला की आँखों की रौशनी जा सकती है और शरीर का एक भाग लकवाग्रस्त भी हो सकता है। परिवार की सहमति के बाद डॉ विमल कुमार अग्रवाल के साथ मिलकर निर्मला का माइक्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन करके ट्यूमर निकाल दिया गया।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आरके मनी ने कहा कि नयति में हर वह इलाज मौजूद है जो नयति से पहले केवल महानगरों में ही मिल पाता था। हमारे यहां हर विभाग में देश के जाने माने एवं अनुभवी चिकित्सक हैं, जो मरीज की बीमारी की तह तक पहुंच कर उसके निदान का प्रयास करते हैं।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ रविंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि समय पर इलाज न कराये जाने के कारण ट्यूमर लगातार बढ़ता जा रहा था जिससे दिमाग की नसों पर काफी प्रेशर पड़ रहा था। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में सेरिब्लोपौंटाइन एंगल ट्यूमर कहा जाता है जो दिमाग की आठवीं नर्व से निकलता है, जिसके कारण मरीज को सुनाई देना तक बंद हो सकता है। इस प्रकार के ऑपरेशन देश के कुछ गिने चुने न्यूरो सर्जरी सेंटरो पर तथा अनुभवी चिकित्सकों द्वारा ही किये जा सकते हैं।

June 30, 2018

नयति में देश भर के लैप्रोस्कोपिक सर्जन का हुआ जमावड़ा

  • 30 June, 2018

नयति के सहयोग से उप्र में पहली बार मथुरा में आईएजीईएस द्वारा किया जा रहा है आयोजन

मथुरा। नयति मेडिसिटी में इन्डियन एसोसिएशन ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एन्ड एंडोस्कोपिक सर्जन्स द्वारा नयति हैल्थकेयर के सहयोग से उप्र में पहली बार मिनिमल एक्सेस सर्जरी एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन के लिए तीन दिवसीय फैलोशिप का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर से सैकड़ों की संख्या में आये हुए सर्जन ने बढ़चढ़ कर भाग लेते हुए अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। ज्ञात हो कि इस प्रकार का कार्यक्रम उप्र में पहली बार नयति मेडिसिटी में किया जा रहा है।

मथुरा के जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे ज्यादा जरुरत आज छोटे एवं मंझले शहरों के लोगों को ही है, और नयति द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में दिया जा रहा योगदान काफी सराहनीय है। नयति द्वारा शुरू किये गए प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देश की आइएजीइएस जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश में पहली बार मथुरा में यह आयोजन किया गया।

इस अवसर पर नयति हैल्थकेयर की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि मेडिकल साइंस के फायदे गांवों कस्बों तक पहुंचने चाहिये, जिससे देश के हर व्यक्ति को बेहतरीन इलाज मिल सके। डॉक्टरों को विश्व में आने वाली नई तकनीक को जानने के लिए ट्रेंड भी होना जरुरी है, जिसके लिए हम हमेशा तत्पर रहते हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉक्टरों का विशेष योगदान रहता है, इसीलिए हम समय समय पर देश के बेहतरीन डॉक्टरों के अनुभव आपस में बांटने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाते रहते हैं, जिससे लोग विश्व की आधुनिक तकनीक तथा कार्यशैली को अपना सकें और मरीज को बेहतरीन उपचार प्रदान कर सके।

हमें गर्व है कि आइएजीइएस जैसी प्रतिष्ठित संस्था के साथ हमें यह कार्यशाला करने का अवसर प्राप्त हुआ।

इन्डियन एसोसिएशन ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एन्ड एंडोस्कोपिक सर्जन्स के अध्यक्ष डॉ सुभाष खन्ना ने कहा कि 20 सदस्यों जे साथ शुरू किये गए इस संगठन में 6 हजार से अधिक सदस्य हैं और आज इस संगठन ने एक वटबृक्ष का रूप धारण कर लिया है। जब हमने मथुरा को इस फैलोशिप के लिए चुना तो कई डॉक्टर्स का कहना था कि मथुरा तो एक छोटा शहर है, पता नहीं कैसा अस्पताल होगा, सुविधाएं अच्छी होंगी या नहीं? यहां आकर जब नयति को देखा तो विश्वास ही नहीं हुआ कि विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला अस्पताल नयति मेडिसिटी मथुरा में ही मौजूद है।

नयति मेडिसिटी के मिनिमल एक्सेस एवं जीआई सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश अग्रवाला ने वोट ऑफ थैंक्स देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से हमेशा कुछ नया सीखने को मिलता है और मुझे पूरा विश्वास है कि यहां आये हुए डॉक्टर्स यहां से अपने साथ बेहतरीन अनुभव तथा जानकारी लेकर जायेंगे जो भविष्य में उनके काम आएंगे।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अजय अग्रवाल ने फैलोशिप के लिए देश भर से आये हुए डॉक्टरों का परिचय कराते हुए कहा कि लोगों का डॉक्टरों पर बहुत विश्वास होता है, इसलिए हमें समय समय पर आने वाली आधुनिक तकनीक एवं सुविधाएं जानने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिये जिसका लाभ हमारे द्वारा लोगों तक पहुंच सके।

कार्यक्रम में डॉ. सुरेंद्र शर्मा, डॉ सौरभ अग्रवाल का विशेष योगदान रहा।