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June 16, 2018

नयति में रीटरोपैरिटोनियोस्कोपी के माध्यम से खराब किडनी निकाली

  • 16 June, 2018

मथुरावृन्दावन निवासी 36 वर्षीय विमलेश चार पांच दिनों से पेशाब न आने की समस्या से परेशान थीं। उन्होंने खुद को एक दो जगह दिखाया लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ, तब वे नयति मेडिसिटी में आकर यूरो विभाग के प्रमुख डॉ सुमित शर्मा से मिलीं। नयति में जब विमलेश की जांच कराई गई तो पता चला कि उनका क्रियेटिनिन काफी बढ़ा हुआ है, उनकी दोनों किडनियों में पथरी थीं और उनकी एक किडनी मवाद भी भरा हुआ था जिसके कारण उनकी एक किडनी फेल हो चुकी है, जिसको ऑपरेशन करके निकालने की तुरंत आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद उनका ऑपरेशन करके खराब हो चुकी किडनी रीटरोपैरिटोनियोस्कोपी के माध्यम से निकाल दी गयी।

’नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आर के मनी’ ने कहा कि हमने तय किया था कि नयति में हम हर वो सुविधा उपलब्ध कराएंगे जिनके लिए यहां के लोगों मीलों लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं। आज नयति में एक ही छत के नीचे हर बीमारी का इलाज विश्वस्तरीय सुविधाओं एवं चिकित्सको के साथ मौजूद है।उन्होंने कहा कि यह तकनीक इस क्षेत्र के लिए बिल्कुल नयी एवं अत्याधुनिक तकनीक है, अभी तक दिल्ली के कुछ ही अस्पतालों में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के द्वारा किडनी निकालने के लिए पूरा पेट खोलने की जरुरत नहीं होती बल्कि पेट के निचले हिस्से में कमर की ओर केवल एक छोटा सा छेद करके खराब किडनी को निकाल दिया जाता है।

’नयति मेडिसिटी के यूरो विभाग के प्रमुख डॉ. सुमित शर्मा’ ने कहा कि सबसे पहले हमने इनका डायलेसिस कराया उसके बाद अपनी टीम के साथ मिलकर रीटरोपैरिटोनियोस्कोपी के माध्यम से इनकी खराब हो चुकी किडनी को निकाल दिया तथा सही किडनी में से पथरी भी निकाल दी गयी जिसके बाद विमलेश को अब डायलेसिस की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि समय रहते इसका इलाज करा लिया जाता तो किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता था, इनकी खराब किडनी को यदि निकाला ना जाता तो दूसरी किडनी भी खराब हो सकती थी।

June 14, 2018

नयति हॉस्पिटल ने दिलाई शपथ नही करेंगें तंबाकू का सेवन विश्व तम्बाकू निषेध जागरूकता सप्ताह का हुआ समापन

  • 14 June, 2018

आगरा। तम्बाकू सेवन के दुष्परिणामों से आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से नयति हेल्थकेयर की ओर से चलाए जा रहे विश्व तंबाकू निषेध सप्ताह का समापन ”विश्व तंबाकू निषेध दिवस” के उपलक्ष्य में नयति हॉस्पिटल आगरा में परिचर्चा के साथ किया गया। परिचर्चा  में तंबाकू के उपयोग न करने और समाज को जागरूक करने जैसे कई पहलूओं पर विचार विमर्श हुआ। इन मौके पर नयति हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तंबाकू से शरीर और वातावरण को होने वाले नुकसानों के बारे में जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को नयति हेल्थकेयर द्वारा पूरे हफ्ते चलाए गए कार्यक्रमों के बारे में अवगत कराया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने तंबाकू का सेवन न करने के प्रण के साथ तंबाकू सेवन करने वाले अन्य लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों से जागरूक करने की बात कही। परिचर्चा में शामिल हुए लोगों ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से तंबाकू से होने वाली बीमारियों, तंबाकू की लत छोड़ने के उपाय जैसे सवाल पूछ अपनी जिज्ञासा को शांत किया। डाक्टरों ने तंबाकू से होने वाले जानलेवा बीमारियों जैसे कैंसर, टीबी, हृदय रोग आदि के बारे में जानकारी साझा की। परिचर्चा में नयति की ओर से (हृदय रोग विशेषज्ञ) डॉ. विवेक मित्तल एवं डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. अमित सिघंल (नाक, कान, गलारोग विशेषज्ञ), डॉ. नेहा गर्ग (दंत रोग विशेषज्ञ), डॉ. संजीव के गुप्ता (कैंसर रोग विशेषज्ञ), डॉ. सागर लवानिया (मनोचिकित्सक), डॉ. मनीष शर्मा (फेफडा रोग विशेषज्ञ) ने भाग लिया। परिचर्चा का संचालन नयति हॉस्पिटल की यूनिट हेड डॉ. ज्योति तिवारी ने किया।

कार्यक्रम में नयति हेल्थकेयर के सीईओ डॉ. आर के मनी ने कहा  तंबाकू और धूम्रपान आज समाज के लिए सबसे बडा खतरा है, और हम यह मानते है कि यह हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि हम इससे होने वाले खतरों के बारे में समाज के हर वर्ग को अवगत कराते हुए जागरूक कर उन्हें इसके दुष्परिणामों से बचा सकें। हम जानते है कि हमारे क्षेत्र में तम्बाकू धूम्रपान का सेवन जहां लगातार बढ़ रहा तो दूसरी ओर इसके दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता की काफी कमी है जिसके कारण नयति इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इसी श्रृंखला में हमने पिछले एक हफ्ते मे नुक्कड़ नाटको, परिचर्चाओं, नयति तंबाकू निवारण क्लीनिक की शुरुआत के साथ और भी कई विभिन्न माध्यमों के द्वारा आमजन तक इस संदेश को पहुचाने का काम किया है। हमारे इस प्रयास से कई लोगों को इस बुरी लत को छोड़ने का हौसला भी मिला जिससे हमारी यह मुहिम सार्थक साबित हुई। हमारा विश्वास है कि आगे भी हम समाज को स्वस्थ बनाने की अपनी मुहिम में कुछ नया योगदान देते रहेंगें।

June 9, 2018

डाइबिटीज, कोलेस्ट्रॉल एवं असन्तुलित हार्मोन्स के जाने-माने चिकित्सक डॉ.(प्रो) अभय अहलूवालिया बने नयति का हिस्सा

  • 09 June, 2018

मथुरा 9 जून। देश के जाने-माने चिकित्सक डॉ. (प्रो) अभय अहलूवालिया अब नयति मेडिसिटी का हिस्सा बन गए हैं। डाइबिटीज, कोलेस्ट्रॉल एवं असंतुलित हार्मोन्स की चिकित्सा के क्षेत्र में आपका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आप नयति में एंडोक्रिनोलॉजी एवं मेटाबॉलिज्म विभाग के डायरेक्टर एवं विभाग प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। डॉ. अहलूवालिया सप्ताह के सोमवार और शुक्रवार को नयति मेडिसिटी, मथुरा और मंगलवार को नयति हॉस्पिटल, आगरा में अपनी सेवाएं देंगे।

अपने क्षेत्र में 16 वर्ष का अनुभव प्राप्त डॉ अहलूवालिया ने 1999 में एम्स नई दिल्ली से एंडोक्रिनोलॉजी से डीएम किया है। आप देश के कई बड़े अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। डाइबिटीज के क्षेत्र में आपकी खोज के लिए आपको एवार्ड भी प्राप्त हो चुका है, इसके अलावा आपके द्वारा किये गए कई शोध एवं खोज अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आर के मनी ने कहा कि हमारा हमेशा से प्रयास रहा है कि देश और दुनिया की बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं एवं चिकित्सक हमारे साथ जुड़ सकें, जिससे हम ब्रजवासियों एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकें। उसी क्रम में हमने डॉ अहलूवालिया से नयति परिवार के साथ जुड़ने का आग्रह किया जो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि अब बृज तथा आसपास के लोगों को इनकी बेहतरीन चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

डॉ (प्रो) अभय अहलूवालिया ने कहा कि नयति से जुड़ने का जब मुझे अवसर प्राप्त हुआ तो मैं मथुरा आने से खुद को रोक नहीं सका, क्योंकि यहां कार्य करते हुए मुझे ब्रज में रहने का अवसर मिलेगा जिसे मैं छोड़ना नहीं चाहता था। आज खानपान एवं अनियमित दिनचर्या की वजह से अधिकांश लोगों में डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल एवं हार्मोन्स की अनियमितता की शिकायत पायी जा रही है। अब तो गर्भवती महिलाओं में 15 प्रतिशत तक महिलाओं में डायबिटीज पायी जा रही है। इसलिए समय समय पर डाइबिटीज की जांच कराते रहना चाहिए। हार्मोन्स के संतुलित न रहने से बच्चों की लंबाई आदि पर प्रभाव पड़ता है। शरीर के हार्मोन्स यदि संतुलित रहें तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।

May 30, 2018

नयति में पैट सीटी स्कैन द्वारा कैंसर तथा अन्य बीमारियों की मिल रही सटीक जानकारी

  • 30 May, 2018

मथुरा 30 मई। नयति मेडिसिटी में पैट सीटी स्कैन द्वारा कैंसर अथवा किसी अन्य बीमारी जैसे हार्ट या न्यूरो से सम्बंधित किसी भी परेशानी की सटीक जानकारी प्राप्त की जा रही है जिससे मरीज को दिये जाने वाला इलाज और अधिक कारगर हो पा रहा है। अभी तक यह मशीन दिल्ली, मुम्बई जैसे महानगरों में ही उपलब्ध थी। पश्चिमी उ.प्र. में में पहली बार शुरू होने वाली इस मशीन के द्वारा ब्रजवासियों तथा आसपास के लोगों को अब उनके घर के पास नयति में ही बेहतरीन जांच तथा इलाज मिल रहा है, जिससे उनके समय के साथ इलाज पर होने वाले खर्च में भी काफी कमी आ रही है। यह कहना था नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आरके मनी का जो नयति में उपलब्ध पैट सीटीस्कैन के बारे में जानकारी दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमारा हमेशा से यह मानना था कि जो इलाज देश के जाने माने शहरों तक ही सीमित था वह टियर 2 एवं टियर 3 शहरों के लोगों तक भी पहुंचे, उसी क्रम में हम नयति में यह पैट सीटीस्कैन लेकर आये हैं। महानगरों में पैट सीटी स्कैन मशीन द्वारा होने वाली जांच का खर्च भी नयति में 35 प्रतिशत तक कम आता है।
नयति मेडिसिटी के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग की डायरेक्टर डॉ. संगीता टिक्कू ने पैट सीटीस्कैन के बारे में बताते हुए कहा इसके द्वारा एक बार मे ही पूरे शरीर की जांच हो जाती है जिससे शरीर के किस हिस्से में कैंसर है अथवा किस हिस्से के कैंसर की कोशिकाएं सक्रिय हैं उसका सटीक पता चल जाता है। इस मशीन द्वारा मरीज की जांच से पहले मरीज के शरीर में रेडियोएक्टिव ग्लूकोज इंजेक्ट किया जाता है उसके बाद मशीन पर लिटाकर मरीज को मशीन के अंदर भेज जाता है। इस सारी प्रक्रिया में लगभग 30 मिनट का समय लगता है।


इस मशीन द्वारा जांच के बाद कैंसर के मरीजों को दिए जाने वाला रेडिएशन कैंसर की सटीक जगह पर ही दिया जा सकेगा जिससे कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं के अलावा शरीर के किसी हिस्से पर रेडियेशन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, और कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं पर रेडिएशन का प्रभाव पड़ रहा है या नहीं यह भी इस मशीन के द्वारा पता चल सकता है जिसके बाद कैंसर का इलाज बेहतरीन तरीके से किया जा सकेगा।

May 24, 2018

नयति हैल्थकेयर मनायेगा विश्व तंबाकू निषेध सप्ताह नयति मेडिसिटी व नयति हॉस्पिटल में तंबाकू निवारण क्लीनिक की हुई शुरूआत

  • 24 May, 2018

24 मई। नयति हेल्थकेयर द्वारा तंबाकू निषेध सप्ताह मनाया जायेगा, जो 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस तक चलेगा। इस दौरान लोगों को जागरूक करने के विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा, जिसमें सप्ताह भर विभिन्न स्थानों पर निशुल्क कैम्प, नुक्कड़ नाटक, तंबाकू से होने वाले नुकसान एवं बचाव की जानकारी दी जाएंगी। इस दौरान अस्पताल परिसर में एक नयति तंबाकू निवारण क्लीनिक की शुरुआत भी की गयी, जो खासतौर से तंबाकू से पीड़ित मरीजों के लिए ही स्थापित की गयी है। आमजन तक तंबाकू के दुष्परिणामों को पहुंचाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों मे नुक्कड नाटकों का भी आयोजन किया जा रहा है।

सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत नयति परिसर से नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आरके मनी के साथ वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने सांकेतिक रूप से कैसर की मुख्य जड़ सिगरेट को तोड़ते हुए लोगों को तम्बाकू से दूर रहने की सलाह दी। हर साल तंबाकू से होने वाली जनहानी, और बढ़ते हए दुष्परिणामों को देखते हुए विश्व भर में तंबाकू से होने वाले खतरों से बचने तथा लोगों को जागरूक करने के लिए इस दिन का आयोजन हर वर्ष किया जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित डाक्टरों ने तंबाकू और धूम्रपान से होने वाली बीमारियों और उनसे बचने के उपायों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम में कैंसर रोग विभाग, श्वसन रोग विभाग, हृदय रोग विभाग, मनोचिकित्सक विभाग, न्यूरो सर्जरी विभाग, हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग, जी आई सर्जरी विभाग, यूरोलॉजी विभाग, नाक कान गला रोग विभाग, नेत्र रोग विभाग, उदर रोग विभाग, बाल रोग विभाग, ईएनटी विभाग, इंटरनल मेडिसिन विभाग एवं फिजियोथैरेपी विभाग के चिकित्सक मौजूद थे।

कार्यक्रम में नयति के सीईओ डा आर के मनी ने कहा तंबाकू और धूम्रपान आज समाज के लिए सबसे बडा खतरा है, और हम यह मानते है कि यह हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि हम इससे होने वाले खतरों के बारे में समाज के हर वर्ग को अवगत कराते हुए जागरूक कर उन्हें इसके दुष्परिणामों से बचा सकें। हम जानते है कि हमारे क्षेत्र में तंबाकू धूम्रपान का सेवन जहां लगातार बढ़ रहा तो दूसरी ओर इसके दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता की काफी कमी है जिसके कारण नयति इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

सांस संबंधी रोगियों में धूम्रपान करने वालों का प्रतिशत हमेशा अधिक रहता है। धूम्रपान की आदत हृदय रोगों को बढ़ावा देती है। रोग को बढ़ने से रोकने के लिए तंबाकू धूम्रपान को बंद करना जरूरी होता है। इसी कारण तंबाकू सेवन करने वाले लोगों में सीओपीडी, अस्थमा जैसी घातक बीमारियां अधिक पायी जातीं हैं।

नयति के कैंसर चिकित्सा विभाग के निदेशक, डॉ अमित भार्गव ने कहा कि आज के समय में कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू और धूम्रपान का सेवन है। इसी कारण लोगो में मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, आंतों का कैंसर के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। लोगों को कैंसर जैसी बीमारी से बचने के लिए तंबाकू अथवा तंबाकू से बने उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।

नयति मेडिसिटी के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. सागर लवानियां ने कहा कि तंबाकू या धूम्रपान हमारे समाज के लिये किसी अभिशाप से कम नही है लेकिन लोगों में यदि इच्छाशक्ति हो तो इस लत से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिये परिवारजनों और अपनों का सहयोग भी काफी जरूरी है।

May 19, 2018

नयति में सात माह के बच्चे के सिर में भरा पानी दूरबीन विधि द्वारा निकाला गया

  • 19 May, 2018

मथुरा 19 मई। शिकोहाबाद निवासी मनोज प्रताप सिंह का सात माह का पुत्र प्रबल जन्म से ही कई प्रकार की शारीरिक परेशानियों से जूझ रहा था, उसके सिर का आकार लगातार बढ़ता जा रहा था, आंखें घूम गयी थीं और दूध पीते ही वह उल्टी करके निकाल देता था। प्रबल के पिता ने काफी डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उसे कहीं से कोई लाभ नहीं मिलाए तब वे उसे लेकर नयति मेडिसिटी आये जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.के गुप्ता से मिले। उनके द्वारा जरुरी जांच कराने के बाद पता चला कि प्रबल के सिर में पानी भर गया है जिसकी वजह से उसको इन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैए इस बीमारी को मेडिकल भाषा में हाइड्रोसिफेलस कहते हैं। प्रबल के सिर का ऑपरेशन करके तुरंत पानी निकालने की आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद डॉ. एस के गुप्ता और उनकी टीम ने एंडोस्कोपिक थर्ड वेंट्रीक्लोस्टोमी (दूरबीन विधिद्) से बिना चीरे का ऑपरेशन करके प्रबल के सिर से पानी निकाल दिया और दिमाग में ही बाईपास करके पानी की निकासी को रास्ता खोल दिया गया।

इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आर के मनी ने कहा कि नयति में हर वह इलाज मौजूद है जो नयति से पहले केवल महानगरों में ही मिल पाता थाए और लोगों को मीलों लंबी यात्रा करनी पड़ती थी, जिसके कारण इलाज में होने वाले खर्च के अलावा वहां आने जाने, रहने, खाने पीने में भी काफी पैसे खर्च करने पड़ते थेए किन्तु नयति मेडिसिटी शुरू होने के बाद महानगरों में मिलने वाला इलाज नयति में ही मिल रहा है वो भी वहां से 40 प्रतिशत तक कम खर्च में।

नयति मेडिसिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. एस के गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर इस प्रकार सिर में भरे हुए पानी को निकालने के सिर से एक नली सिर से पेट में जोड़ दी जाती है जिससे मरीज के सिर का पानी धीरे-धीरे पेट के रास्ते खून में मिल जाता है। नयति में आज हर प्रकार की आधुनिक तकनीक तथा सुविधा मौजूद है जिसके कारण हमने प्रबल के सिर का बिना चीरे के दूरबीन विधि द्वारा ऑपरेशन करने का फैसला किया, जिसके बाद 24 घंटे में ही उसकी स्थिति में सुधार आ गया, अब वह ठीक से दूध भी पी पा रहा है और उसकी आंखें भी सामान्य हो गयी।

May 14, 2018

नयति में एंडोस्कोपी की नवीनतम तकनीक पॉयम द्वारा बिना चीरे के आहारनाल का वाल्ब खोला

  • 14 May, 2018

मथुरा 14 मई। नयति मेडिसिटी में बेहतरीन एंडोस्कोपी की नवीनतम तकनीक पॉयम से आहारनाल के बंद वाल्ब को बिना चीरे के काटकर खोल दिया। इस क्षेत्र में इस प्रकार की सुविधा नयति हॉस्पिटल से पहले किसी और हॉस्पिटल में नहीं थी, जिसके कारण मरीजों को अपनी बीमारी से बचाव के लिए दिल्ली तक जाना पड़ता था।

राजस्थान निवासी 24 वर्षीय विजय कई महीनों से परेशान था। उसकी छाती में हमेशा दर्द रहता था, खाना खाने के बाद वापस बाहर आ जाता था। कई डॉक्टरों से उसने अपना इलाज कराया लेकिन उसे कोई लाभ नहीं हुआ, जिसके बाद वह नयति मेडिसिटी आया और यहां आकर नयति मेडिसिटी के उदर रोग विभाग के प्रमुख डॉ. कपिल शर्मा से मिले। उनके द्वारा जरूरी जांच कराने के बाद पता चला कि विजय की आहारनाल के वाल्ब बन्द हो गया है जिसकी वजह से उसका खाना अमाशय तक नहीं जा पा रहा था और वापस लौट आता था।

नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ. आरके मनी ने कहा कि हमने ब्रजवासियों को दुनिया का बेहतरीन इलाज एवं स्वास्थ्य संबंधी तकनीक देने का जो वादा किया था उसमें हम सफल हुए हैं नयति में हर प्रकार की बीमारी का एक ही छत के नीचे विश्वस्तरीय उपचार मौजूद है जिसकी वजह से मरीजों को अपने इलाज के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ता। उन्होंने कहा कि आज के समय में पॉयम एंडोस्कोपी के क्षेत्र में अत्याधुनिक एवं नई तकनीक है, जिसका प्रयोग देश के कुछ गिनेचुने अस्पतालों में ही होता है। नयति मेडिसिटी पॉयम करने वाला इस क्षेत्र का पहला हॉस्पिटल बन गया है।

नयति के उदर रोग विभाग के प्रमुख डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि विजय कि आहारनाल के बंद वाल्ब की वजह से विजय को खाने पीने में परेशानी तथा सीने में दर्द रहता है, उसके बंद वाल्ब को खोलने की आवश्यकता थी। परिवार की सहमति के बाद हमने अपनी टीम के साथ एंडोस्कोपी की नवीनतम एवं बेहतरीन तकनीक पॉयम द्वारा इनके वाल्ब को बिना चीरे के माध्यम से खोल दिया, जिसके तत्काल बाद इनके खाने पीने की समस्या खत्म हो गयी और भोजन अमाशय तक जाने लगा। पॉयम के द्वारा बिना चीरे के सर्जरी की जाती है और इसको कराने के बाद मरीज दो दिन में ही वापस घर लौट जाता है।

April 25, 2018

नयति में वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन सप्ताह पर हुआ सेमिनार

  • 25 April, 2018

24 से 30 अप्रैल तक लोगों में जागरूकता फैलाने को टीकाकरण से संबंधित होंगे विभिन्न कार्यक्रम

मथुरा 25 अप्रैल। वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन (टीकाकरण) सप्ताह के अवसर पर नयति मेडिसिटी में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें मथुरा तथा आसपास के कई गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेवी श्रीमती शैलजा सिंगला थीं।

सेमिनार को संबोधित करते हुए नयति मेडिसिटी के मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति गोयल ने वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन सप्ताह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैक्सीन की वजह से कई बीमारियों की रोकथाम होती है, हर वर्ष 25 लाख से अधिक लोगों की जान वैक्सीन की वजह से ही बच पाती है। वैक्सीन होने के बावजूद लोगों में जागरूकता की कमी के चलते आज भी टीकाकरण न हो पाने के कारण कई बीमारियों के लिए घातक होता है। इसलिए हमें समाज के हर वर्ग तक वैक्सीन की जानकारी पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए। आज भी लोगों में आमधारणा है कि टीकाकरण केवल बच्चों के लिए ही होता है जो कि गलत है, वयस्कों में भी अब टीकाकरण संभव है जिसकी वजह से अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

नयति मेडिसिटी के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. नूरउल ने कहा कि आजकल के बीमारियों के वैक्सीन उपलब्ध हैं जो हमें अपने बच्चों में लगवाने ही चाहिए जिनसे कई बीमारियों की रोकथाम हो सकती है, और कई संक्रमित बीमारियां भी होती हैं जो अगर किसी बच्चे को हो जाये तो उसकी चपेट में पूरा परिवार भी आ सकता है। लोगों को आमतौर पर खसरा, डीपीटी, हैपेटाइटिस बी और हैपेटाइटिस ए आदि बीमारियों के टीके अवश्य लगवाने चाहिए।

नयति मेडिसिटी की लैब प्रमुख डॉ देवकांत प्रधान ने कहा कि दुनिया में आज 26 गम्भीर बीमारियों से बचाव के वैक्सीन मौजूद हैं। भारत में वैक्सीन की वजह से ही किसी समय पाये जाने वाले चेचक रोग से पूरी तरह मुक्ति मिल चुकी है और पोलियो पर भी लगभग काबू पा लिया गया है। यदि 80 से 85 प्रतिशत लोगों तक वैक्सीन पहुंच जाए तो हम समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।
सेमिनार की मुख्य अतिथि समाजसेवी शैलजा सिंगला ने कहा कि नयति द्वारा आयोजित इस सेमिनार से हम सभी को बहुत सारी जानकारी मिली है जिसे हम अपने स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे, और मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि नयति भविष्य में भी समाज में जागरूकता फैलाने के लिए इस प्रकार के आयोजन करता रहेगा।

सेमिनार में प्रमुख रूप से आर्मी, संदीपन स्कूल की अध्यापिकाएं, रोटरी क्लब, विभिन्न गांवों के प्रधान, वीएस सक्सेना, मीरा मित्तल, पंकज, डॉ. ममता शर्मा एवं नयति मेडिसिटी के मेडीकल सुपरिटेंडेंट डॉ. उबैद रंगरेज उपस्थित थे।

April 20, 2018

नयति में प्लाज्मा फेरेसिस तकनीक से दिमाग की नसों की खराब कवरिंग (मल्टीपल स्किलरोसिस) का हुआ सफल इलाज

  • 20 April, 2018

मथुरा 20 अप्रैल। मस्कट (ओमान) निवासी 33 वर्षीय रेणुबाला की अचानक नजर कामजोर होने लगी,यहां तक कि उनको लगभग दिखाई देना भी बंद हो गया था। हाथ पैरों में कमजोरी के कारण उनका चलना फिरना मुश्किल होता जा रहा था और उनके शरीर मे सेंसेशन की भी कमी होती जा रही थी। मस्कट में उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उनकी परेशानी में कोई सुधार नहीं आ रहा था और उनकी समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही थी।

तब उन्होंने मथुरा में रह रहे अपने रिश्तेदार से अपनी बीमारी के बारे में बात की, जिनके द्वारा नयति मेडिसिटी के बारे में बताये जाने के बाद वे नयति पहुंचे और यहां आकर न्यूरो फिजिशियन विभाग के प्रमुख डॉ नीलेश गुप्ता से मिले। डॉ नीलेश द्वारा उनकी एमआरआई, रीढ़ की हड्डी की जांच और आंखों की नसों की जांच कराई तो पता चला कि उनके दिमाग के न्यूरॉन्स की कवरिंग लगातार खत्म होती जा रही थी जिसकी वजह से उन्हें इन सब तकलीफों से गुजरना पड़ रहा था। मेडीकल भाषा मे इस बीमारी को मल्टीपल स्किलरोसिस कहते हैं।

जरूरी जांच करने के बाद डॉ नीलेश ने कुछ दिन उन्हें अस्पताल में रखा और प्लाज्मा फेरेसिस द्वारा उनका इलाज किया। अब रेणुबाला बिल्कुल स्वस्थ हैं।

नयति मेडिसिटी के सीईओ डॉ आर के मनी ने कहा कि इस क्षेत्र में आज नयति में  हर बीमारी की वह विश्वस्तरीय एवं बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है जो अब से पहले केवल महानगरों के कुछ ही अस्पतालों में मौजूद थी। हमारा हमेशा से प्रयास रहा है कि यहां पर हम मरीजों को हर वह सुविधा उपलब्ध करा सकें जिसके लिए उन्हें महानगरों तक कि यात्रा करनी पड़ती थी। हमारे यहां देश के विभिन्न प्रदेशों के अलावा देश की सीमाओं से बाहर के मरीज भी निरंतरता में आकर अपना इलाज करा रहे हैं, जिसकी हमें खुशी है।

रेणुबाला का इलाज करने वाले नयति मेडिसिटी के न्यूरो फिजिशियन डॉ. नीलेश गुप्ता ने बताया कि जो बीमारी रेणुबाला को थी वो एक लाख व्यक्तियो में किसी एक को हो सकती है। इस बीमारी के कोई प्रारम्भिक लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इस बीमारी का अचानक असर दिखाई देता है।

रेणुबाला की जांच करने के बाद हमने प्लाज्मा फेरेसिस (विशेष प्रकार एवं तकनीक से खून की सफाई) की। पहली प्लाज्मा फेरेसिस के बाद ही उनमें सुधार आना शुरू हो गया। उसके बाद सीमित अंतराल के बाद रेणुबाला की दो प्लाज्मा फेरेसिस और कि गयीं। अब रेणुबाला बिल्कुल स्वस्थ हैं लेकिन उन्हें कुछ दिन और दवाओं का सेवन करना पड़ेगा।

April 12, 2018

नयति के डॉक्टरों ने गले में हुई गांठ का किया सफल ऑपरेशन

  • 12 April, 2018

मथुरा 12 अप्रैल। नयति मेडिसिटी के चिकित्सकों ने गले में हुई गांठ (लैरिंगोसील) का सफल ऑपरेशन किया। इस प्रकार की गले में गांठ बहुत कम (दुनिया में अब तक 200 से 250) लोगों में ही पाई गयी है जिसे एक प्रकार की दुर्लभ बीमारी भी कहा जा सकता है। इस बीमारी में सांस की नली में छेद हो जाता है जिसकी वजह से उस नली में गांठ बन जाती है जो समय के साथ बढ़ती रहती है। इस बीमारी की वजह से इंसान का खानापीना एवं सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ योगेश अग्रवाला ने कहा कि 70 वर्षीय भगवान सिंह जब नयति में आये थे तब वे अपने गले में हुई गांठ से काफी परेशान थे, जिसकी वजह से उनका खानापीना भी लगभग बंद हो गया था और उन्हें सांस लेने में भी काफी तकलीफ हो रही थी। पिछले दो साल से वे कई अस्पतालों के चक्कर लगा आये लेकिन उन्हें कहीं भी किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिला। नयति आकर हमसे मिले, हमारे द्वारा करायी गई जांचों में पता चला कि इनके गले में 5 सेमी की गांठ है (जिसे मेडिकल भाषा में लैरिंगोसील कहा जाता है) जिसका तत्काल ऑपरेशन करने की आवश्यकता थी।

परिवार की सहमति के बाद डॉ. योगेश अग्रवाल एवं डॉ. अजय अग्रवाल के नेतृत्व में उनका सफल ऑपरेशन करके गले में से गांठ निकाल दी जिसके बाद भगवान सिंह बिल्कुल स्वस्थ हैं और उनकी खोई हुई आवाज भी वापस लौट आयी है।

नयति मेडिसिटी के जीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अजय अग्रवाल ने कहा कि यह एक दुर्लभ किस्म की बीमारी है और अब तक दुनिया मे 200 से 250 लोगों में ही यह बीमारी पायी गयी है। यदि समय पर इसका इलाज ना हो तो यह बीमारी बढ़ती जाती है जिससे मरीज को काफी तकलीफ से भी गुजरना पड़ सकता है।