Critical Care

  • The very thought of hospitalization is scary and traumatizing but caring doctors like Dr. R.K.Mani make the experience friendly and pleasing. I would like to thank Dr. Mani for his effective analysis and diagnosis else, I would never have been able to continue a blissful life. Many of your patients have recommended you as a good doctor but I am going one step further to recommend you as a great human being. Thanks Dr RK Mani, you are not just a doctor but also a magician.Nayati multi super speciality hospital impressed us with the great services offered to the patients. I don’t get a feeling that I am not in Delhi.

    Shekhar Singh

  • मेरा नाम है अजय यादव और मैं बोम्बे में रहता हूं। मेरी बहिन आगरा में रहती हैं और उन्हीं की तबियत खराब हो गयी थी। एक हफ्ते तक आगरा में किसी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल आईसीयू में रखा था। लेकिन वहॉ हालत देखकर काफी डर लग रहा था। फिर वहॉ के फ्रेण्डली डॉक्टर ने बताया और उस वक्त मुझे हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा पता नहीं था। नेट पर सर्च किया, तो अच्छा लगा, डॉक्टर्स के बारे में चेक किया तो पता चला डॉक्टर बहुत ही ज्यादा अच्छे एण्ड वैल क्वालिफाइड, एक्सपीरिएन्ट्स हैं। तो एक आम आदमी कि तरह मन में शक आ जाता है कि मथुरा में इतने बड़े डॉक्टर शायद सिर्फ पैनल पे नाम रखा होगा असलियत में नहीं आते होंगे ड्यूटी पे कभी-कभी फोन पे कन्सर्ट करते होंगे, इमरजैंसी में आते होंगे। आम आदमी की तरह मेरे मन भी वो शक आया था। तो ऑब्शन मेरे पास ज्यादा थे नहीं। बिकोज मेरी सिस्टर की हालत ऐसी थी नहीं कि दिल्ली या मुम्बई तक उनको शिफ्ट किया जा सके। ऑलरेडी वे वेन्टीलेटर पर थी लेकिन उसके बाद पता किया डायरेक्टली नयति में फोन किया। रिसेप्शन पे उन लोगों ने बताया कि डॉक्टर आते है। डॉ. मनी मण्डे से थर्सडे तक खुद रहते हैं हॉस्पिटल में, ये सुनकर अच्छा लगा। इसके बाद एम्बुलैंस मंगवाया, मेरी सिस्टर की हालत काफी गम्भीर थी। एम्बुलैंस से मेरी सिस्टर आगरा से मथुरा 1 घण्टा 10 मिनट में हॉस्पिटल आयीं। मुझे पेपर वर्क के लिए रोका। मेरी सिस्टर को डायरेक्टली आईसी में ले गये एण्ड उनकी कण्डीशन कन्ट्रोल में की। फाइनली डॉक्टर मनी और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से वर्क किया। मैं बहुत खुश था। जब आपका पेशेन्ट आईसीयू में होता है आपको पता नहीं चलता है कि क्या ट्रीटमेन्ट हो रहा है क्या स्टेज है, दो तीन बार साइन करने के लिए बुलाया जाता है, जैसा कि हर जगह होता है। लेकिन यहॉ पर काउंसलिंग प्रोसीजर बहुत ही अच्छा है। यहॉ के डॉक्टर कितने भी व्यस्त क्यों न हो पर टाइम निकालकर पेशेंट के पास जाते है। जब मेरी बहन बेहोशी से होश में आयी तो काफी स्टोरी उनके मन में थी। सिस्टर ने बोला आज मेरा बर्थडे है फिर डॉक्टर आर.के. मनी और उनकी टीम ने उनका जन्मदिन मनाया।

    Ajay Yadav

  • मेरी माताजी का नाम कुसुमलता है। इन्हे करीब 7 साल से अस्थमा की दिक्कत थी। करीब 7 साल पहले इन्हे अस्थमा का अटैक आया था। तो लोकल ही हमने दिखाया यहॉ से कोई सुविधा नही मिली। तो इन्हे दिल्ली ले गये इनको उसके बाद 3 साल तक ठीक रहीं उसके बाद 3 तक इनको अस्थमा के अटैक आते रहे हैं हर 6 महीने बाद। 6 महीने में यहॉ का पेशेंट दिल्ली पहुंचाता बड़ा बोड़ेडाइल होता है, बड़ी समस्या होती थी। अभी रीसेन्टली 6 महीने पहले एक अटैक आया इनको हमने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया, उन्होंने 5 दिन ट्रीटमेंट दिया लेकिन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, स्थिति ये हो गयी इनकी बॉडी में लेबल 20% ही बचा था तो हम लोग दिल्ली लेकर दौड़ रहे थे लेकिन दिल्ली ले जाने की इनकी हालत नहीं थी फिर हमें नयति का बोर्ड दिखा फिर हमने अपनी एम्बुलैंस नयति की ओर ही मोड़ दी यहॉ पे आकर ही डॉक्टर लोगों ने इंटरटेन किया हम लोगों को बहुत अच्छे से और फिर ये वेंट पर भी गयी, डेढ महीने यहॉ हॉस्पिटल में रहीं लेकिन यहॉ के जो डॉक्टर्स है उनकी वजह से हमारे बीच में बैठी हुई हैं हालत बहुत ही ज्यादा गम्भीर थी वेंटीलेटर पर सात-आठ दिन ही रहीं उसके बाद आईसीयू में आती जाती रहीं फिर इनके टिकोस्मी का ट्यूब डाला इनके उससे इनकी सांस वापिस आयी फिर वो एक महीने बाद निकाली गयी फिर ये बोलने लायक हुयी धीरे-धीरे इनको इतना फायदा है अब ये चल लेती हैं, घूम लेती हैं फिर लेती हैं अपने काम कर लेती हैं और यहॉ के काबिल डॉक्टरों की वजह से आज मेरी माता जी आज मेरे बीच में हैं, मैं इनका धन्यवाद करता हूं और हॉस्पिटल की फेसिलिटी तो वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज हैं जैसे दिल्ली में हम देखते हैं जाते-आते रहे हैं 5-7 साल से उससे से भी बेटर फेसिलिटी है और धीरे-धीरे धीरे-धीरे तरक्की भी कर रहा है मेरी शुभकामनाएं हॉस्पिटल के साथ हैं। थैंक्यू

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  • मेरी माताजी का नाम कुसुमलता है। इन्हे करीब 7 साल से अस्थमा की दिक्कत थी। करीब 7 साल पहले इन्हे अस्थमा का अटैक आया था। तो लोकल ही हमने दिखाया यहॉ से कोई सुविधा नही मिली। तो इन्हे दिल्ली ले गये इनको उसके बाद 3 साल तक ठीक रहीं उसके बाद 3 तक इनको अस्थमा के अटैक आते रहे हैं हर 6 महीने बाद। 6 महीने में यहॉ का पेशेंट दिल्ली पहुंचाता बड़ा बोड़ेडाइल होता है, बड़ी समस्या होती थी। अभी रीसेन्टली 6 महीने पहले एक अटैक आया इनको हमने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया, उन्होंने 5 दिन ट्रीटमेंट दिया लेकिन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, स्थिति ये हो गयी इनकी बॉडी में लेबल 20% ही बचा था तो हम लोग दिल्ली लेकर दौड़ रहे थे लेकिन दिल्ली ले जाने की इनकी हालत नहीं थी फिर हमें नयति का बोर्ड दिखा फिर हमने अपनी एम्बुलैंस नयति की ओर ही मोड़ दी यहॉ पे आकर ही डॉक्टर लोगों ने इंटरटेन किया हम लोगों को बहुत अच्छे से और फिर ये वेंट पर भी गयी, डेढ महीने यहॉ हॉस्पिटल में रहीं लेकिन यहॉ के जो डॉक्टर्स है उनकी वजह से हमारे बीच में बैठी हुई हैं हालत बहुत ही ज्यादा गम्भीर थी वेंटीलेटर पर सात-आठ दिन ही रहीं उसके बाद आईसीयू में आती जाती रहीं फिर इनके टिकोस्मी का ट्यूब डाला इनके उससे इनकी सांस वापिस आयी फिर वो एक महीने बाद निकाली गयी फिर ये बोलने लायक हुयी धीरे-धीरे इनको इतना फायदा है अब ये चल लेती हैं, घूम लेती हैं फिर लेती हैं अपने काम कर लेती हैं और यहॉ के काबिल डॉक्टरों की वजह से आज मेरी माता जी आज मेरे बीच में हैं, मैं इनका धन्यवाद करता हूं और हॉस्पिटल की फेसिलिटी तो वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज हैं जैसे दिल्ली में हम देखते हैं जाते-आते रहे हैं 5-7 साल से उससे से भी बेटर फेसिलिटी है और धीरे-धीरे धीरे-धीरे तरक्की भी कर रहा है मेरी शुभकामनाएं हॉस्पिटल के साथ हैं। थैंक्यू

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  • The very thought of hospitalization is scary and traumatizing but caring doctors like Dr. R.K.Mani make the experience friendly and pleasing. I would like to thank Dr. Mani for his effective analysis and diagnosis else, I would never have been able to continue a blissful life. Many of your patients have recommended you as a good doctor but I am going one step further to recommend you as a great human being. Thanks Dr RK Mani, you are not just a doctor but also a magician.Nayati multi super speciality hospital impressed us with the great services offered to the patients. I don’t get a feeling that I am not in Delhi.

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  • मेरा नाम है अजय यादव और मैं बोम्बे में रहता हूं। मेरी बहिन आगरा में रहती हैं और उन्हीं की तबियत खराब हो गयी थी। एक हफ्ते तक आगरा में किसी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल आईसीयू में रखा था। लेकिन वहॉ हालत देखकर काफी डर लग रहा था। फिर वहॉ के फ्रेण्डली डॉक्टर ने बताया और उस वक्त मुझे हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा पता नहीं था। नेट पर सर्च किया, तो अच्छा लगा, डॉक्टर्स के बारे में चेक किया तो पता चला डॉक्टर बहुत ही ज्यादा अच्छे एण्ड वैल क्वालिफाइड, एक्सपीरिएन्ट्स हैं। तो एक आम आदमी कि तरह मन में शक आ जाता है कि मथुरा में इतने बड़े डॉक्टर शायद सिर्फ पैनल पे नाम रखा होगा असलियत में नहीं आते होंगे ड्यूटी पे कभी-कभी फोन पे कन्सर्ट करते होंगे, इमरजैंसी में आते होंगे। आम आदमी की तरह मेरे मन भी वो शक आया था। तो ऑब्शन मेरे पास ज्यादा थे नहीं। बिकोज मेरी सिस्टर की हालत ऐसी थी नहीं कि दिल्ली या मुम्बई तक उनको शिफ्ट किया जा सके। ऑलरेडी वे वेन्टीलेटर पर थी लेकिन उसके बाद पता किया डायरेक्टली नयति में फोन किया। रिसेप्शन पे उन लोगों ने बताया कि डॉक्टर आते है। डॉ. मनी मण्डे से थर्सडे तक खुद रहते हैं हॉस्पिटल में, ये सुनकर अच्छा लगा। इसके बाद एम्बुलैंस मंगवाया, मेरी सिस्टर की हालत काफी गम्भीर थी। एम्बुलैंस से मेरी सिस्टर आगरा से मथुरा 1 घण्टा 10 मिनट में हॉस्पिटल आयीं। मुझे पेपर वर्क के लिए रोका। मेरी सिस्टर को डायरेक्टली आईसी में ले गये एण्ड उनकी कण्डीशन कन्ट्रोल में की। फाइनली डॉक्टर मनी और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से वर्क किया। मैं बहुत खुश था। जब आपका पेशेन्ट आईसीयू में होता है आपको पता नहीं चलता है कि क्या ट्रीटमेन्ट हो रहा है क्या स्टेज है, दो तीन बार साइन करने के लिए बुलाया जाता है, जैसा कि हर जगह होता है। लेकिन यहॉ पर काउंसलिंग प्रोसीजर बहुत ही अच्छा है। यहॉ के डॉक्टर कितने भी व्यस्त क्यों न हो पर टाइम निकालकर पेशेंट के पास जाते है। जब मेरी बहन बेहोशी से होश में आयी तो काफी स्टोरी उनके मन में थी। सिस्टर ने बोला आज मेरा बर्थडे है फिर डॉक्टर आर.के. मनी और उनकी टीम ने उनका जन्मदिन मनाया।

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  • मेरी माताजी का नाम कुसुमलता है। इन्हे करीब 7 साल से अस्थमा की दिक्कत थी। करीब 7 साल पहले इन्हे अस्थमा का अटैक आया था। तो लोकल ही हमने दिखाया यहॉ से कोई सुविधा नही मिली। तो इन्हे दिल्ली ले गये इनको उसके बाद 3 साल तक ठीक रहीं उसके बाद 3 तक इनको अस्थमा के अटैक आते रहे हैं हर 6 महीने बाद। 6 महीने में यहॉ का पेशेंट दिल्ली पहुंचाता बड़ा बोड़ेडाइल होता है, बड़ी समस्या होती थी। अभी रीसेन्टली 6 महीने पहले एक अटैक आया इनको हमने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया, उन्होंने 5 दिन ट्रीटमेंट दिया लेकिन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, स्थिति ये हो गयी इनकी बॉडी में लेबल 20% ही बचा था तो हम लोग दिल्ली लेकर दौड़ रहे थे लेकिन दिल्ली ले जाने की इनकी हालत नहीं थी फिर हमें नयति का बोर्ड दिखा फिर हमने अपनी एम्बुलैंस नयति की ओर ही मोड़ दी यहॉ पे आकर ही डॉक्टर लोगों ने इंटरटेन किया हम लोगों को बहुत अच्छे से और फिर ये वेंट पर भी गयी, डेढ महीने यहॉ हॉस्पिटल में रहीं लेकिन यहॉ के जो डॉक्टर्स है उनकी वजह से हमारे बीच में बैठी हुई हैं हालत बहुत ही ज्यादा गम्भीर थी वेंटीलेटर पर सात-आठ दिन ही रहीं उसके बाद आईसीयू में आती जाती रहीं फिर इनके टिकोस्मी का ट्यूब डाला इनके उससे इनकी सांस वापिस आयी फिर वो एक महीने बाद निकाली गयी फिर ये बोलने लायक हुयी धीरे-धीरे इनको इतना फायदा है अब ये चल लेती हैं, घूम लेती हैं फिर लेती हैं अपने काम कर लेती हैं और यहॉ के काबिल डॉक्टरों की वजह से आज मेरी माता जी आज मेरे बीच में हैं, मैं इनका धन्यवाद करता हूं और हॉस्पिटल की फेसिलिटी तो वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज हैं जैसे दिल्ली में हम देखते हैं जाते-आते रहे हैं 5-7 साल से उससे से भी बेटर फेसिलिटी है और धीरे-धीरे धीरे-धीरे तरक्की भी कर रहा है मेरी शुभकामनाएं हॉस्पिटल के साथ हैं। थैंक्यू

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  • The very thought of hospitalization is scary and traumatizing but caring doctors like Dr. R.K.Mani make the experience friendly and pleasing. I would like to thank Dr. Mani for his effective analysis and diagnosis else, I would never have been able to continue a blissful life. Many of your patients have recommended you as a good doctor but I am going one step further to recommend you as a great human being. Thanks Dr RK Mani, you are not just a doctor but also a magician.Nayati multi super speciality hospital impressed us with the great services offered to the patients. I don’t get a feeling that I am not in Delhi.

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  • मेरा नाम है अजय यादव और मैं बोम्बे में रहता हूं। मेरी बहिन आगरा में रहती हैं और उन्हीं की तबियत खराब हो गयी थी। एक हफ्ते तक आगरा में किसी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल आईसीयू में रखा था। लेकिन वहॉ हालत देखकर काफी डर लग रहा था। फिर वहॉ के फ्रेण्डली डॉक्टर ने बताया और उस वक्त मुझे हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा पता नहीं था। नेट पर सर्च किया, तो अच्छा लगा, डॉक्टर्स के बारे में चेक किया तो पता चला डॉक्टर बहुत ही ज्यादा अच्छे एण्ड वैल क्वालिफाइड, एक्सपीरिएन्ट्स हैं। तो एक आम आदमी कि तरह मन में शक आ जाता है कि मथुरा में इतने बड़े डॉक्टर शायद सिर्फ पैनल पे नाम रखा होगा असलियत में नहीं आते होंगे ड्यूटी पे कभी-कभी फोन पे कन्सर्ट करते होंगे, इमरजैंसी में आते होंगे। आम आदमी की तरह मेरे मन भी वो शक आया था। तो ऑब्शन मेरे पास ज्यादा थे नहीं। बिकोज मेरी सिस्टर की हालत ऐसी थी नहीं कि दिल्ली या मुम्बई तक उनको शिफ्ट किया जा सके। ऑलरेडी वे वेन्टीलेटर पर थी लेकिन उसके बाद पता किया डायरेक्टली नयति में फोन किया। रिसेप्शन पे उन लोगों ने बताया कि डॉक्टर आते है। डॉ. मनी मण्डे से थर्सडे तक खुद रहते हैं हॉस्पिटल में, ये सुनकर अच्छा लगा। इसके बाद एम्बुलैंस मंगवाया, मेरी सिस्टर की हालत काफी गम्भीर थी। एम्बुलैंस से मेरी सिस्टर आगरा से मथुरा 1 घण्टा 10 मिनट में हॉस्पिटल आयीं। मुझे पेपर वर्क के लिए रोका। मेरी सिस्टर को डायरेक्टली आईसी में ले गये एण्ड उनकी कण्डीशन कन्ट्रोल में की। फाइनली डॉक्टर मनी और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से वर्क किया। मैं बहुत खुश था। जब आपका पेशेन्ट आईसीयू में होता है आपको पता नहीं चलता है कि क्या ट्रीटमेन्ट हो रहा है क्या स्टेज है, दो तीन बार साइन करने के लिए बुलाया जाता है, जैसा कि हर जगह होता है। लेकिन यहॉ पर काउंसलिंग प्रोसीजर बहुत ही अच्छा है। यहॉ के डॉक्टर कितने भी व्यस्त क्यों न हो पर टाइम निकालकर पेशेंट के पास जाते है। जब मेरी बहन बेहोशी से होश में आयी तो काफी स्टोरी उनके मन में थी। सिस्टर ने बोला आज मेरा बर्थडे है फिर डॉक्टर आर.के. मनी और उनकी टीम ने उनका जन्मदिन मनाया।

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  • मेरी माताजी का नाम कुसुमलता है। इन्हे करीब 7 साल से अस्थमा की दिक्कत थी। करीब 7 साल पहले इन्हे अस्थमा का अटैक आया था। तो लोकल ही हमने दिखाया यहॉ से कोई सुविधा नही मिली। तो इन्हे दिल्ली ले गये इनको उसके बाद 3 साल तक ठीक रहीं उसके बाद 3 तक इनको अस्थमा के अटैक आते रहे हैं हर 6 महीने बाद। 6 महीने में यहॉ का पेशेंट दिल्ली पहुंचाता बड़ा बोड़ेडाइल होता है, बड़ी समस्या होती थी। अभी रीसेन्टली 6 महीने पहले एक अटैक आया इनको हमने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया, उन्होंने 5 दिन ट्रीटमेंट दिया लेकिन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, स्थिति ये हो गयी इनकी बॉडी में लेबल 20% ही बचा था तो हम लोग दिल्ली लेकर दौड़ रहे थे लेकिन दिल्ली ले जाने की इनकी हालत नहीं थी फिर हमें नयति का बोर्ड दिखा फिर हमने अपनी एम्बुलैंस नयति की ओर ही मोड़ दी यहॉ पे आकर ही डॉक्टर लोगों ने इंटरटेन किया हम लोगों को बहुत अच्छे से और फिर ये वेंट पर भी गयी, डेढ महीने यहॉ हॉस्पिटल में रहीं लेकिन यहॉ के जो डॉक्टर्स है उनकी वजह से हमारे बीच में बैठी हुई हैं हालत बहुत ही ज्यादा गम्भीर थी वेंटीलेटर पर सात-आठ दिन ही रहीं उसके बाद आईसीयू में आती जाती रहीं फिर इनके टिकोस्मी का ट्यूब डाला इनके उससे इनकी सांस वापिस आयी फिर वो एक महीने बाद निकाली गयी फिर ये बोलने लायक हुयी धीरे-धीरे इनको इतना फायदा है अब ये चल लेती हैं, घूम लेती हैं फिर लेती हैं अपने काम कर लेती हैं और यहॉ के काबिल डॉक्टरों की वजह से आज मेरी माता जी आज मेरे बीच में हैं, मैं इनका धन्यवाद करता हूं और हॉस्पिटल की फेसिलिटी तो वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज हैं जैसे दिल्ली में हम देखते हैं जाते-आते रहे हैं 5-7 साल से उससे से भी बेटर फेसिलिटी है और धीरे-धीरे धीरे-धीरे तरक्की भी कर रहा है मेरी शुभकामनाएं हॉस्पिटल के साथ हैं। थैंक्यू

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  • The very thought of hospitalization is scary and traumatizing but caring doctors like Dr. R.K.Mani make the experience friendly and pleasing. I would like to thank Dr. Mani for his effective analysis and diagnosis else, I would never have been able to continue a blissful life. Many of your patients have recommended you as a good doctor but I am going one step further to recommend you as a great human being. Thanks Dr RK Mani, you are not just a doctor but also a magician.Nayati multi super speciality hospital impressed us with the great services offered to the patients. I don’t get a feeling that I am not in Delhi.

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  • मेरा नाम है अजय यादव और मैं बोम्बे में रहता हूं। मेरी बहिन आगरा में रहती हैं और उन्हीं की तबियत खराब हो गयी थी। एक हफ्ते तक आगरा में किसी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल आईसीयू में रखा था। लेकिन वहॉ हालत देखकर काफी डर लग रहा था। फिर वहॉ के फ्रेण्डली डॉक्टर ने बताया और उस वक्त मुझे हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा पता नहीं था। नेट पर सर्च किया, तो अच्छा लगा, डॉक्टर्स के बारे में चेक किया तो पता चला डॉक्टर बहुत ही ज्यादा अच्छे एण्ड वैल क्वालिफाइड, एक्सपीरिएन्ट्स हैं। तो एक आम आदमी कि तरह मन में शक आ जाता है कि मथुरा में इतने बड़े डॉक्टर शायद सिर्फ पैनल पे नाम रखा होगा असलियत में नहीं आते होंगे ड्यूटी पे कभी-कभी फोन पे कन्सर्ट करते होंगे, इमरजैंसी में आते होंगे। आम आदमी की तरह मेरे मन भी वो शक आया था। तो ऑब्शन मेरे पास ज्यादा थे नहीं। बिकोज मेरी सिस्टर की हालत ऐसी थी नहीं कि दिल्ली या मुम्बई तक उनको शिफ्ट किया जा सके। ऑलरेडी वे वेन्टीलेटर पर थी लेकिन उसके बाद पता किया डायरेक्टली नयति में फोन किया। रिसेप्शन पे उन लोगों ने बताया कि डॉक्टर आते है। डॉ. मनी मण्डे से थर्सडे तक खुद रहते हैं हॉस्पिटल में, ये सुनकर अच्छा लगा। इसके बाद एम्बुलैंस मंगवाया, मेरी सिस्टर की हालत काफी गम्भीर थी। एम्बुलैंस से मेरी सिस्टर आगरा से मथुरा 1 घण्टा 10 मिनट में हॉस्पिटल आयीं। मुझे पेपर वर्क के लिए रोका। मेरी सिस्टर को डायरेक्टली आईसी में ले गये एण्ड उनकी कण्डीशन कन्ट्रोल में की। फाइनली डॉक्टर मनी और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से वर्क किया। मैं बहुत खुश था। जब आपका पेशेन्ट आईसीयू में होता है आपको पता नहीं चलता है कि क्या ट्रीटमेन्ट हो रहा है क्या स्टेज है, दो तीन बार साइन करने के लिए बुलाया जाता है, जैसा कि हर जगह होता है। लेकिन यहॉ पर काउंसलिंग प्रोसीजर बहुत ही अच्छा है। यहॉ के डॉक्टर कितने भी व्यस्त क्यों न हो पर टाइम निकालकर पेशेंट के पास जाते है। जब मेरी बहन बेहोशी से होश में आयी तो काफी स्टोरी उनके मन में थी। सिस्टर ने बोला आज मेरा बर्थडे है फिर डॉक्टर आर.के. मनी और उनकी टीम ने उनका जन्मदिन मनाया।

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  • मेरा नाम है अजय यादव और मैं बोम्बे में रहता हूं। मेरी बहिन आगरा में रहती हैं और उन्हीं की तबियत खराब हो गयी थी। एक हफ्ते तक आगरा में किसी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल आईसीयू में रखा था। लेकिन वहॉ हालत देखकर काफी डर लग रहा था। फिर वहॉ के फ्रेण्डली डॉक्टर ने बताया और उस वक्त मुझे हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा पता नहीं था। नेट पर सर्च किया, तो अच्छा लगा, डॉक्टर्स के बारे में चेक किया तो पता चला डॉक्टर बहुत ही ज्यादा अच्छे एण्ड वैल क्वालिफाइड, एक्सपीरिएन्ट्स हैं। तो एक आम आदमी कि तरह मन में शक आ जाता है कि मथुरा में इतने बड़े डॉक्टर शायद सिर्फ पैनल पे नाम रखा होगा असलियत में नहीं आते होंगे ड्यूटी पे कभी-कभी फोन पे कन्सर्ट करते होंगे, इमरजैंसी में आते होंगे। आम आदमी की तरह मेरे मन भी वो शक आया था। तो ऑब्शन मेरे पास ज्यादा थे नहीं। बिकोज मेरी सिस्टर की हालत ऐसी थी नहीं कि दिल्ली या मुम्बई तक उनको शिफ्ट किया जा सके। ऑलरेडी वे वेन्टीलेटर पर थी लेकिन उसके बाद पता किया डायरेक्टली नयति में फोन किया। रिसेप्शन पे उन लोगों ने बताया कि डॉक्टर आते है। डॉ. मनी मण्डे से थर्सडे तक खुद रहते हैं हॉस्पिटल में, ये सुनकर अच्छा लगा। इसके बाद एम्बुलैंस मंगवाया, मेरी सिस्टर की हालत काफी गम्भीर थी। एम्बुलैंस से मेरी सिस्टर आगरा से मथुरा 1 घण्टा 10 मिनट में हॉस्पिटल आयीं। मुझे पेपर वर्क के लिए रोका। मेरी सिस्टर को डायरेक्टली आईसी में ले गये एण्ड उनकी कण्डीशन कन्ट्रोल में की। फाइनली डॉक्टर मनी और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से वर्क किया। मैं बहुत खुश था। जब आपका पेशेन्ट आईसीयू में होता है आपको पता नहीं चलता है कि क्या ट्रीटमेन्ट हो रहा है क्या स्टेज है, दो तीन बार साइन करने के लिए बुलाया जाता है, जैसा कि हर जगह होता है। लेकिन यहॉ पर काउंसलिंग प्रोसीजर बहुत ही अच्छा है। यहॉ के डॉक्टर कितने भी व्यस्त क्यों न हो पर टाइम निकालकर पेशेंट के पास जाते है। जब मेरी बहन बेहोशी से होश में आयी तो काफी स्टोरी उनके मन में थी। सिस्टर ने बोला आज मेरा बर्थडे है फिर डॉक्टर आर.के. मनी और उनकी टीम ने उनका जन्मदिन मनाया।

    Ajay Yadav

  • मेरी माताजी का नाम कुसुमलता है। इन्हे करीब 7 साल से अस्थमा की दिक्कत थी। करीब 7 साल पहले इन्हे अस्थमा का अटैक आया था। तो लोकल ही हमने दिखाया यहॉ से कोई सुविधा नही मिली। तो इन्हे दिल्ली ले गये इनको उसके बाद 3 साल तक ठीक रहीं उसके बाद 3 तक इनको अस्थमा के अटैक आते रहे हैं हर 6 महीने बाद। 6 महीने में यहॉ का पेशेंट दिल्ली पहुंचाता बड़ा बोड़ेडाइल होता है, बड़ी समस्या होती थी। अभी रीसेन्टली 6 महीने पहले एक अटैक आया इनको हमने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया, उन्होंने 5 दिन ट्रीटमेंट दिया लेकिन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, स्थिति ये हो गयी इनकी बॉडी में लेबल 20% ही बचा था तो हम लोग दिल्ली लेकर दौड़ रहे थे लेकिन दिल्ली ले जाने की इनकी हालत नहीं थी फिर हमें नयति का बोर्ड दिखा फिर हमने अपनी एम्बुलैंस नयति की ओर ही मोड़ दी यहॉ पे आकर ही डॉक्टर लोगों ने इंटरटेन किया हम लोगों को बहुत अच्छे से और फिर ये वेंट पर भी गयी, डेढ महीने यहॉ हॉस्पिटल में रहीं लेकिन यहॉ के जो डॉक्टर्स है उनकी वजह से हमारे बीच में बैठी हुई हैं हालत बहुत ही ज्यादा गम्भीर थी वेंटीलेटर पर सात-आठ दिन ही रहीं उसके बाद आईसीयू में आती जाती रहीं फिर इनके टिकोस्मी का ट्यूब डाला इनके उससे इनकी सांस वापिस आयी फिर वो एक महीने बाद निकाली गयी फिर ये बोलने लायक हुयी धीरे-धीरे इनको इतना फायदा है अब ये चल लेती हैं, घूम लेती हैं फिर लेती हैं अपने काम कर लेती हैं और यहॉ के काबिल डॉक्टरों की वजह से आज मेरी माता जी आज मेरे बीच में हैं, मैं इनका धन्यवाद करता हूं और हॉस्पिटल की फेसिलिटी तो वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज हैं जैसे दिल्ली में हम देखते हैं जाते-आते रहे हैं 5-7 साल से उससे से भी बेटर फेसिलिटी है और धीरे-धीरे धीरे-धीरे तरक्की भी कर रहा है मेरी शुभकामनाएं हॉस्पिटल के साथ हैं। थैंक्यू

    Kusum Lata

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Critical Care

  • The very thought of hospitalization is scary and traumatizing but caring doctors like Dr. R.K.Mani make the experience friendly and pleasing. I would like to thank Dr. Mani for his effective analysis and diagnosis else, I would never have been able to continue a blissful life. Many of your patients have recommended you as a good doctor but I am going one step further to recommend you as a great human being. Thanks Dr RK Mani, you are not just a doctor but also a magician.Nayati multi super speciality hospital impressed us with the great services offered to the patients. I don’t get a feeling that I am not in Delhi.

    Shekhar Singh

  • मेरा नाम है अजय यादव और मैं बोम्बे में रहता हूं। मेरी बहिन आगरा में रहती हैं और उन्हीं की तबियत खराब हो गयी थी। एक हफ्ते तक आगरा में किसी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल आईसीयू में रखा था। लेकिन वहॉ हालत देखकर काफी डर लग रहा था। फिर वहॉ के फ्रेण्डली डॉक्टर ने बताया और उस वक्त मुझे हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा पता नहीं था। नेट पर सर्च किया, तो अच्छा लगा, डॉक्टर्स के बारे में चेक किया तो पता चला डॉक्टर बहुत ही ज्यादा अच्छे एण्ड वैल क्वालिफाइड, एक्सपीरिएन्ट्स हैं। तो एक आम आदमी कि तरह मन में शक आ जाता है कि मथुरा में इतने बड़े डॉक्टर शायद सिर्फ पैनल पे नाम रखा होगा असलियत में नहीं आते होंगे ड्यूटी पे कभी-कभी फोन पे कन्सर्ट करते होंगे, इमरजैंसी में आते होंगे। आम आदमी की तरह मेरे मन भी वो शक आया था। तो ऑब्शन मेरे पास ज्यादा थे नहीं। बिकोज मेरी सिस्टर की हालत ऐसी थी नहीं कि दिल्ली या मुम्बई तक उनको शिफ्ट किया जा सके। ऑलरेडी वे वेन्टीलेटर पर थी लेकिन उसके बाद पता किया डायरेक्टली नयति में फोन किया। रिसेप्शन पे उन लोगों ने बताया कि डॉक्टर आते है। डॉ. मनी मण्डे से थर्सडे तक खुद रहते हैं हॉस्पिटल में, ये सुनकर अच्छा लगा। इसके बाद एम्बुलैंस मंगवाया, मेरी सिस्टर की हालत काफी गम्भीर थी। एम्बुलैंस से मेरी सिस्टर आगरा से मथुरा 1 घण्टा 10 मिनट में हॉस्पिटल आयीं। मुझे पेपर वर्क के लिए रोका। मेरी सिस्टर को डायरेक्टली आईसी में ले गये एण्ड उनकी कण्डीशन कन्ट्रोल में की। फाइनली डॉक्टर मनी और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से वर्क किया। मैं बहुत खुश था। जब आपका पेशेन्ट आईसीयू में होता है आपको पता नहीं चलता है कि क्या ट्रीटमेन्ट हो रहा है क्या स्टेज है, दो तीन बार साइन करने के लिए बुलाया जाता है, जैसा कि हर जगह होता है। लेकिन यहॉ पर काउंसलिंग प्रोसीजर बहुत ही अच्छा है। यहॉ के डॉक्टर कितने भी व्यस्त क्यों न हो पर टाइम निकालकर पेशेंट के पास जाते है। जब मेरी बहन बेहोशी से होश में आयी तो काफी स्टोरी उनके मन में थी। सिस्टर ने बोला आज मेरा बर्थडे है फिर डॉक्टर आर.के. मनी और उनकी टीम ने उनका जन्मदिन मनाया।

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  • मेरी माताजी का नाम कुसुमलता है। इन्हे करीब 7 साल से अस्थमा की दिक्कत थी। करीब 7 साल पहले इन्हे अस्थमा का अटैक आया था। तो लोकल ही हमने दिखाया यहॉ से कोई सुविधा नही मिली। तो इन्हे दिल्ली ले गये इनको उसके बाद 3 साल तक ठीक रहीं उसके बाद 3 तक इनको अस्थमा के अटैक आते रहे हैं हर 6 महीने बाद। 6 महीने में यहॉ का पेशेंट दिल्ली पहुंचाता बड़ा बोड़ेडाइल होता है, बड़ी समस्या होती थी। अभी रीसेन्टली 6 महीने पहले एक अटैक आया इनको हमने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया, उन्होंने 5 दिन ट्रीटमेंट दिया लेकिन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, स्थिति ये हो गयी इनकी बॉडी में लेबल 20% ही बचा था तो हम लोग दिल्ली लेकर दौड़ रहे थे लेकिन दिल्ली ले जाने की इनकी हालत नहीं थी फिर हमें नयति का बोर्ड दिखा फिर हमने अपनी एम्बुलैंस नयति की ओर ही मोड़ दी यहॉ पे आकर ही डॉक्टर लोगों ने इंटरटेन किया हम लोगों को बहुत अच्छे से और फिर ये वेंट पर भी गयी, डेढ महीने यहॉ हॉस्पिटल में रहीं लेकिन यहॉ के जो डॉक्टर्स है उनकी वजह से हमारे बीच में बैठी हुई हैं हालत बहुत ही ज्यादा गम्भीर थी वेंटीलेटर पर सात-आठ दिन ही रहीं उसके बाद आईसीयू में आती जाती रहीं फिर इनके टिकोस्मी का ट्यूब डाला इनके उससे इनकी सांस वापिस आयी फिर वो एक महीने बाद निकाली गयी फिर ये बोलने लायक हुयी धीरे-धीरे इनको इतना फायदा है अब ये चल लेती हैं, घूम लेती हैं फिर लेती हैं अपने काम कर लेती हैं और यहॉ के काबिल डॉक्टरों की वजह से आज मेरी माता जी आज मेरे बीच में हैं, मैं इनका धन्यवाद करता हूं और हॉस्पिटल की फेसिलिटी तो वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज हैं जैसे दिल्ली में हम देखते हैं जाते-आते रहे हैं 5-7 साल से उससे से भी बेटर फेसिलिटी है और धीरे-धीरे धीरे-धीरे तरक्की भी कर रहा है मेरी शुभकामनाएं हॉस्पिटल के साथ हैं। थैंक्यू

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  • मेरा नाम है अजय यादव और मैं बोम्बे में रहता हूं। मेरी बहिन आगरा में रहती हैं और उन्हीं की तबियत खराब हो गयी थी। एक हफ्ते तक आगरा में किसी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल आईसीयू में रखा था। लेकिन वहॉ हालत देखकर काफी डर लग रहा था। फिर वहॉ के फ्रेण्डली डॉक्टर ने बताया और उस वक्त मुझे हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा पता नहीं था। नेट पर सर्च किया, तो अच्छा लगा, डॉक्टर्स के बारे में चेक किया तो पता चला डॉक्टर बहुत ही ज्यादा अच्छे एण्ड वैल क्वालिफाइड, एक्सपीरिएन्ट्स हैं। तो एक आम आदमी कि तरह मन में शक आ जाता है कि मथुरा में इतने बड़े डॉक्टर शायद सिर्फ पैनल पे नाम रखा होगा असलियत में नहीं आते होंगे ड्यूटी पे कभी-कभी फोन पे कन्सर्ट करते होंगे, इमरजैंसी में आते होंगे। आम आदमी की तरह मेरे मन भी वो शक आया था। तो ऑब्शन मेरे पास ज्यादा थे नहीं। बिकोज मेरी सिस्टर की हालत ऐसी थी नहीं कि दिल्ली या मुम्बई तक उनको शिफ्ट किया जा सके। ऑलरेडी वे वेन्टीलेटर पर थी लेकिन उसके बाद पता किया डायरेक्टली नयति में फोन किया। रिसेप्शन पे उन लोगों ने बताया कि डॉक्टर आते है। डॉ. मनी मण्डे से थर्सडे तक खुद रहते हैं हॉस्पिटल में, ये सुनकर अच्छा लगा। इसके बाद एम्बुलैंस मंगवाया, मेरी सिस्टर की हालत काफी गम्भीर थी। एम्बुलैंस से मेरी सिस्टर आगरा से मथुरा 1 घण्टा 10 मिनट में हॉस्पिटल आयीं। मुझे पेपर वर्क के लिए रोका। मेरी सिस्टर को डायरेक्टली आईसी में ले गये एण्ड उनकी कण्डीशन कन्ट्रोल में की। फाइनली डॉक्टर मनी और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से वर्क किया। मैं बहुत खुश था। जब आपका पेशेन्ट आईसीयू में होता है आपको पता नहीं चलता है कि क्या ट्रीटमेन्ट हो रहा है क्या स्टेज है, दो तीन बार साइन करने के लिए बुलाया जाता है, जैसा कि हर जगह होता है। लेकिन यहॉ पर काउंसलिंग प्रोसीजर बहुत ही अच्छा है। यहॉ के डॉक्टर कितने भी व्यस्त क्यों न हो पर टाइम निकालकर पेशेंट के पास जाते है। जब मेरी बहन बेहोशी से होश में आयी तो काफी स्टोरी उनके मन में थी। सिस्टर ने बोला आज मेरा बर्थडे है फिर डॉक्टर आर.के. मनी और उनकी टीम ने उनका जन्मदिन मनाया।

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  • मेरी माताजी का नाम कुसुमलता है। इन्हे करीब 7 साल से अस्थमा की दिक्कत थी। करीब 7 साल पहले इन्हे अस्थमा का अटैक आया था। तो लोकल ही हमने दिखाया यहॉ से कोई सुविधा नही मिली। तो इन्हे दिल्ली ले गये इनको उसके बाद 3 साल तक ठीक रहीं उसके बाद 3 तक इनको अस्थमा के अटैक आते रहे हैं हर 6 महीने बाद। 6 महीने में यहॉ का पेशेंट दिल्ली पहुंचाता बड़ा बोड़ेडाइल होता है, बड़ी समस्या होती थी। अभी रीसेन्टली 6 महीने पहले एक अटैक आया इनको हमने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया, उन्होंने 5 दिन ट्रीटमेंट दिया लेकिन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, स्थिति ये हो गयी इनकी बॉडी में लेबल 20% ही बचा था तो हम लोग दिल्ली लेकर दौड़ रहे थे लेकिन दिल्ली ले जाने की इनकी हालत नहीं थी फिर हमें नयति का बोर्ड दिखा फिर हमने अपनी एम्बुलैंस नयति की ओर ही मोड़ दी यहॉ पे आकर ही डॉक्टर लोगों ने इंटरटेन किया हम लोगों को बहुत अच्छे से और फिर ये वेंट पर भी गयी, डेढ महीने यहॉ हॉस्पिटल में रहीं लेकिन यहॉ के जो डॉक्टर्स है उनकी वजह से हमारे बीच में बैठी हुई हैं हालत बहुत ही ज्यादा गम्भीर थी वेंटीलेटर पर सात-आठ दिन ही रहीं उसके बाद आईसीयू में आती जाती रहीं फिर इनके टिकोस्मी का ट्यूब डाला इनके उससे इनकी सांस वापिस आयी फिर वो एक महीने बाद निकाली गयी फिर ये बोलने लायक हुयी धीरे-धीरे इनको इतना फायदा है अब ये चल लेती हैं, घूम लेती हैं फिर लेती हैं अपने काम कर लेती हैं और यहॉ के काबिल डॉक्टरों की वजह से आज मेरी माता जी आज मेरे बीच में हैं, मैं इनका धन्यवाद करता हूं और हॉस्पिटल की फेसिलिटी तो वर्ल्ड क्लास फेसिलिटीज हैं जैसे दिल्ली में हम देखते हैं जाते-आते रहे हैं 5-7 साल से उससे से भी बेटर फेसिलिटी है और धीरे-धीरे धीरे-धीरे तरक्की भी कर रहा है मेरी शुभकामनाएं हॉस्पिटल के साथ हैं। थैंक्यू

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